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पेड़ों की कटान रोकने में वन विभाग नाकाम
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बलरामपुर के सोहेलवा वन्य जी प्रभाग में काटा गया पेड़
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। जंगल के पेड़ों की कटान रोकने में वन विभाग नाकाम है। सड़क किनारे लगे पेड़ों को लकड़कट्टे धड़ल्ले से काट कर उठा ले जा रहे हैं। पेड़ कटने से जहां जंगल का दायरा सिमटता जा रहा है वहीं पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। पेड़ों की अवैध कटान रोकने में विभागीय अधिकारी पूरी तरह असफल है। वन्य जीव प्रेमियों ने पेड़ों की कटान रोकने के लिए जिलाधिकारी से गुहार लगाई है।
बलरामपुर तराई क्षेत्र में स्थित सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग बहुत ही समृद्ध माना गया है। सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग में काला शीशम, शाखू, सागौन, धूप व खैर के पेड़ बहुतायत मात्रा में पाए जाते हैं। यहां का काला शीशम, शाखू व सागौन की लकड़ी को काफी अच्छा माना जाता है। बेशकीमती होने के कारण इन लकड़ियों पर वन माफिया की नजर हमेशा बनी रहती है। सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग के सभी रेंज में रात होते ही लकड़कट्टे सक्रिय हो जाते हैं। सोहेलवा जंगल में शिकार व लकड़ी काटने के लिए नेपाली वन माफिया भी सक्रिय रहते हैं। सीमावर्ती गांवों के लोग रात के समय पेड़ काटकर साइकिल के सहारे लकड़ी गांव में पहुंचा देते हैं। अधिक मात्रा में लकड़ी इकट्ठा होने के बाद वन माफिया पिकअप आदि में लकड़ी लादकर आरा मशीनों पर भेज देते हैं। जंगल के समीपवर्ती गांव में आए दिन लकड़ियां बरामद होती रहती हैं। विभाग के लोग मामूली जुर्माना करके लकड़कट्टों को छोड़ देते हैं।
जंगल को सबसे अधिक नुकसान समीपवर्ती गांव के लोग ही पहुंचाते हैं। उनके जरिए ही वन माफिया के लोग पेड़ काटने और उसे मुंह मांगे दाम पर बेच रहे हैं। स्थानीय लोगों को थोड़ा बहुत पैसा देकर वन माफिया मोटी कमाई करते हैं। विभाग के लोग पेड़ों की अवैध कटान रोकने के लिए महज कागजी अभियान चलाते हैं। विभागीय अधिकारियों व कर्मियों की लापरवाही के कारण वन माफिया पेड़ काटकर जंगल काफी नुकसान पहुंचा रहे है। पेड़ कटने के कारण जंगल का दायरा सिमटता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह पेड़ कटते रहे तो एक दिन जंगल का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। क्षेत्रवासी ननकू, हरीराम, कुद्दूस, इबराहिम, कल्लू, मेवालाल, धर्म प्रकाश, असलम, आरिफ, चिनगुद व कलीम आदि ने जंगल में पेड़ों की कटान पर अंकुश लगाए जाने की मांग जिलाधिकारी से की है।
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जंगल में पेड़ों की कटान पर हरहाल में लगाया जाएगा अंकुश
सोहेलवा वन्य जीव क्षेत्र में पेड़ों की कटान रोकने के लिए सभी रेंजर को निर्देश दिया गया है। पेड़ों की कटान रोकने में किसी भी तरह की लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लकड़ी काटने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। -रजनीकांत मित्तल, डीएफओ
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बलरामपुर तराई क्षेत्र में स्थित सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग बहुत ही समृद्ध माना गया है। सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग में काला शीशम, शाखू, सागौन, धूप व खैर के पेड़ बहुतायत मात्रा में पाए जाते हैं। यहां का काला शीशम, शाखू व सागौन की लकड़ी को काफी अच्छा माना जाता है। बेशकीमती होने के कारण इन लकड़ियों पर वन माफिया की नजर हमेशा बनी रहती है। सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग के सभी रेंज में रात होते ही लकड़कट्टे सक्रिय हो जाते हैं। सोहेलवा जंगल में शिकार व लकड़ी काटने के लिए नेपाली वन माफिया भी सक्रिय रहते हैं। सीमावर्ती गांवों के लोग रात के समय पेड़ काटकर साइकिल के सहारे लकड़ी गांव में पहुंचा देते हैं। अधिक मात्रा में लकड़ी इकट्ठा होने के बाद वन माफिया पिकअप आदि में लकड़ी लादकर आरा मशीनों पर भेज देते हैं। जंगल के समीपवर्ती गांव में आए दिन लकड़ियां बरामद होती रहती हैं। विभाग के लोग मामूली जुर्माना करके लकड़कट्टों को छोड़ देते हैं।
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जंगल को सबसे अधिक नुकसान समीपवर्ती गांव के लोग ही पहुंचाते हैं। उनके जरिए ही वन माफिया के लोग पेड़ काटने और उसे मुंह मांगे दाम पर बेच रहे हैं। स्थानीय लोगों को थोड़ा बहुत पैसा देकर वन माफिया मोटी कमाई करते हैं। विभाग के लोग पेड़ों की अवैध कटान रोकने के लिए महज कागजी अभियान चलाते हैं। विभागीय अधिकारियों व कर्मियों की लापरवाही के कारण वन माफिया पेड़ काटकर जंगल काफी नुकसान पहुंचा रहे है। पेड़ कटने के कारण जंगल का दायरा सिमटता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह पेड़ कटते रहे तो एक दिन जंगल का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। क्षेत्रवासी ननकू, हरीराम, कुद्दूस, इबराहिम, कल्लू, मेवालाल, धर्म प्रकाश, असलम, आरिफ, चिनगुद व कलीम आदि ने जंगल में पेड़ों की कटान पर अंकुश लगाए जाने की मांग जिलाधिकारी से की है।
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जंगल में पेड़ों की कटान पर हरहाल में लगाया जाएगा अंकुश
सोहेलवा वन्य जीव क्षेत्र में पेड़ों की कटान रोकने के लिए सभी रेंजर को निर्देश दिया गया है। पेड़ों की कटान रोकने में किसी भी तरह की लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लकड़ी काटने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। -रजनीकांत मित्तल, डीएफओ