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देवी कात्यायनी की पूजा के लिए मंदिरों में जुटी भीड़
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फोटो-3-बलरामपुर के शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्घालु।-संवाद
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। चैत्र नवरात्र के छठे दिन देवी कात्यायनी की आराधना के लिए मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटी। गुरुवार को देवी मंदिरों में सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं ने माता रानी की पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा। शक्ति पीठ देवीपाटन मंदिर में मां पाटेश्वरी के दर्शन के लिए तमाम स्थानों से श्रद्धालुओं के पैदल जत्थे भी पहुंचे।
नवरात्र के छठे दिन मां भगवती की छठी शक्ति देवी कात्यायनी की पूजा का विधान है। मान्यता है कि महर्षि कात्यायन ने मां भगवती को पुत्री रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर अजन्मा होते हुए भी देवी ने महर्षि कात्यायन के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। महर्षि कात्यायन की पुत्री होने के कारण ही उन्हें कात्यायनी देवी के नाम से पूजा जाता है। ये भी मान्यता है कि माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करने से जहां अज्ञानता, असंतोष, तमस एवं जड़ता जैसे दुर्गुण समाप्त होते हैं, वहीं इनकी आराधना करने पर कर्म व ज्ञान रूपी प्रकाश से व्यक्ति का जीवन खुशहाल होता है।
त्याग, तपस्या व सद्कर्म की प्रेरणा देने वाली देवी कात्यायनी की पूजा के लिए गुरुवार को शक्ति पीठ देवीपाटन मंदिर में सुबह चार बजे से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मां पाटेश्वरी का दर्शन करने के लिए बलरामपुर, श्रावस्ती, गैसड़ी, पचपेड़वा, सिद्धार्थनगर एवं नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों से पदयात्रियों का जत्था भी मंदिर पहुंचा। इसके अतिरिक्त जरवा के रहिया देवी, तुलसीपुर के नई माता मंदिर, पेहर बाजार के मां दुर्गा मंदिर, बिजलीपुर के बिजलेश्वरी देवी मंदिर, उतरौला के ज्वाला देवी मंदिर, बलरामपुर नगर के झारखंडी मंदिर, समय माता मंदिर व कालीथान पर भी पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
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नवरात्र के छठे दिन मां भगवती की छठी शक्ति देवी कात्यायनी की पूजा का विधान है। मान्यता है कि महर्षि कात्यायन ने मां भगवती को पुत्री रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर अजन्मा होते हुए भी देवी ने महर्षि कात्यायन के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। महर्षि कात्यायन की पुत्री होने के कारण ही उन्हें कात्यायनी देवी के नाम से पूजा जाता है। ये भी मान्यता है कि माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करने से जहां अज्ञानता, असंतोष, तमस एवं जड़ता जैसे दुर्गुण समाप्त होते हैं, वहीं इनकी आराधना करने पर कर्म व ज्ञान रूपी प्रकाश से व्यक्ति का जीवन खुशहाल होता है।
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त्याग, तपस्या व सद्कर्म की प्रेरणा देने वाली देवी कात्यायनी की पूजा के लिए गुरुवार को शक्ति पीठ देवीपाटन मंदिर में सुबह चार बजे से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मां पाटेश्वरी का दर्शन करने के लिए बलरामपुर, श्रावस्ती, गैसड़ी, पचपेड़वा, सिद्धार्थनगर एवं नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों से पदयात्रियों का जत्था भी मंदिर पहुंचा। इसके अतिरिक्त जरवा के रहिया देवी, तुलसीपुर के नई माता मंदिर, पेहर बाजार के मां दुर्गा मंदिर, बिजलीपुर के बिजलेश्वरी देवी मंदिर, उतरौला के ज्वाला देवी मंदिर, बलरामपुर नगर के झारखंडी मंदिर, समय माता मंदिर व कालीथान पर भी पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
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