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Balrampur News: बैंक घोटाले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक सहित दस के खिलाफ एफआईआर
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बलरामपुर। नगर के नहरबालागंज पंजाब नेशनल बैंक शाखा में ऋण योजनाओं के घोटाले में चार और एफआईआर दर्ज हुई हैं। शाखा प्रबंधक समेत दस आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया है। यह मामला पिछले एक साल से जांच के दायरे में था। अब मंडल कार्यालय अयोध्या व लखनऊ की टीम की जांच में नया खुलासा हुआ है।
वरिष्ठ शाखा प्रबंधक रत्नेश कुमार की तहरीर पर तीन और चार दिसंबर को कोतवाली नगर में चार नए मुकदमे दर्ज किए गए। तहरीर में बताया गया कि जनवरी से जून 2024 के बीच ‘विशेष योजना’ के तहत अचानक असामान्य रूप से तेज लेनदेन दर्ज हुआ। जांच में पाया गया कि कई ऋण खाते बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, बिना आवश्यक दस्तावेज के खोले गए और फर्जी एलआईपी (लोन इन प्रोसेस अकांउट), केवीपी (किसा विकास पात्र), एनएससी (नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट) का उपयोग करके खातों से धन निकाला गया।
इन चार मामलों में अलग-अलग खातों में 15 लाख, 20 लाख, 19.88 लाख और 20 लाख रुपये ओवरड्राफ्ट के रूप में जारी किए गए थे। जांच में पता चला कि राशि का बड़ा हिस्सा नकद निकाल लिया गया और शेष धन मेसर्स पीएसपी कंस्ट्रक्शंस एवं सहयोगी फर्मों और परिवारजनों के खातों में स्थानांतरित किया गया।
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इन बैंक अधिकारियों व आरोपियों के नाम शामिल
मुकदमे में शामिल आरोपियों में बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक महेश त्रिपाठी, बैंक अधिकारी विनय कुमार शर्मा, बैंक अधिकारी संतोष गुप्ता, यशवंत कुमार, मेसर्स पीएसपी कंस्ट्रक्शंस के साझेदार पूनम सिंह, वैभव सिंह, समरजीत सिंह, और अन्य ग्राहक जुहैब अहमद, मोहम्मद राशिद, अमिता सिंह शामिल हैं। बैंक प्रबंधक ने बताया कि कुछ मामलों में राशि बाद में वसूल की गई, लेकिन धोखाधड़ी, जालसाजी, खातों में हेराफेरी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार पहले ही घटित हो चुके थे। कोतवाली नगर पुलिस ने शाखा प्रबंधक रत्नेश कुमार की तहरीर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच में आरोपियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन का पूरा ब्योरा सामने लाया जाएगा।
पहले भी उजागर हो चुका है घोटाला
पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की नहरबालागंज शाखा में अगस्त माह में करोड़ों के लोन घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ था। पुलिस ने इस मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक और एक निजी फर्म के संचालक को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित कागजातों के जरिये दर्जनों लोन खाते खोलकर बैंक से करीब 12 करोड़ रुपये का गबन किया। इस घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब पीएनबी अयोध्या सर्किल कार्यालय के मुख्य शाखा प्रबंधक ने नहरबालागंज शाखा की जांच की।
जांच के दौरान लोन खातों में अनियमितता सामने आई। इसके बाद 15 अगस्त को पीएनबी के चीफ मैनेजर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस की जांच में सामने आया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक महेश त्रिपाठी ने अपने सहयोगी समरजीत सिंह (पीएसपी कंस्ट्रक्शंस, गोंडा निवासी) के साथ मिलकर करीब 46 लोन खातों से 8.09 करोड़ रुपये और 40 मुद्रा लोन खातों से 3.93 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। गबन की गई रकम को ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और नकदी के जरिये समरजीत सिंह की कंपनी के खाते में ट्रांसफर की गई। इस मामले में बैंक प्रबंधक और ठेकेदार समरजीत को पुलिस ने गिरफ्तार कर चुकी है।
बैंक प्रबंधक व सहयोगियों पर दर्ज हो चुकी हैं दो और एफआईआर
बलरामपुर। कोतवाली नगर में बीते छह नवंबर को भी एक एफआईआर दर्ज हुई है। इसमें नगर के जुहैब अहमद ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद सात नवंबर को रघुनाथ सिंह निवासी न्यू आटा हाउस कॉलोनी, जेल रोड, गोंडा ने भी फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसमें बैंक प्रबंधक महेश त्रिपाठी के अन्य लोग आरोपी हैं। दोनों मामलों में गलत तरीके से ऋण स्वीकृत कर रुपये गबन करने का आरोप लगा था। इसकी जांच पुलिस कर रही है। इस तरह अब तक सात एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जिसमें पांच बैंक की तरफ से दर्ज हैं और दो प्रभावित लोगों ने दर्ज कराई है।
