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Balrampur News: मलेरिया से जंग में संसाधनों की कमी

Sat, 25 Apr 2026 01:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Sat, 25 Apr 2026 01:08 AM IST
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Lack of resources in the fight against malaria
बलरामपुर। मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग भले ही दम भर रहा हो, लेकिन कर्मचारियों की कमी से मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। मलेरिया विभाग सीमित संसाधन व कर्मचारियों के सहारे अभियान चलाकर कागजी कोरम पूरा कर रहा है।
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25 अप्रैल को विश्व भर में मलेरिया दिवस मनाया जाता है। इस दिन मलेरिया बीमारी से रोकथाम व बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। मच्छरजनित बीमारी मलेरिया का खतरा हर समय बना रहता है। इसकी रोकथाम के लिए अलग से मलेरिया विभाग बना हुआ है, लेकिन यह महकमा कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। जिला स्तर पर सहायक मलेरिया अधिकारी व जिला समन्वयक मलेरिया विभाग का पद रिक्त है। डीसी का पद खाली होने से तमाम तरह के डाटा एकत्र करने का काम प्रभावित हो रहा है।
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जिले के नौ विकासखंडों में हेल्थ इंस्पेक्टर का पद रिक्त है। इसी तरह नौ हेल्थ सुपरवाइजर होने चाहिए, सिर्फ तीन ही हैं। नौ बेसिक हेल्थ वर्कर के स्थान पर छह की ही तैनाती है। कर्मियों की कमी से पूरी जिम्मेदारी जिला मलेरिया अधिकारी राजेश कुमार पांडेय के जिम्मे ही है।
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वर्ष 2024 में मिला था एक मरीज
- विभागीय आंकड़ा के अनुसार वर्ष 2024 में मलेरिया से संक्रमित एक मरीज पाया गया था। तब से कोई व्यक्ति पॉजिटिव नहीं आया है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत 2250 आशा को मलेरिया बुखार की जांच के लिए 10-10 किट दिए गए हैं। किट के माध्यम से अब तक 32000 मलेरिया संभावित बुखार वाले मरीजों की जांच कराई गई, लेकिन एक भी पॉजिटिव नहीं पाया गया। जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मलेरिया जांच के लिए आरटीडी किट उपलब्ध है।

पैथाेलॉजी नहीं रखते रिपोर्ट का डाटा
- ग्राम पंचायतों में मच्छरजनित बीमारियों पर नियंत्रण के लिए मशीन से फागिंग कराई जाती है। 793 ग्राम पंचायतों के लिए विभाग के पास सिर्फ पांच फागिंग मशीन ही उपलब्ध है। चार मशीन जिला मुख्यालय पर रहती है, एक मशीन तुलसीपुर में है। ऐसे में बाकी आठ ब्लॉकों में फागिंग के नाम पर महज कोरम ही पूरा किया जाता है।

निजी पैथाेलॉजी सेंटरों से मलेरिया पॉजिटिव आने वाले मरीजों का डाटा विभाग के पास नहीं रहता है। जिला मलेरिया अधिकारी राजेश पांडेय ने बताया कि यदि किसी निजी पैथाेलॉजी में कोई व्यक्ति मलेरिया पाॅजिटिव आता है तो संबंधित पैथाेलॉजी संचालक को मरीज का विवरण यूडीएसटी पोर्टल पर अपलोड करना होता है। मरीज का विवरण ऑनलाइन अपलोड न होने पर हम लोगों को कुछ जानकारी नहीं मिल पाती है।


उच्चाधिकारियों को लिखा गया है पत्र
- मलेरिया विभाग में कर्मचारियों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। वैसे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की मदद से सभी कार्य कराए जाते हैं।
- डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी, सीएमओ बलरामपुर
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