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Balrampur News: गंगा सप्तमी पर देवीपाटन में उमड़ा आस्था का सैलाब
Fri, 24 Apr 2026 12:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 24 Apr 2026 12:03 AM IST
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फोटो-11-बलरामपुर के शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु ।-संवाद
तुलसीपुर। देवीपाटन शक्तिपीठ में बृहस्पतिवार को गंगा सप्तमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। तड़के से ही श्रद्धालुओं ने मां पाटेश्वरी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर मां गंगा के जयकारों से गुंजायमान रहा और वातावरण भक्तिमय बना रहा।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सूर्यकुंड में स्नान किया और मां के दर्शन किए। गोंडा से आई श्रद्धालु सुनीता देवी और बलरामपुर निवासी रमेश कुमार ने बताया कि इस दिन दर्शन करने से मन को शांति और जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है। पूरे दिन दीपदान और मां के जयकारे लगते रहे। मंदिर व्यवस्थापक अरुण गुप्ता ने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए, जिससे सभी भक्तों को सुगमता से दर्शन हो सके।
मां गंगा पुनर्जन्म का प्रतीक है पर्व
गंगा सप्तमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पीठाधीश्वर मिथलेश नाथ योगी ने बताया कि यह दिन मां गंगा के पुनर्जन्म का प्रतीक है। उन्होंने ऋषि जह्नु की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिन मां गंगा ऋषि की जटाओं से पुनः प्रकट होकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, इसलिए इस तिथि को गंगा का पुनर्जन्म माना जाता है। यह मनुष्य के भीतर के विकारों को दूर कर आध्यात्मिक शुद्धि का संदेश देती है। कहा कि इस दिन शक्तिपीठ में दर्शन-पूजन का फल अनंत गुना हो जाता है।
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बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सूर्यकुंड में स्नान किया और मां के दर्शन किए। गोंडा से आई श्रद्धालु सुनीता देवी और बलरामपुर निवासी रमेश कुमार ने बताया कि इस दिन दर्शन करने से मन को शांति और जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है। पूरे दिन दीपदान और मां के जयकारे लगते रहे। मंदिर व्यवस्थापक अरुण गुप्ता ने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए, जिससे सभी भक्तों को सुगमता से दर्शन हो सके।
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मां गंगा पुनर्जन्म का प्रतीक है पर्व
गंगा सप्तमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पीठाधीश्वर मिथलेश नाथ योगी ने बताया कि यह दिन मां गंगा के पुनर्जन्म का प्रतीक है। उन्होंने ऋषि जह्नु की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिन मां गंगा ऋषि की जटाओं से पुनः प्रकट होकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, इसलिए इस तिथि को गंगा का पुनर्जन्म माना जाता है। यह मनुष्य के भीतर के विकारों को दूर कर आध्यात्मिक शुद्धि का संदेश देती है। कहा कि इस दिन शक्तिपीठ में दर्शन-पूजन का फल अनंत गुना हो जाता है।
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