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Balrampur News: सिद्धार्थनगर के युवकों को भी जारी किए फर्जी नियुक्ति पत्र
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बलरामपुर। महिला कल्याण विभाग में फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर ठगी करने के मामले में जांच आगे बढ़ते ही नए खुलासे सामने आने लगे हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार आरोपी लिपिक अमित कुमार गुप्ता ने बलरामपुर के साथ ही सिद्धार्थनगर के दो युवकों को भी फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किया था। ऐसे में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश में है कि अमित ने और कितने युवकों को ऐसे ही ठगा है। इस काम में विभागीय मिलीभगत पर भी नजर है।
जांच के अनुसार आरोपी अमित ने सिद्धार्थनगर के इटवा निवासी संतोष कुमार गुप्त के साथ ही शिवम नाम के युवक को भी फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किया था। इसके अलावा उसने पचपेड़वा के आकाश कुमार गुप्त के साथ भी ठगी की है। आरोप है कि महिला कल्याण विभाग की ओर से नियुक्ति का झांसा देकर उसने अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अमित ने फर्जी नियुक्ति पत्रों पर पूर्व जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र के हस्ताक्षर और गलत पत्रांक का इस्तेमाल किया था। महिला कल्याण विभाग ने भी मामले की विस्तृत रिपोर्ट पुलिस को भेजी है, जिसमें बताया गया है कि आरोपी ने नौकरी के नाम पर ठगी की रकम अपने व्यक्तिगत बैंक खाते में जमा कराई थी। पुलिस अब उन बैंक खातों की पड़ताल में जुटी है। मामले में प्रभारी निरीक्षक गिरजेश तिवारी का कहना है कि आरोपी के विरुद्ध साक्ष्य मजबूत हैं। जल्द ही उसकी गिरफ्तारी की जाएगी।
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दो बार भेजी गई कार्रवाई की संस्तुति, फिर भी विभाग मौन
सूत्रों के अनुसार, जिले से दो बार लिपिक अमित कुमार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति निदेशालय को भेजी गई है। जनवरी माह से उसका वेतन भी रोका गया है। इसके बावजूद अब तक न तो उसका निलंबन हुआ और न ही स्थानांतरण। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुशील कुमार सिंह का कहना है कि विभागीय कार्रवाई केवल निदेशालय स्तर से ही की जा सकती है। इसके लिए वह फरवरी से ही रिपोर्ट भेज रहे हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी रिपोर्ट भेजी है। इस बार कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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आउटसोर्सिंग नियुक्तियों की आड़ में शुरू किया खेल
महिला कल्याण विभाग के बड़े बाबू अमित कुमार गुप्त ने फर्जीवाड़ा करने के लिए टीम बना रखी थी। पचपेड़वा के आकाश बताते हैं कि विभाग में आउटसोर्सिंग माध्यम से भर्ती होने से विभाग में संपर्क किया था। बाबू ने पूरी गारंटी ली कि बात हो गई है। रुपये दो और नियुक्ति पत्र लो। रुपये लेते ही अमित ने नियुक्ति पत्र थमा दिया। विभाग में कार्यभार ग्रहण कर काम भी बांट दिया। बातचीत में वह खुद को विभाग का अधिकारी बता रहा था। इसके साथ ही विभाग में किसी ने बताया भी नहीं कि नियुक्ति फर्जी है। वेतन मांगने पर पोल खुली।
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जांच के अनुसार आरोपी अमित ने सिद्धार्थनगर के इटवा निवासी संतोष कुमार गुप्त के साथ ही शिवम नाम के युवक को भी फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किया था। इसके अलावा उसने पचपेड़वा के आकाश कुमार गुप्त के साथ भी ठगी की है। आरोप है कि महिला कल्याण विभाग की ओर से नियुक्ति का झांसा देकर उसने अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली।
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पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अमित ने फर्जी नियुक्ति पत्रों पर पूर्व जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र के हस्ताक्षर और गलत पत्रांक का इस्तेमाल किया था। महिला कल्याण विभाग ने भी मामले की विस्तृत रिपोर्ट पुलिस को भेजी है, जिसमें बताया गया है कि आरोपी ने नौकरी के नाम पर ठगी की रकम अपने व्यक्तिगत बैंक खाते में जमा कराई थी। पुलिस अब उन बैंक खातों की पड़ताल में जुटी है। मामले में प्रभारी निरीक्षक गिरजेश तिवारी का कहना है कि आरोपी के विरुद्ध साक्ष्य मजबूत हैं। जल्द ही उसकी गिरफ्तारी की जाएगी।
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दो बार भेजी गई कार्रवाई की संस्तुति, फिर भी विभाग मौन
सूत्रों के अनुसार, जिले से दो बार लिपिक अमित कुमार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति निदेशालय को भेजी गई है। जनवरी माह से उसका वेतन भी रोका गया है। इसके बावजूद अब तक न तो उसका निलंबन हुआ और न ही स्थानांतरण। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुशील कुमार सिंह का कहना है कि विभागीय कार्रवाई केवल निदेशालय स्तर से ही की जा सकती है। इसके लिए वह फरवरी से ही रिपोर्ट भेज रहे हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी रिपोर्ट भेजी है। इस बार कार्रवाई तय मानी जा रही है।
आउटसोर्सिंग नियुक्तियों की आड़ में शुरू किया खेल
महिला कल्याण विभाग के बड़े बाबू अमित कुमार गुप्त ने फर्जीवाड़ा करने के लिए टीम बना रखी थी। पचपेड़वा के आकाश बताते हैं कि विभाग में आउटसोर्सिंग माध्यम से भर्ती होने से विभाग में संपर्क किया था। बाबू ने पूरी गारंटी ली कि बात हो गई है। रुपये दो और नियुक्ति पत्र लो। रुपये लेते ही अमित ने नियुक्ति पत्र थमा दिया। विभाग में कार्यभार ग्रहण कर काम भी बांट दिया। बातचीत में वह खुद को विभाग का अधिकारी बता रहा था। इसके साथ ही विभाग में किसी ने बताया भी नहीं कि नियुक्ति फर्जी है। वेतन मांगने पर पोल खुली।