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Balrampur News: पंचायत सहायकों को कई माह से नहीं मिल रहा मानदेय
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बलरामपुर। ग्राम पंचायतों में सचिवालय भवन संचालन के लिए तैनात किए गए डाटा एंट्री ऑपरेटर/पंचायत सहायक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। महज छह हजार रुपये प्रतिमाह के मानदेय पर काम कर रहे पंचायत सहायकों को पिछले कई माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिले की 793 में से 781 गांवों में पंचायत सहायकों की तैनाती है, 12 पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें से करीब 200 से अधिक पंचायत सहायकों का पांच से 10 महीने का मानदेय बकाया है।
गांवों में ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं का लाभ दिलाने के लिए शासन स्तर से पंचायत सहायकों की तैनाती की गई है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में सचिवालय भवन का निर्माण कराकर कंप्यूटर, इंटरनेट व फर्नीचर आदि की व्यवस्था की गई है। जिले में पंचायत सहायकों के मानदेय भुगतान की प्रक्रिया बहुत सुस्त है। ज्यादातर गांवों में ग्राम प्रधान व सचिव की मिलीभगत से पंचायत सहायकों को मानदेय का भुगतान नहीं हो पा रहा है। बकाया मानदेय भुगतान के लिए पंचायत सहायकों ने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं हो सका।
इन पंचायत सहायकों का बकाया है अधिक मानदेय
पंचायत सहायक जिला यूनियन की एडमिन शिवानी गिरि व बलरामपुर ब्लॉक संघ अध्यक्ष अनिल कुमार ने बताया कि ग्राम प्रधान व सचिवों के मनमाने रवैये के कारण जिले में तैनात पंचायत सहायकों को नियमित मानदेय नहीं मिल पा रहा है। सचिव दबाव बनाकर पंचायत सहायकों से काम करवा लेते हैं, लेकिन हर महीने मानदेय नहीं मिल पाता। महादेव शिवपुर गांव की पंचायत सहायक करिश्मा गुप्ता का 14 महीने, पिपरा गांव की रूपाली मिश्रा का 12 महीने, कैली गांव के सुभाष चंद्र यादव का 10 महीने, करमहना के दीपक कुमार का आठ महीने, वीरपुर सेमरा के जितेंद्र कुमार चौधरी का आठ महीने, रामपुर ग्रिंट की मोनिका देवी व नौबस्ता कला के पंचायत सहायक गौरव सिंह का छह-छह महीने का मानदेय बकाया है। इसी तरह ज्यादातर पंचायत सहायकों का पांच महीने से अधिक का मानदेय फंसा हुआ है।
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दिए गए हैं निर्देश
पंचायत सहायकों के मानदेय के भुगतान के लिए पंचायत सचिवों को निर्देश दिया गया है। पंचायती राज विभाग के जिला परियोजना प्रबंधक संदीप को मानदेय भुगतान की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। - श्रेया उपाध्याय, डीपीआरओ
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गांवों में ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं का लाभ दिलाने के लिए शासन स्तर से पंचायत सहायकों की तैनाती की गई है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में सचिवालय भवन का निर्माण कराकर कंप्यूटर, इंटरनेट व फर्नीचर आदि की व्यवस्था की गई है। जिले में पंचायत सहायकों के मानदेय भुगतान की प्रक्रिया बहुत सुस्त है। ज्यादातर गांवों में ग्राम प्रधान व सचिव की मिलीभगत से पंचायत सहायकों को मानदेय का भुगतान नहीं हो पा रहा है। बकाया मानदेय भुगतान के लिए पंचायत सहायकों ने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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इन पंचायत सहायकों का बकाया है अधिक मानदेय
पंचायत सहायक जिला यूनियन की एडमिन शिवानी गिरि व बलरामपुर ब्लॉक संघ अध्यक्ष अनिल कुमार ने बताया कि ग्राम प्रधान व सचिवों के मनमाने रवैये के कारण जिले में तैनात पंचायत सहायकों को नियमित मानदेय नहीं मिल पा रहा है। सचिव दबाव बनाकर पंचायत सहायकों से काम करवा लेते हैं, लेकिन हर महीने मानदेय नहीं मिल पाता। महादेव शिवपुर गांव की पंचायत सहायक करिश्मा गुप्ता का 14 महीने, पिपरा गांव की रूपाली मिश्रा का 12 महीने, कैली गांव के सुभाष चंद्र यादव का 10 महीने, करमहना के दीपक कुमार का आठ महीने, वीरपुर सेमरा के जितेंद्र कुमार चौधरी का आठ महीने, रामपुर ग्रिंट की मोनिका देवी व नौबस्ता कला के पंचायत सहायक गौरव सिंह का छह-छह महीने का मानदेय बकाया है। इसी तरह ज्यादातर पंचायत सहायकों का पांच महीने से अधिक का मानदेय फंसा हुआ है।
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दिए गए हैं निर्देश
पंचायत सहायकों के मानदेय के भुगतान के लिए पंचायत सचिवों को निर्देश दिया गया है। पंचायती राज विभाग के जिला परियोजना प्रबंधक संदीप को मानदेय भुगतान की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। - श्रेया उपाध्याय, डीपीआरओ