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डाक्टर नदारद अस्पताल बदहाल, मरीज कहां कराएं इलाज

Mon, 22 Nov 2021 10:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 10:45 PM IST
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Doctor absent hospital is bad, where should the patient get treatment
बलरामपुर। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए सरकार चाहे जितना भी प्रयास करे लेकिन डॉक्टर व चिकित्सा कर्मियों की लापरवाही के चलते अस्पतालों की दशा में कोई सुधार नही हो पा रहा है।
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इसका जीता जागता उदाहरण सीएचसी गैसड़ी है। कहने को तो यहां चार चिकित्सक तैनात है लेकिन इनमें से अधिकांश लोग हमेशा गायब ही रहते हैं। डॉक्टरों के गायब रहने से मरीजों को इलाज के लिए दरदर भटकना पड़ता है।
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एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण मरीजों को जांच के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं। मरीजों को बाहर से दवा भी लेनी पड़ती है। स्वास्थ्य सुविधाओं की पड़ताल के लिए अमर उजाला की टीम ने सोमवार को अस्पताल पहुंचकर मरीजों का हालचाल लिया।
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सीएचसी गैसड़ी में मरीजों के इलाज के लिए चार डॉक्टरों की तैनाती है लेकिन सोमवार को मात्र दो डॉक्टर मौजूद मिले। डॉ. अजय गोस्वामी मरीजों को देख रहे थे और डॉ. किशन गुप्ता करीब साढ़े ग्यारह बजे अस्पताल में पहुंचे थे। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र आर्या व एक अन्य डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। मरीजों ने बताया कि यहां पर डॉक्टर हमेशा गायब ही रहते है। डॉक्टरों के न रहने पर फार्मासिस्ट से दवा लिखवानी पड़ती है।
अस्पताल में जांच के नाम पर केवल ब्लड, यूरिन एवं बलगम की ही जांच होती है। एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड न होने के कारण इसकी जांच के लिए मरीजों को काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
अस्पताल में मरीजों को दवा भी बाहर की ही लिखी जाती है। अस्पताल में इलाज कराने आए परसा पलईडीह निवासी जमील ने बताया कि हमे पेट में दर्द की शिकायत थी। अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने बाहर की दवा लिख दी। बाहर मेडिकल स्टोर से हमे 230 रुपये की दवा खरीदनी पड़ी है।
इसी तरह मोहिनी, रेशमा व नर्फुन्निशा आदि ने भी बाहर से दवा लिखे जाने की शिकायत की। बवासीर से पीड़ित एक मरीज ने बताया कि डाक्टर ने उन्हें दस दिन की दवा लिखी थी लेकिन औषधि वितरण केंद्र से केवल तीन दिन की दवा ही दी गई है।
सरकार प्रसूताओं एवं नवजात शिशुओं के लिए टीकाकरण अभियान के साथ-साथ तमाम योजनाएं भी चला रही है। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते पात्रों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है।

अस्पताल में योजना का लाभ लेने आई सुंदरी ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ लेने के लिए वह पिछले एक साल से अस्पताल का चक्कर काट रही है। कर्मचारियों द्वारा बार-बार बहाना बनाकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है।
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