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धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं
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बलरामपुर। लोकसभा में गुरुवार को केंद्र सरकार ने तीन तलाक के संबंध में जो बिल पेश किया है उसे मुस्लिम धर्मगुरु मानने को तैयार नहीं हैं।
इनका कहना है कि इस्लामिक शरीयत के नियमों में सरकारी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। एक तरफ सरकार सबका साथ सबका विकास करने का दावा कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर मुस्लिम समुदाय को आहत किया जा रहा है।
मौलाना मोहम्मद उमर का कहना है कि हिंदुस्तान के संविधान में सबको अपना-अपना धर्म निभाने की आजादी है। मुसलमान शरीयत के नियमों को मानते हैं।
इससे संबंधित मसलों के खिलाफ किसी तरह का षड्यंत्र बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तीन तलाक बिल के माध्यम से सरकार इस्लामिक मामलों में जो दखल दे रही है हम उसका विरोध करेंगे।
मौलाना फैय्यज अहमद मिस्बाही ने कहा कि तीन तलाक को लेकर शरीयत में नियम बनाया गया है। एकसाथ तीन तलाक नहीं दे सकते हैं।
चार-चार माह के अंतर पर एक समय में एक ही तलाक दिया जा सकता है। केंद्र सरकार हमारे धार्मिक मामलों में बेवजह हस्तक्षेप कर हमें आहत कर रही है।
मदरसा जामिया अरबिया अनवारूल कुरान के प्रबंधक डॉ. इकबाल अहमद ने कहा कि कुरान व हदीस में तलाक की जो प्रक्रिया है हम उसे ही मानेंगे। सरकार का निर्णय यदि कुरान व हदीस के खिलाफ है तो हम उसका विरोध करेंगे।
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इनका कहना है कि इस्लामिक शरीयत के नियमों में सरकारी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। एक तरफ सरकार सबका साथ सबका विकास करने का दावा कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर मुस्लिम समुदाय को आहत किया जा रहा है।
मौलाना मोहम्मद उमर का कहना है कि हिंदुस्तान के संविधान में सबको अपना-अपना धर्म निभाने की आजादी है। मुसलमान शरीयत के नियमों को मानते हैं।
इससे संबंधित मसलों के खिलाफ किसी तरह का षड्यंत्र बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तीन तलाक बिल के माध्यम से सरकार इस्लामिक मामलों में जो दखल दे रही है हम उसका विरोध करेंगे।
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मौलाना फैय्यज अहमद मिस्बाही ने कहा कि तीन तलाक को लेकर शरीयत में नियम बनाया गया है। एकसाथ तीन तलाक नहीं दे सकते हैं।
चार-चार माह के अंतर पर एक समय में एक ही तलाक दिया जा सकता है। केंद्र सरकार हमारे धार्मिक मामलों में बेवजह हस्तक्षेप कर हमें आहत कर रही है।
मदरसा जामिया अरबिया अनवारूल कुरान के प्रबंधक डॉ. इकबाल अहमद ने कहा कि कुरान व हदीस में तलाक की जो प्रक्रिया है हम उसे ही मानेंगे। सरकार का निर्णय यदि कुरान व हदीस के खिलाफ है तो हम उसका विरोध करेंगे।
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