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4.90 लाख लेने के बाद भी 40 किमी दूर छोड़ गए ट्रक चालक
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बलरामपुर में ट्रक से उतरते मुंबई से आए कामगार।
- फोटो : BALRAMPUR
बलरामपुर। लॉकडाउन के दौरान बाहरी प्रदेशों में रह रहे प्रवासी कामगार घर पहुंचने के लिए हर मुसीबत झेलने को तैयार दिख रहे हैं। 4.90 लाख में ट्रक बुक कराकर मुंबई से बलरामपुर पहुंचे 140 लोगों को घर पहुंचने के लिए 40 से 50 किमी पैदल चलना पड़ा। ट्रक चालक इन लोगों को मुख्यालय पर ही उतारकर वापस चला गया। जिस तरह ट्रक में लोग भूसे की तरह भरे थे उसे देखकर यह लग रहा है कि जल्दी ही यह बीमारी जिले में भयावह रूप धारण कर सकती है। प्रशासन को इस तरह के मामलों का संज्ञान लेकर उचित प्रबंध करना चाहिए।
घर की तरफ पैदल ही जा रहे संतोष, आरिफ, रिजवान, अनिल मौर्य, अखिलेश यादव, मशहूर आलम, मसरुर, मोहम्मद आरिफ, रोहित, हिमांशु व राम प्रकाश आदि ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान कामकाज ठप होने से हम लोगों ने वोरवली मुंबई से ट्रक बुक कराकर दो ट्रकों में करीब 140 लोग गैसड़ी व अन्य क्षेत्रों के लिए बीते दिनों चले थे। दोनों ट्रकों का करीब हम लोगों ने 4.90 लाख रुपये किराया दिया था। पांच दिनों की कठिन यात्रा के बाद सोमवार सुबह हम लोग बलरामपुर पहुंचे।
ट्रक चालक ने हम लोगों को यहीं उतार दिया जबकि उससे गंतव्य तक जाने की बात हुई थी। इन लोगों का यह भी कहना है कि रास्ते में खाने पीने को कुछ नहीं मिला। बिस्कुट वगैरह खाकर तथा पानी पीकर हम लोग यहां तक पहुंचे है। यह लोग पैदल ही अपने अपने घरों को रवाना हो गए। सुबह का समय होने के कारण स्थानीय प्रशासन की नजर भी इन लोगों पर नहीं पड़ी थी। यह लोग कहां जाएंगे और किस तरह का संक्रमण फैलाएंगे यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
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घर की तरफ पैदल ही जा रहे संतोष, आरिफ, रिजवान, अनिल मौर्य, अखिलेश यादव, मशहूर आलम, मसरुर, मोहम्मद आरिफ, रोहित, हिमांशु व राम प्रकाश आदि ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान कामकाज ठप होने से हम लोगों ने वोरवली मुंबई से ट्रक बुक कराकर दो ट्रकों में करीब 140 लोग गैसड़ी व अन्य क्षेत्रों के लिए बीते दिनों चले थे। दोनों ट्रकों का करीब हम लोगों ने 4.90 लाख रुपये किराया दिया था। पांच दिनों की कठिन यात्रा के बाद सोमवार सुबह हम लोग बलरामपुर पहुंचे।
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ट्रक चालक ने हम लोगों को यहीं उतार दिया जबकि उससे गंतव्य तक जाने की बात हुई थी। इन लोगों का यह भी कहना है कि रास्ते में खाने पीने को कुछ नहीं मिला। बिस्कुट वगैरह खाकर तथा पानी पीकर हम लोग यहां तक पहुंचे है। यह लोग पैदल ही अपने अपने घरों को रवाना हो गए। सुबह का समय होने के कारण स्थानीय प्रशासन की नजर भी इन लोगों पर नहीं पड़ी थी। यह लोग कहां जाएंगे और किस तरह का संक्रमण फैलाएंगे यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
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