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Balrampur News: पुत्र की लंबी आयु के लिए आज व्रत रखेंगी माताएं
Tue, 06 Jan 2026 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 06 Jan 2026 12:23 AM IST
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बलरामपुर। सकट चतुर्थी का पर्व छह जनवरी को परंपरागत तरीके से मनाया जाएगा। महिलाएं अपने पुत्रों की लंबी आयु की कामना के साथ निर्जला व्रत रखकर पूजा-अर्चना करेंगी। इसके लिए घरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बाजारों में तिल, गंजी और पूजन सामग्री की लोगों ने खूब खरीदारी की।
सकट चतुर्थी के पर्व को लेकर सोमवार को बाजार में रौनक दिखाई दी। पूजन के लिए गंजी के साथ तिल, गुड़ और लाई समेत अन्य सामानों की खरीदारी की गई। महिलाओं ने अपने लिए कपड़े भी खरीदे। शहर के वीर विनय चौराहा, पहलवारा, चौक, सराय फाटक व भगवतीगंज आदि स्थानों पर तिल के लड्डू, काला व सफेद तिल, गुड़ व गंजी के साथ अन्य सामग्रियों की बिक्री तेज रही। पूजा गुप्ता, सरिता, मालती व ममता सिंह ने बताया कि सकट पर्व की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पूरा दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को पूजा-अर्चना की जाएगी।
पूजन के लिए घरों में वेदी बनाने का काम भी महिलाओं ने पूरा कर लिया है। चावल के आटे से बनने वाले पकवानों को लेकर रात तक तैयारियां की जाती रहीं। वहीं, बहनों के घर मायके से भाई चावल, तिल आदि सामान लेकर पहुंचे। पंडित सोनू गिरि ने बताया कि सकट पूजा के लिए रात 9:25 बजे चंद्रोदय का मुहूर्त है। चांद दिखते ही पूजा-अर्चना शुरू कर दी जाएगी।
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सकट चतुर्थी के पर्व को लेकर सोमवार को बाजार में रौनक दिखाई दी। पूजन के लिए गंजी के साथ तिल, गुड़ और लाई समेत अन्य सामानों की खरीदारी की गई। महिलाओं ने अपने लिए कपड़े भी खरीदे। शहर के वीर विनय चौराहा, पहलवारा, चौक, सराय फाटक व भगवतीगंज आदि स्थानों पर तिल के लड्डू, काला व सफेद तिल, गुड़ व गंजी के साथ अन्य सामग्रियों की बिक्री तेज रही। पूजा गुप्ता, सरिता, मालती व ममता सिंह ने बताया कि सकट पर्व की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पूरा दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को पूजा-अर्चना की जाएगी।
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पूजन के लिए घरों में वेदी बनाने का काम भी महिलाओं ने पूरा कर लिया है। चावल के आटे से बनने वाले पकवानों को लेकर रात तक तैयारियां की जाती रहीं। वहीं, बहनों के घर मायके से भाई चावल, तिल आदि सामान लेकर पहुंचे। पंडित सोनू गिरि ने बताया कि सकट पूजा के लिए रात 9:25 बजे चंद्रोदय का मुहूर्त है। चांद दिखते ही पूजा-अर्चना शुरू कर दी जाएगी।
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