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Balrampur News: बारिश न होने से सूख रहीं फसलें, किसानों को सता रहा सूखे का डर
Tue, 01 Aug 2023 10:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 01 Aug 2023 10:56 PM IST
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बलरामपुर के सदर ब्लॉक में गुरचाही गांव में बारिश न होने से धान के खेत में पड़ी दरारें।
बलरामपुर। जुलाई माह में बारिश औसत से भी कम होने के कारण जिले में सूखे के आसार बढ़ गए हैं। धान व गन्ने की फसलें सूख रही हैं। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। ऐसे में किसानों को अब भारी नुकसान का डर सताने लगा है। फसल को सूखने से बचाने के लिए किसान निजी संसाधनों से सिंचाई करने का जुगाड़ जुटा रहे हैं। हालांकि इससे लागत काफी महंगी साबित हो रही है। खेतों में पानी न होने से 20 प्रतिशत किसान अभी भी धान की रोपाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
जिले के चार ब्लॉक हार्ड एरिया के रूप में जाने जाते हैं। यहां सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। यहां की खेती बारिश पर ही निर्भर रहती है। जुलाई माह में इस वर्ष बारिश न होने के कारण सूखे का डर किसानों को सता रहा है। निजी संसाधनों से जो किसान धान की रोपाई कर भी चुके हैं, उनके खेत में पानी की कमी के कारण पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। बारिश न होने से धान व गन्ने के खेतों में दरारें पड़ गईं हैं।
जिले में इस वर्ष एक लाख 13 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में धान की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब तक करीब 90 हजार हेक्टेअर में ही धान की रोपाई हो सकी है।
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कराया जाएगा सर्वे
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सियाराम कनौजिया का कहना है कि जिले में औसत से कम बारिश हुई है। यदि 10 अगस्त तक पर्याप्त बारिश हुई तो फसलों को नुकसान नहीं होगा। तय सीमा तक पर्याप्त बारिश न होने पर सर्वे कराया जाएगा।
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जिले के चार ब्लॉक हार्ड एरिया के रूप में जाने जाते हैं। यहां सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। यहां की खेती बारिश पर ही निर्भर रहती है। जुलाई माह में इस वर्ष बारिश न होने के कारण सूखे का डर किसानों को सता रहा है। निजी संसाधनों से जो किसान धान की रोपाई कर भी चुके हैं, उनके खेत में पानी की कमी के कारण पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। बारिश न होने से धान व गन्ने के खेतों में दरारें पड़ गईं हैं।
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जिले में इस वर्ष एक लाख 13 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में धान की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब तक करीब 90 हजार हेक्टेअर में ही धान की रोपाई हो सकी है।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. सियाराम कनौजिया का कहना है कि जिले में औसत से कम बारिश हुई है। यदि 10 अगस्त तक पर्याप्त बारिश हुई तो फसलों को नुकसान नहीं होगा। तय सीमा तक पर्याप्त बारिश न होने पर सर्वे कराया जाएगा।