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वरिष्ठ शाखा प्रबंधक रत्नेश कुमार की तहरीर पर तीन और चार दिसंबर को कोतवाली नगर में चार नए मुकदमे दर्ज किए गए। तहरीर में बताया गया कि जनवरी से जून 2024 के बीच ‘विशेष योजना’ के तहत अचानक असामान्य रूप से तेज लेनदेन दर्ज हुआ। जांच में पाया गया कि कई ऋण खाते बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, बिना आवश्यक दस्तावेज के खोले गए और फर्जी एलआईपी (लोन इन प्रोसेस अकांउट), केवीपी (किसा विकास पात्र), एनएससी (नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट) का उपयोग करके खातों से धन निकाला गया।
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इन चार मामलों में अलग-अलग खातों में 15 लाख, 20 लाख, 19.88 लाख और 20 लाख रुपये ओवरड्राफ्ट के रूप में जारी किए गए थे। जांच में पता चला कि राशि का बड़ा हिस्सा नकद निकाल लिया गया और शेष धन मेसर्स पीएसपी कंस्ट्रक्शंस एवं सहयोगी फर्मों और परिवारजनों के खातों में स्थानांतरित किया गया।
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इन बैंक अधिकारियों व आरोपियों के नाम शामिल
मुकदमे में शामिल आरोपियों में बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक महेश त्रिपाठी, बैंक अधिकारी विनय कुमार शर्मा, बैंक अधिकारी संतोष गुप्ता, यशवंत कुमार, मेसर्स पीएसपी कंस्ट्रक्शंस के साझेदार पूनम सिंह, वैभव सिंह, समरजीत सिंह, और अन्य ग्राहक जुहैब अहमद, मोहम्मद राशिद, अमिता सिंह शामिल हैं। बैंक प्रबंधक ने बताया कि कुछ मामलों में राशि बाद में वसूल की गई, लेकिन धोखाधड़ी, जालसाजी, खातों में हेराफेरी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार पहले ही घटित हो चुके थे। कोतवाली नगर पुलिस ने शाखा प्रबंधक रत्नेश कुमार की तहरीर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच में आरोपियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन का पूरा ब्योरा सामने लाया जाएगा।
पहले भी उजागर हो चुका है घोटाला
पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की नहरबालागंज शाखा में अगस्त माह में करोड़ों के लोन घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ था। पुलिस ने इस मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक और एक निजी फर्म के संचालक को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित कागजातों के जरिये दर्जनों लोन खाते खोलकर बैंक से करीब 12 करोड़ रुपये का गबन किया। इस घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब पीएनबी अयोध्या सर्किल कार्यालय के मुख्य शाखा प्रबंधक ने नहरबालागंज शाखा की जांच की।
जांच के दौरान लोन खातों में अनियमितता सामने आई। इसके बाद 15 अगस्त को पीएनबी के चीफ मैनेजर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस की जांच में सामने आया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक महेश त्रिपाठी ने अपने सहयोगी समरजीत सिंह (पीएसपी कंस्ट्रक्शंस, गोंडा निवासी) के साथ मिलकर करीब 46 लोन खातों से 8.09 करोड़ रुपये और 40 मुद्रा लोन खातों से 3.93 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। गबन की गई रकम को ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और नकदी के जरिये समरजीत सिंह की कंपनी के खाते में ट्रांसफर की गई। इस मामले में बैंक प्रबंधक और ठेकेदार समरजीत को पुलिस ने गिरफ्तार कर चुकी है।
बैंक प्रबंधक व सहयोगियों पर दर्ज हो चुकी हैं दो और एफआईआर
बलरामपुर। कोतवाली नगर में बीते छह नवंबर को भी एक एफआईआर दर्ज हुई है। इसमें नगर के जुहैब अहमद ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद सात नवंबर को रघुनाथ सिंह निवासी न्यू आटा हाउस कॉलोनी, जेल रोड, गोंडा ने भी फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसमें बैंक प्रबंधक महेश त्रिपाठी के अन्य लोग आरोपी हैं। दोनों मामलों में गलत तरीके से ऋण स्वीकृत कर रुपये गबन करने का आरोप लगा था। इसकी जांच पुलिस कर रही है। इस तरह अब तक सात एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जिसमें पांच बैंक की तरफ से दर्ज हैं और दो प्रभावित लोगों ने दर्ज कराई है।