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नहरों के सफाई पर 44.45 लाख खर्च, फिर भी नहीं मिल रहा पानी
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बलरामपुर। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है लेकिन विभागीय अधिकारियों की मनमानी शासन के किये कराए पर पानी फेर देती है। सात माह पहले जिले में नहरों की सफाई के लिए निविदा कराई गई थी लेकिन आज तक अधिकांश नहरों की सफाई नहीं हो पाई। सिंचाई के अभाव में किसानों की फसल खेत में मुरझा रही है। बेबस किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं।
सरयू नहर खंड-चतुर्थ के अधीन बस्ती शाखा की करीब 190 किलोमीटर लंबी नहर आती है। इसके तहत 23 माइनर की बेड स्क्रैपिंग व जंगल की सफाई के लिए 44.45 लाख रुपए खर्च करने की योजना बनाई गई थी। 12 अक्तूबर को नहर सफाई की निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अभी तक नहरों की सफाई नहीं हो सकी है। डेढ़ माह से नहर की सफाई का कार्य भी बंद है। आधी-अधूरी सफाई होने से नहरें बदहाल नजर आ रही हैं। नहरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। नहरें झाड़-झंखाड़ से पटी पड़ी हैं।
उतरौला राजबहा की 41.135 किलोमीटर बेड स्क्रैपिंग व झाड़ियों की सफाई पर 19.65 लाख रुपये खर्च किए गये हैं। सेखुइया माइनर पर 70 हजार, भगौतापुर माइनर पर 1.48 लाख, बभनपुरवा माइनर पर 38 हजार, गुलवरिया माइनर पर 23 हजार, हुसैनाबाद राजबहा पर 3.84 लाख, मानापार बहेरिया माइनर पर 74 हजार, बंजरिया माइनर पर 89 हजार, बिलरिया माइनर पर 53 हजार, दिलावलपुर रजबहा पर 2.80 लाख रुपये खर्च हुए हैं। गरीबनगर माइनर पर 1.33 लाख, बैथुइया माइनर पर 69 हजार, उदयपुर रजबहा पर 1.99 लाख, गहरौला माइनर पर 48 हजार, नरायनपुर माइनर पर 68 हजार, इटईरामपुर रजबहा पर 1.88 लाख, धुसवा माइनर पर 1.51 लाख, मलिया माइनर पर 89 हजार व बैशडीह माइनर पर 92 हजार रुपये से बेड स्क्रैपिंग एवं झाड़ियों की सफाई का खाका तैयार किया गया था।
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किसान रामतेज, बहादुर, श्याम किशोर, राजेंद्र कुमार, परवेज अहमद आदि का कहना है कि धान की नर्सरी, गन्ना व मौसमी सब्जी की फसलों में सिंचाई की सख्त जरूरत है। मौसम की बेरुखी से खेतों में लगी फसलें सूखने लगी हैं। नहरों की सफाई न होने से पानी की जगह धूल उड़ रही है। यदि बरसात न हुई तो फसल सूखकर बर्बाद हो जाएंगी। बिजली कटौती के कारण पंपिंग सेट भी नहीं चल पा रहा है। नहर विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है।
सरयू नहर खंड-चतुर्थ के अधिशासी अभियंता परवेज अहमद ने बताया कि नहरों की सफाई का कार्य श्रमिकों से कराया जा रहा है। अधिकांश नहरें साफ भी हो चुकी हैं। जिन नहरों की सफाई हो जाती है उसमें पानी छोड़ दिया जाता है। अभी तक जिन नहरों की सफाई नहीं हुई है उनका कार्य युद्घस्तर पर कराया जा रहा है।
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सरयू नहर खंड-चतुर्थ के अधीन बस्ती शाखा की करीब 190 किलोमीटर लंबी नहर आती है। इसके तहत 23 माइनर की बेड स्क्रैपिंग व जंगल की सफाई के लिए 44.45 लाख रुपए खर्च करने की योजना बनाई गई थी। 12 अक्तूबर को नहर सफाई की निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अभी तक नहरों की सफाई नहीं हो सकी है। डेढ़ माह से नहर की सफाई का कार्य भी बंद है। आधी-अधूरी सफाई होने से नहरें बदहाल नजर आ रही हैं। नहरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। नहरें झाड़-झंखाड़ से पटी पड़ी हैं।
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उतरौला राजबहा की 41.135 किलोमीटर बेड स्क्रैपिंग व झाड़ियों की सफाई पर 19.65 लाख रुपये खर्च किए गये हैं। सेखुइया माइनर पर 70 हजार, भगौतापुर माइनर पर 1.48 लाख, बभनपुरवा माइनर पर 38 हजार, गुलवरिया माइनर पर 23 हजार, हुसैनाबाद राजबहा पर 3.84 लाख, मानापार बहेरिया माइनर पर 74 हजार, बंजरिया माइनर पर 89 हजार, बिलरिया माइनर पर 53 हजार, दिलावलपुर रजबहा पर 2.80 लाख रुपये खर्च हुए हैं। गरीबनगर माइनर पर 1.33 लाख, बैथुइया माइनर पर 69 हजार, उदयपुर रजबहा पर 1.99 लाख, गहरौला माइनर पर 48 हजार, नरायनपुर माइनर पर 68 हजार, इटईरामपुर रजबहा पर 1.88 लाख, धुसवा माइनर पर 1.51 लाख, मलिया माइनर पर 89 हजार व बैशडीह माइनर पर 92 हजार रुपये से बेड स्क्रैपिंग एवं झाड़ियों की सफाई का खाका तैयार किया गया था।
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किसान रामतेज, बहादुर, श्याम किशोर, राजेंद्र कुमार, परवेज अहमद आदि का कहना है कि धान की नर्सरी, गन्ना व मौसमी सब्जी की फसलों में सिंचाई की सख्त जरूरत है। मौसम की बेरुखी से खेतों में लगी फसलें सूखने लगी हैं। नहरों की सफाई न होने से पानी की जगह धूल उड़ रही है। यदि बरसात न हुई तो फसल सूखकर बर्बाद हो जाएंगी। बिजली कटौती के कारण पंपिंग सेट भी नहीं चल पा रहा है। नहर विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है।
सरयू नहर खंड-चतुर्थ के अधिशासी अभियंता परवेज अहमद ने बताया कि नहरों की सफाई का कार्य श्रमिकों से कराया जा रहा है। अधिकांश नहरें साफ भी हो चुकी हैं। जिन नहरों की सफाई हो जाती है उसमें पानी छोड़ दिया जाता है। अभी तक जिन नहरों की सफाई नहीं हुई है उनका कार्य युद्घस्तर पर कराया जा रहा है।