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Balrampur News: दलित परिवार का घर उजाड़ने में कोर्ट ने माना दोषी
Fri, 22 May 2026 01:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 22 May 2026 01:07 AM IST
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बलरामपुर। पचपेड़वा क्षेत्र में दलित परिवार का घर उजाड़ने और जातिसूचक गालियां देने के 11 साल पुराने मामले में अदालत ने फैसला सुनाते हुए आरोपी भुर्रे यादव को दोषी माना है। कोर्ट ने दोषी को छह माह की परिवीक्षा पर छोड़ने का आदेश दिया है। साक्ष्य व गवाही के दौरान आरोपी पर एससी-एसटी एक्ट का आरोप साबित नहीं हो सका।
मामला वर्ष 2015 का है। ग्राम निवासी अवधराम ने आरोप लगाया था कि वह वर्षों से आबादी की जमीन पर परिवार के साथ रह रहे थे। आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधान समेत कई लोग उनके घर पहुंचे और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए छप्पर, थूनी और घरेलू सामान उजाड़ दिया।
घटना के दौरान घर में रखा अनाज और अन्य सामान भी बाहर फेंक दिया गया था। अवधराम का कहना था कि घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजा और अंत में अदालत की शरण ली।
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कोर्ट ने मामले को परिवाद के रूप में स्वीकार कर सुनवाई शुरू की। मामले में आरोपी मलखे और बब्लू पहले ही जुर्म स्वीकार कर चुके थे, जिन पर पूर्व में फैसला सुनाया जा चुका है। जबकि आरोपी भुर्रे यादव के खिलाफ सुनवाई जारी रही। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
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मामला वर्ष 2015 का है। ग्राम निवासी अवधराम ने आरोप लगाया था कि वह वर्षों से आबादी की जमीन पर परिवार के साथ रह रहे थे। आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधान समेत कई लोग उनके घर पहुंचे और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए छप्पर, थूनी और घरेलू सामान उजाड़ दिया।
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घटना के दौरान घर में रखा अनाज और अन्य सामान भी बाहर फेंक दिया गया था। अवधराम का कहना था कि घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजा और अंत में अदालत की शरण ली।
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कोर्ट ने मामले को परिवाद के रूप में स्वीकार कर सुनवाई शुरू की। मामले में आरोपी मलखे और बब्लू पहले ही जुर्म स्वीकार कर चुके थे, जिन पर पूर्व में फैसला सुनाया जा चुका है। जबकि आरोपी भुर्रे यादव के खिलाफ सुनवाई जारी रही। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।