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Balrampur News: पांच साल में अरबों खर्च, फिर भी सूखे हैं नल

Wed, 18 Feb 2026 10:47 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Feb 2026 10:47 PM IST
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Billions spent in five years, yet the taps are still dry
बलरामपुर के धुसाह गांव में बनी पानी की टंकी ।-संवाद
बलरामपुर। हर घर नल से जल योजना ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही। पांच सालों में अरबों का बजट इस योजना पर खर्च हुआ है, फिर भी ज्यादातर गांवों में अभी तक लोगों को पानी का इंतजार है। ज्यादातर ग्रामीणों के लिए यह योजना सिर्फ एक सपना बनकर रह गई है।
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वर्ष 2020 में 16.25 अरब रुपये की लागत से शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य जिले की 630 ग्राम पंचायतों के 884 गांवों तक नल के माध्यम से शुद्ध जल पहुंचाना था। अब तक 7.82 अरब रुपये खर्च किए जा चुके हैं, इसके बावजूद केवल 268 ग्राम पंचायतों में ही जलापूर्ति हो सकी है। 362 पंचायतों में आज भी लोग एक बूंद पानी का इंतजार कर रहे हैं।
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योजना के तहत गांवों की सड़कों को खोदकर पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन बड़ी संख्या में स्थानों पर काम अधूरा छोड़ दिया गया। सदर ब्लॉक के धुसाह गांव की स्थिति यह है कि सड़कें जर्जर हैं, गड्ढों और कीचड़ से होकर गुजरना लोगों की मजबूरी बन गया है। बच्चों का स्कूल जाना कठिन हो गया है, बुजुर्गों को घर से निकलने में परेशानी होती है और बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाना जोखिम भरा हो गया है।
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इसी तरह कई गांवों में महीनों बीत जाने के बाद भी खुदी सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जहां पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां भी नलों से पानी नहीं आ रहा। गर्मी के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। हैंडपंप सूख चुके हैं और कुओं का पानी पीने लायक नहीं बचा है। ऐसे में हर घर नल से जल योजना ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। (संवाद)
बजट मिलने में हुई देरी
विभाग का कहना है कि बीते डेढ़ साल से बजट न मिलने के कारण कार्य में देरी हुई है। हालांकि पहले चरण में जिन करीब 245 ग्राम पंचायतों में 90 से 100 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, वहां दोबारा बजट जारी किया गया है। दावा है कि शीघ्र ही इन गांवों में जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी, लेकिन बार-बार के आश्वासनों से ग्रामीणों का भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है।

ग्रामीणों का छलका दर्द

धुसाह गांव की ग्रामीण अंजली वर्मा का कहना है कि गांव में सड़कें खोदकर छोड़ दी गईं, पाइपलाइन बिछा दी गई, लेकिन आज तक नलों से पानी नहीं आया। सूरज पांडेय का कहना है कि महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। कई बार शिकायत की, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अब सब्र की सीमा टूट रही है। हरिराम वर्मा व दुखहरण का कहना है कि बरसात में कीचड़ और गर्मी में धूल से हाल बेहाल रहता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

2027 में पूरा होगा शत प्रतिशत कार्य
बजट की कमी के कारण कार्य में देरी हुई है। लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक जिले में 100 प्रतिशत कार्य पूरा कराकर सभी गांवों में जलापूर्ति शुरू करा दी जाए। कार्य कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
संदीप सिंह, अधिशासी अभियंता जलनिगम ग्रामीण
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