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शुत्र संपत्ति की मलाई काट रहे अवैध कब्जेदार
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फोटो-4-बलरामपुर के इटईरामपुर पश्चिमी गांव में स्थित शत्रु संपत्ति की जमीन।-संवाद
- फोटो : BALRAMPUR
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उतरौला (बलरामपुर)। स्थानीय तहसील में कई हेक्टेअर शत्रु संपत्ति पर कब्जा कर अवैध कब्जेदार मलाई काट रहे हैं। इन संपत्तियों को लेकर जिला प्रशासन बेखबर है। कागजों में जांच व संपत्ति को खाली कराने का कोरम पूरा किया जा रहा है। शत्रु संपत्तियों पर अवैध कब्जों से प्रतिवर्ष लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
बता दें कि उतरौला तहसील क्षेत्र के हुसैनाबाद ग्रिंट, इटईरामपुर पूर्वी, इटईरामपुर पश्चिमी, बरायल सहित कई गांवों व उतरौला नगर में शत्रु संपत्ति मौजूद है। यह वह भूमि है जिसे देश के बंटवारे के समय लोग छोड़कर पाकिस्तान में जाकर बस गए हैं। इन संपत्तियों पर उनके पाटीदारों व अन्य लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। कई लोगों ने शत्रु संपत्ति की खाली जमीनों पर आलीशान मकान बना लिया है। सूत्रों की माने तो इस तहसील क्षेत्र में 6.14 हेक्टेअर शत्रु संपत्ति कृषि योग्य भूमि हैं। 0.654 हेक्टेअर शुत्र संपत्ति की जमीन पर लोगों ने मकान बना रखा है। इस तहसील में मात्र 0.380 हेक्टेअर शत्रु संपत्ति खाली कराई गई है। बाकी शत्रु संपत्तियों से अवैध कब्जा कब और कैसे हटाया जाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
इन संपत्तियों पर अवैध कब्जेदार व सह खातेदार राजस्व विभाग ने चिह्नित किया है। चिन्हाकंन के बाद अवैध कब्जेदारों व सहखातेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है यह चर्चा का विषय बना है। प्रदेश के कई जिलों में प्रशासन ने शत्रु संपत्तियों को लीज पर दिया है। माना जा रहा है कि यदि यहां भी शत्रु संपत्ति को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर लीज पर दिया जाए तो हर वर्ष लाखों का सरकारी राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसी तरह तुलसीपुर तहसील क्षेत्र के भी कई गांवों में शत्रु संपत्ति मौजूद है। शत्रु संपत्तियों को खाली कराने में प्रशासन महज कागजी घोड़ा दौड़ा रहा है। इन बेशकीमती जमीनों पर कब्जा कर लोग पूरी तरह से बेखौफ नजर आ रहे हैं।
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शीघ्र होगी कार्रवाई
जिले में मौजूद शत्रु संपत्तियों पर किए गए अवैध कब्जे को शीघ्र ही अभियान चलाकर खाली कराया जाएगा। इसके साथ ही इसकी रिपोर्ट प्रदेश व केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। राम अभिलाष, एडीएम बलरामपुर
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बता दें कि उतरौला तहसील क्षेत्र के हुसैनाबाद ग्रिंट, इटईरामपुर पूर्वी, इटईरामपुर पश्चिमी, बरायल सहित कई गांवों व उतरौला नगर में शत्रु संपत्ति मौजूद है। यह वह भूमि है जिसे देश के बंटवारे के समय लोग छोड़कर पाकिस्तान में जाकर बस गए हैं। इन संपत्तियों पर उनके पाटीदारों व अन्य लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। कई लोगों ने शत्रु संपत्ति की खाली जमीनों पर आलीशान मकान बना लिया है। सूत्रों की माने तो इस तहसील क्षेत्र में 6.14 हेक्टेअर शत्रु संपत्ति कृषि योग्य भूमि हैं। 0.654 हेक्टेअर शुत्र संपत्ति की जमीन पर लोगों ने मकान बना रखा है। इस तहसील में मात्र 0.380 हेक्टेअर शत्रु संपत्ति खाली कराई गई है। बाकी शत्रु संपत्तियों से अवैध कब्जा कब और कैसे हटाया जाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
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इन संपत्तियों पर अवैध कब्जेदार व सह खातेदार राजस्व विभाग ने चिह्नित किया है। चिन्हाकंन के बाद अवैध कब्जेदारों व सहखातेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है यह चर्चा का विषय बना है। प्रदेश के कई जिलों में प्रशासन ने शत्रु संपत्तियों को लीज पर दिया है। माना जा रहा है कि यदि यहां भी शत्रु संपत्ति को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर लीज पर दिया जाए तो हर वर्ष लाखों का सरकारी राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसी तरह तुलसीपुर तहसील क्षेत्र के भी कई गांवों में शत्रु संपत्ति मौजूद है। शत्रु संपत्तियों को खाली कराने में प्रशासन महज कागजी घोड़ा दौड़ा रहा है। इन बेशकीमती जमीनों पर कब्जा कर लोग पूरी तरह से बेखौफ नजर आ रहे हैं।
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शीघ्र होगी कार्रवाई
जिले में मौजूद शत्रु संपत्तियों पर किए गए अवैध कब्जे को शीघ्र ही अभियान चलाकर खाली कराया जाएगा। इसके साथ ही इसकी रिपोर्ट प्रदेश व केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। राम अभिलाष, एडीएम बलरामपुर