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अभिव्यक्ति का माध्यम है भाषा : प्रो. माधवराज

Sat, 30 Nov 2024 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Sat, 30 Nov 2024 11:36 PM IST
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Language is the medium of expression: Prof. Madhavraj
बलरामपुर के एमएलके पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान छात्र को किया गया सम्मानित।
बलरामपुर। एमएलके पीजी कॉलेज के भाषा संकाय व ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शनिवार को हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित कई राज्यों के प्रोफेसरों के ऑफलाइन व ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किए गए। इसमें भाषा की मजबूती को लेकर संकल्प लिया गया।
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समापन समारोह का शुभारंभ कार्यक्रम अध्यक्ष प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय, मुख्य अतिथि प्रो. माधवराज द्विवेदी, आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर प्रो. तबस्सुम फरखी, समन्वयक प्रो. विमल प्रकाश वर्मा, डॉ. तारिक कबीर व आयोजन सचिव डॉ. भावना सिंह ने किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि सहित उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्राध्यापकों को सम्मानित भी किया गया। इसके पूर्व शुक्रवार की देर शाम सांस्कृतिक संध्या में एकल नृत्य, समूह नृत्य, कव्वाली व संस्कृत गीत के कार्यक्रम का प्रस्तुतिकरण हुआ।
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इससे पहले अतिथियों का स्वागत समन्वयक प्रो. विमल प्रकाश वर्मा व आयोजन सचिव डॉ. भावना सिंह ने किया। जबकि डॉ. तारिक कबीर ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। महाविद्यालय के एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर लेफ्टिनेंट डॉ देवेन्द्र कुमार चौहान ने दो दिवसीय संगोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर अंग्रेजी डॉ. श्रद्धा सिंह ने किया।
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आत्मविस्तार का विषय है भाषा
मुख्य अतिथि प्रो. माधवराज द्विवेदी ने कहा कि भारतीय भाषाओं का स्वरूप व विकास : संस्कृत, हिंदी व उर्दू के संदर्भ में विषय बहुत ही व्यापक है। भारतीय भाषाओं का क्रम विस्तृत है। भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है, भाषा सांकेतिक व प्रतीकात्मक भी होती है। भाषा आत्मविस्तार का विषय है।



संस्कृति व सभ्यता को भाषा से समझने में आसानी
प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि भाषा के माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों व सभ्यताओं को समझ सकते हैं। भाषा से मानव के प्राचीन व आधुनिक इतिहास को समझा जा सकता है। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकता व सद्भावना के लिए भाषा ही सबसे महत्वपूर्ण साधन है। मनुष्य को शिक्षित करने के लिए भाषा को ही माध्यम बनाया जाता है। दुनिया में करीब 6,500 भाषाएं बोली जाती हैं, हर भाषा कई मायनों में अनोखी होती है। समय के साथ-साथ भाषाएं विकसित होती रहती हैं।
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