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Balrampur News: ओपीडी के समय में डॉक्टर कर रहे सर्जरी, इलाज मुश्किल
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बलरामपुर के जिला मेमोरियल अस्पताल में चिकित्सक के इंतजार में बैठे मरीज। संवाद
बलरामपुर। जिला मेमोरियल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बेपटरी हैं। बिजली संकट और डीजल की कमी से अस्पताल में दोपहर दो बजे के बाद ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर ओपीडी के समय में सर्जरी करते हैं। ऐसे में अक्सर मरीज ओपीडी से बिना इलाज ही लौट जाते हैं।
अस्पताल प्रशासन ने डीजल की बचत करने के लिए डॉक्टरों को ओपीडी समय में ही ऑपरेशन करने का निर्देश दे दिया है। इससे सुबह आठ से दोपहर दो बजे के बीच ओपीडी में मरीजों की लाइन लगी रहती है, मगर कई बार डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में होने से उन्हें देखने वाला कोई नहीं रहता। जिला अस्पताल में दो ऑर्थो सर्जन और दो सामान्य सर्जन तैनात हैं। नियम के मुताबिक इन्हें सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी में मरीज देखना होता है। लेकिन ऑपरेशन के निर्देश भी इन्हीं घंटों में दिए गए हैं। ऐसे में जिस दिन किसी मरीज की सर्जरी तय होती है, उस दिन संबंधित डॉक्टर ओपीडी छोड़कर ओटी में चले जाते हैं। नतीजतन मरीज लाइन में लगे रहते हैं और इलाज के लिए परेशान होकर लौट जाते हैं।
डीजल के लिए मिलता है 35 हजार रुपये का बजट
अस्पताल प्रशासन को हर महीने डीजल के लिए 35 हजार रुपये का बजट रोगी कल्याण समिति से मिलता है। लेकिन बताया जा रहा है कि जेनरेटर से पूरे अस्पताल परिसर को बिजली दी जाती है। जिसमें ओपीडी, इमरजेंसी, सर्जिकल वार्ड, मेडिकल वार्ड, पैथोलॉजी और कार्यालय में बिजली आपूर्ति करनी होती है। ऐसे में डीजल का खर्च बजट से कहीं ज्यादा हो जाता है। यही वजह है कि सर्जरी केवल दिन में ही निपटाने की व्यवस्था कर दी गई है।
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अस्पताल को हर महीने डीजल के लिए 35 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। मजबूरी में हमें ओपीडी समय में ही ऑपरेशन कराने की व्यवस्था करनी पड़ती है। इमरजेंसी मरीजों की सर्जरी किसी भी समय की जाती है।
डॉ. शारदा रंजन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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अस्पताल प्रशासन ने डीजल की बचत करने के लिए डॉक्टरों को ओपीडी समय में ही ऑपरेशन करने का निर्देश दे दिया है। इससे सुबह आठ से दोपहर दो बजे के बीच ओपीडी में मरीजों की लाइन लगी रहती है, मगर कई बार डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में होने से उन्हें देखने वाला कोई नहीं रहता। जिला अस्पताल में दो ऑर्थो सर्जन और दो सामान्य सर्जन तैनात हैं। नियम के मुताबिक इन्हें सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी में मरीज देखना होता है। लेकिन ऑपरेशन के निर्देश भी इन्हीं घंटों में दिए गए हैं। ऐसे में जिस दिन किसी मरीज की सर्जरी तय होती है, उस दिन संबंधित डॉक्टर ओपीडी छोड़कर ओटी में चले जाते हैं। नतीजतन मरीज लाइन में लगे रहते हैं और इलाज के लिए परेशान होकर लौट जाते हैं।
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डीजल के लिए मिलता है 35 हजार रुपये का बजट
अस्पताल प्रशासन को हर महीने डीजल के लिए 35 हजार रुपये का बजट रोगी कल्याण समिति से मिलता है। लेकिन बताया जा रहा है कि जेनरेटर से पूरे अस्पताल परिसर को बिजली दी जाती है। जिसमें ओपीडी, इमरजेंसी, सर्जिकल वार्ड, मेडिकल वार्ड, पैथोलॉजी और कार्यालय में बिजली आपूर्ति करनी होती है। ऐसे में डीजल का खर्च बजट से कहीं ज्यादा हो जाता है। यही वजह है कि सर्जरी केवल दिन में ही निपटाने की व्यवस्था कर दी गई है।
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अस्पताल को हर महीने डीजल के लिए 35 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। मजबूरी में हमें ओपीडी समय में ही ऑपरेशन कराने की व्यवस्था करनी पड़ती है। इमरजेंसी मरीजों की सर्जरी किसी भी समय की जाती है।
डॉ. शारदा रंजन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक