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Balrampur News: अब आधार सत्यापन के बाद ही हो सकेगा भूमि का बैनामा
Sat, 02 Dec 2023 11:24 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 02 Dec 2023 11:24 PM IST
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- फर्जीवाड़ा रोकने के लिए लागू की गई नई व्यवस्था
- बैनामा वाले भू-खंड का जीओ टैग फोटो भी पड़ेगा देना
संवाद न्यूज एजेंसी
बलरामपुर। जमीन की खरीद - फरोख्त में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अब भूमि का बैनामा कराने पर आधार का सत्यापन जरूरी होगा। इसके तहत जमीन खरीदने और बेचने वालों के फिंगर प्रिंट का मिलान उनके आधार कार्ड के डाटा में अपलोड अंगुलियों के निशान से होगा। दोनों फिंगर प्रिंट एक जैसे मिलने पर ही जमीन को रजिस्ट्री हो सकेगी। वहीं बिक्री वाले भू- खंड का जीओ लोकेशन वाले फोटो को भी बैनामा प्रपत्र के साथ लगाना होगा।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए निबंधन कार्यालय में बायोमैट्रिक मशीन लगाने के साथ ही अन्य व्यवस्थाएं भी होगी। अभी तक बैनामे के समय अंगूठे के निशान तो लिए जाते हैं, लेकिन इसका आधार डाटा से मिलान नहीं किया जाता है। इस कारण इसमें फर्जीवाड़ा होता रहता है। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रार कार्यालयों में रजिस्ट्री का सॉफ्टवेयर डिजिटल रूप से लिंकअप किया गया है। अब जमीन के दस्तावेजों में आधार कार्ड को जानकारी तो देनी ही होगी, साथ अंगुलियों के निशान लेकर इसका आधार सत्यापन होगा।
चौहद्दी लिखने में मनमानी पर लगेगा अंकुश
- अभी तक बैनामें में चौहद्दी का नक्शा लेखक कलम से बना देता है। जिससे वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं हो पाती है। भू- खंड की पहचान गाटा संख्या और राजस्व गांव से होती है। लेकिन अब भू- खंड का जीओ टैगिंग फोटो देने से चौहद्दी लिखने में मनमानी पर अंकुश लगेगा। चौहद्दी के आधार पर ही क्रेता जमीन पर कब्जा करता है।
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-- आधार सत्यापन की प्रक्रिया अभी ट्रायल फेज में है, विभाग इसे लागू करने की तैयारी कर रहा है। भू-खंड के जीओ टैग फोटो को भी अब सामान्य बैनामा में लगाना जरूरी होगा।
सुरेश चंद्र मौर्या, उपनिबंधक तुलसीपुर
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- बैनामा वाले भू-खंड का जीओ टैग फोटो भी पड़ेगा देना
संवाद न्यूज एजेंसी
बलरामपुर। जमीन की खरीद - फरोख्त में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अब भूमि का बैनामा कराने पर आधार का सत्यापन जरूरी होगा। इसके तहत जमीन खरीदने और बेचने वालों के फिंगर प्रिंट का मिलान उनके आधार कार्ड के डाटा में अपलोड अंगुलियों के निशान से होगा। दोनों फिंगर प्रिंट एक जैसे मिलने पर ही जमीन को रजिस्ट्री हो सकेगी। वहीं बिक्री वाले भू- खंड का जीओ लोकेशन वाले फोटो को भी बैनामा प्रपत्र के साथ लगाना होगा।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए निबंधन कार्यालय में बायोमैट्रिक मशीन लगाने के साथ ही अन्य व्यवस्थाएं भी होगी। अभी तक बैनामे के समय अंगूठे के निशान तो लिए जाते हैं, लेकिन इसका आधार डाटा से मिलान नहीं किया जाता है। इस कारण इसमें फर्जीवाड़ा होता रहता है। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रार कार्यालयों में रजिस्ट्री का सॉफ्टवेयर डिजिटल रूप से लिंकअप किया गया है। अब जमीन के दस्तावेजों में आधार कार्ड को जानकारी तो देनी ही होगी, साथ अंगुलियों के निशान लेकर इसका आधार सत्यापन होगा।
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चौहद्दी लिखने में मनमानी पर लगेगा अंकुश
- अभी तक बैनामें में चौहद्दी का नक्शा लेखक कलम से बना देता है। जिससे वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं हो पाती है। भू- खंड की पहचान गाटा संख्या और राजस्व गांव से होती है। लेकिन अब भू- खंड का जीओ टैगिंग फोटो देने से चौहद्दी लिखने में मनमानी पर अंकुश लगेगा। चौहद्दी के आधार पर ही क्रेता जमीन पर कब्जा करता है।
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सुरेश चंद्र मौर्या, उपनिबंधक तुलसीपुर