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Balrampur News: अब एसएमसी अध्यक्ष व प्रधानाध्यापक करेंगे एमडीएम खाते का संचालन
Thu, 06 Aug 2026 10:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 06 Aug 2026 10:58 PM IST
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बलरामपुर। जिले में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना के बैंक खातों के संचालन के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब विद्यालयों के मध्याह्न भोजन निधि खाते विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित होंगे।
डीएम ने बताया कि प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो चुका है। अब तक एमडीएम खातों का संचालन ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता था। ग्राम पंचायतों के सामान्य निर्वाचन तक योजना के संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए शासन के निर्देश पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
नई व्यवस्था के तहत जिन विद्यालयों में मध्याह्न भोजन निधि खाते संचालित हैं, वहां एसएमसी अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक संयुक्त रूप से खाते का संचालन करेंगे। योजना से संबंधित सभी आय-व्यय का अभिलेख सुरक्षित रखा जाएगा तथा इसकी जानकारी विद्यालय प्रबंध समिति की बैठकों में प्रस्तुत की जाएगी।
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जिलाधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने विकासखंड के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस व्यवस्था का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराएं, ताकि मध्याह्न भोजन योजना का संचालन निर्बाध रूप से जारी रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन विद्यालयों में एसएमसी अध्यक्ष ग्राम प्रधान पद का उम्मीदवार होगा, वहां यह व्यवस्था लागू नहीं होगी।
बॉक्स
एमडीएम खाते का अधिकार छिनने से प्रधानों में नाराजगी
मध्याह्न भोजन योजना के खातों के संचालन से ग्राम प्रधानों को अलग किए जाने पर प्रधानों ने नाराजगी जताई है। अखिल भारतीय पंचायत परिषद, बलरामपुर के जिलाध्यक्ष गुलजारी लाल ने कहा कि ग्राम प्रधानों को एमडीएम खातों के संचालन से अलग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है। उनका कहना है कि सरकार लगातार ग्राम पंचायतों के अधिकार सीमित कर रही है। यदि सभी वित्तीय अधिकार वापस ही लेने हैं तो ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने का औचित्य नहीं रह जाता।
अमरहवा के ग्राम प्रधान/प्रशासक शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालयों के संचालन और व्यवस्थाओं में ग्राम पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खाते के संचालन का अधिकार समाप्त होने से पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित होगी।
ग्राम लुचुइया की प्रधान/प्रशासक लालती सिंह ने कहा कि ग्राम प्रधान जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। बिना व्यापक चर्चा के उनके अधिकार कम करना उचित नहीं है। सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
श्रीदत्तगंज ब्लॉक प्रधान संघ के अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने कहा कि यदि पंचायत प्रतिनिधियों से एक-एक कर सभी अधिकार वापस लिए जाते रहे तो पंचायती राज व्यवस्था का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। सरकार को ग्राम प्रधानों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करनी चाहिए।
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डीएम ने बताया कि प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो चुका है। अब तक एमडीएम खातों का संचालन ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता था। ग्राम पंचायतों के सामान्य निर्वाचन तक योजना के संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए शासन के निर्देश पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
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नई व्यवस्था के तहत जिन विद्यालयों में मध्याह्न भोजन निधि खाते संचालित हैं, वहां एसएमसी अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक संयुक्त रूप से खाते का संचालन करेंगे। योजना से संबंधित सभी आय-व्यय का अभिलेख सुरक्षित रखा जाएगा तथा इसकी जानकारी विद्यालय प्रबंध समिति की बैठकों में प्रस्तुत की जाएगी।
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जिलाधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने विकासखंड के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस व्यवस्था का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराएं, ताकि मध्याह्न भोजन योजना का संचालन निर्बाध रूप से जारी रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन विद्यालयों में एसएमसी अध्यक्ष ग्राम प्रधान पद का उम्मीदवार होगा, वहां यह व्यवस्था लागू नहीं होगी।
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एमडीएम खाते का अधिकार छिनने से प्रधानों में नाराजगी
मध्याह्न भोजन योजना के खातों के संचालन से ग्राम प्रधानों को अलग किए जाने पर प्रधानों ने नाराजगी जताई है। अखिल भारतीय पंचायत परिषद, बलरामपुर के जिलाध्यक्ष गुलजारी लाल ने कहा कि ग्राम प्रधानों को एमडीएम खातों के संचालन से अलग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है। उनका कहना है कि सरकार लगातार ग्राम पंचायतों के अधिकार सीमित कर रही है। यदि सभी वित्तीय अधिकार वापस ही लेने हैं तो ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने का औचित्य नहीं रह जाता।
अमरहवा के ग्राम प्रधान/प्रशासक शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालयों के संचालन और व्यवस्थाओं में ग्राम पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खाते के संचालन का अधिकार समाप्त होने से पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित होगी।
ग्राम लुचुइया की प्रधान/प्रशासक लालती सिंह ने कहा कि ग्राम प्रधान जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। बिना व्यापक चर्चा के उनके अधिकार कम करना उचित नहीं है। सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
श्रीदत्तगंज ब्लॉक प्रधान संघ के अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने कहा कि यदि पंचायत प्रतिनिधियों से एक-एक कर सभी अधिकार वापस लिए जाते रहे तो पंचायती राज व्यवस्था का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। सरकार को ग्राम प्रधानों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करनी चाहिए।