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Balrampur News: कार्रवाई की आहट से जागे जिम्मेदार, दो पंचायतों ने लौटाए आठ लाख रुपये
Wed, 24 Jun 2026 11:25 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:25 PM IST
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बलरामपुर। किसानों के लिए स्थापित किए जाने वाले फार्म मशीनरी बैंक की जांच तेज होने के बाद जिले की दो ग्राम पंचायतों ने सरकारी धन वापस जमा कर दिया है। करीब पांच वर्षों तक खातों में पड़ी रही राशि को लेकर सवाल उठने के बाद अब विभागीय कार्रवाई का दबाव साफ दिखाई देने लगा है। बलरामपुर देहात और अरनहवा ग्राम पंचायतों से जुड़े जिम्मेदारों ने चार-चार लाख रुपये वापस जमा कराए हैं, जबकि दो अन्य पंचायतों पर अब भी आठ लाख रुपये बकाया हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि राशि जमा न होने पर एफआईआर सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वर्ष 2021-22 में कृषि यंत्रीकरण और पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले की चार ग्राम पंचायतों बलरामपुर देहात, अरनहवा, बलदेव नगर और धनघटा को चार-चार लाख रुपये की दर से कुल 16 लाख रुपये दिए गए थे। योजना के तहत पंचायत स्तर पर फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए जाने थे, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा सकें।
हाल ही में हुए भौतिक सत्यापन में चारों पंचायतों में मशीनरी बैंक का कोई अस्तित्व नहीं मिला। न तो कृषि यंत्र मिले और न ही किसानों को योजना का लाभ मिलने के प्रमाण सामने आए। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने बलरामपुर देहात ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव राकेश कुमार और वर्तमान सचिव सहाबुद्दीन, अरनहवा एवं धनघटा ग्राम पंचायतों के तत्कालीन सचिव जगराम और वर्तमान सचिव शिव प्रकाश मिश्रा तथा बलदेव नगर ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव सौरभ श्रीवास्तव और वर्तमान सचिव मोहित त्रिपाठी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
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नोटिस जारी होने और कार्रवाई की संभावना बनने के बाद सबसे पहले बलरामपुर देहात और अरनहवा पंचायतों से जुड़े जिम्मेदारों ने चार-चार लाख रुपये सरकारी खाते में जमा करा दिए। इससे साफ संकेत मिला कि जांच का दबाव बढ़ने के बाद जवाबदेही तय होने लगी है। हालांकि बलदेव नगर और धनघटा पंचायतों की ओर से अभी तक राशि वापस नहीं की गई है।
ब्याज का हिसाब अब भी गायब
इस मामले ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पांच वर्षों तक पंचायतों के खातों में पड़ी सरकारी राशि पर अर्जित ब्याज का कोई स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है। विभागीय जांच में अब इस पहलू की भी पड़ताल की जा रही है कि किसानों के नाम पर जारी धन का लाभ आखिर इतने वर्षों तक किसे मिलता रहा। वहीं, इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक नुकसान उन किसानों का हुआ, जिनके लिए योजना बनाई गई थी। मशीनरी बैंक न बनने से छोटे और सीमांत किसानों को निजी मशीनों पर अधिक खर्च करना पड़ा। कई किसान आज भी किराये पर महंगे कृषि यंत्र लेने को मजबूर हैं।
उप कृषि निदेशक श्याम नारायण राम ने बताया कि दो पंचायतों से कुल आठ लाख रुपये जमा हो चुके हैं। शेष दो पंचायतों को अंतिम अवसर दिया गया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि जमा न होने पर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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वर्ष 2021-22 में कृषि यंत्रीकरण और पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले की चार ग्राम पंचायतों बलरामपुर देहात, अरनहवा, बलदेव नगर और धनघटा को चार-चार लाख रुपये की दर से कुल 16 लाख रुपये दिए गए थे। योजना के तहत पंचायत स्तर पर फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए जाने थे, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा सकें।
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हाल ही में हुए भौतिक सत्यापन में चारों पंचायतों में मशीनरी बैंक का कोई अस्तित्व नहीं मिला। न तो कृषि यंत्र मिले और न ही किसानों को योजना का लाभ मिलने के प्रमाण सामने आए। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने बलरामपुर देहात ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव राकेश कुमार और वर्तमान सचिव सहाबुद्दीन, अरनहवा एवं धनघटा ग्राम पंचायतों के तत्कालीन सचिव जगराम और वर्तमान सचिव शिव प्रकाश मिश्रा तथा बलदेव नगर ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव सौरभ श्रीवास्तव और वर्तमान सचिव मोहित त्रिपाठी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
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नोटिस जारी होने और कार्रवाई की संभावना बनने के बाद सबसे पहले बलरामपुर देहात और अरनहवा पंचायतों से जुड़े जिम्मेदारों ने चार-चार लाख रुपये सरकारी खाते में जमा करा दिए। इससे साफ संकेत मिला कि जांच का दबाव बढ़ने के बाद जवाबदेही तय होने लगी है। हालांकि बलदेव नगर और धनघटा पंचायतों की ओर से अभी तक राशि वापस नहीं की गई है।
ब्याज का हिसाब अब भी गायब
इस मामले ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पांच वर्षों तक पंचायतों के खातों में पड़ी सरकारी राशि पर अर्जित ब्याज का कोई स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है। विभागीय जांच में अब इस पहलू की भी पड़ताल की जा रही है कि किसानों के नाम पर जारी धन का लाभ आखिर इतने वर्षों तक किसे मिलता रहा। वहीं, इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक नुकसान उन किसानों का हुआ, जिनके लिए योजना बनाई गई थी। मशीनरी बैंक न बनने से छोटे और सीमांत किसानों को निजी मशीनों पर अधिक खर्च करना पड़ा। कई किसान आज भी किराये पर महंगे कृषि यंत्र लेने को मजबूर हैं।
उप कृषि निदेशक श्याम नारायण राम ने बताया कि दो पंचायतों से कुल आठ लाख रुपये जमा हो चुके हैं। शेष दो पंचायतों को अंतिम अवसर दिया गया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि जमा न होने पर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।