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Balrampur News: खुलेंगे आठ नए आयुर्वेदिक अस्पताल, दो बनकर तैयार
Sat, 18 Nov 2023 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 18 Nov 2023 11:36 PM IST
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बलरामपुर। आयुर्वेद के माध्यम से लोगों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए जिले को जल्द ही आयुर्वेद पैथी के आठ नए अस्पतालों का तोहफा मिलेगा। इसमें से दो अस्पतालों का निर्माण कार्य तो लगभग पूरा हो चुका है। आधुनिक सुविधाओं से लैस इन अस्पतालों के क्रियाशील हो जाने से आयुर्वेद पैथी से कई जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा मरीजों को मिलने लगेगी।
जिले के फरेंदा, हरिहरगंज, बनकटवा, रमईडीह, तुलसीपुर, संझवल, प्रेमनगर व मोतीपुर में आयुर्वेद अस्पताल बनना प्रस्तावित है। इनमें से रमईडीह व तुलसीपुर में अस्पताल निर्माण का कार्य पूरा हो जाने के बाद अब इनका संचालन भी शुरु किया जा रहा है। बाकी बचे छह अस्पतालों में भी निर्माण कार्य कार्य प्रगति पर है। जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. दिग्विजय नाथ ने बताया कि जिले में आधुनिक आयुर्वेदिक अस्पताल बन जाने के बाद सामान्य के साथ पंच कर्म, षटकर्म, शल्य, शालाक्य चिकित्सा, योग थैरेपी व यूनानी के साथ विभिन्न प्रकार की वैकल्पिक चिकित्सा शुरू होगी। बताया कि इन अस्पतालों के निर्माण के लिए शासन स्तर से बजट का आवंटन पहले ही हो चुका है।
बताया कि आधुनिक संसाधनों से युक्त इन अस्पतालों में बच्चों व महिलाओं के लिए कौमार भृत्य, विषैले जानवरों का विष दूर करने की विशेष इलाज सुविधा के साथ ही मिट्टी, यूनानी व योग प्राकृतिक समेत अन्य पद्धतियों से इलाज की सुविधा मरीजों को मिल सकेगी।
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जिले के फरेंदा, हरिहरगंज, बनकटवा, रमईडीह, तुलसीपुर, संझवल, प्रेमनगर व मोतीपुर में आयुर्वेद अस्पताल बनना प्रस्तावित है। इनमें से रमईडीह व तुलसीपुर में अस्पताल निर्माण का कार्य पूरा हो जाने के बाद अब इनका संचालन भी शुरु किया जा रहा है। बाकी बचे छह अस्पतालों में भी निर्माण कार्य कार्य प्रगति पर है। जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. दिग्विजय नाथ ने बताया कि जिले में आधुनिक आयुर्वेदिक अस्पताल बन जाने के बाद सामान्य के साथ पंच कर्म, षटकर्म, शल्य, शालाक्य चिकित्सा, योग थैरेपी व यूनानी के साथ विभिन्न प्रकार की वैकल्पिक चिकित्सा शुरू होगी। बताया कि इन अस्पतालों के निर्माण के लिए शासन स्तर से बजट का आवंटन पहले ही हो चुका है।
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बताया कि आधुनिक संसाधनों से युक्त इन अस्पतालों में बच्चों व महिलाओं के लिए कौमार भृत्य, विषैले जानवरों का विष दूर करने की विशेष इलाज सुविधा के साथ ही मिट्टी, यूनानी व योग प्राकृतिक समेत अन्य पद्धतियों से इलाज की सुविधा मरीजों को मिल सकेगी।
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