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राप्ती की कटान से दो दिन में 26 परिवार बेघर
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बलरामपुर के सहिबानगर गांव के बगल कटान कर रही राप्ती नदी।
- फोटो : BALRAMPUR
ललिया (बलरामपुर)। स्थानीय थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत गोड़वा के मजरा सहिबानगर में दो दिनों से राप्ती नदी की कटान ने रफ्तार पकड़ ली है। सहिबानगर गांव के 26 परिवार बेघर हो चुके है। राप्ती नदी की तेज कटान से नदी में कच्चे व पक्के मकान समाहित हो रहे हैं। बेबस कटान पीड़ित परिवार के लोग अपने हाथों से आशियाना उजाड़ रहे हैं। कटान रोकने के लिए मौके पर पहुंचे बाढ़ खंड के अफसरों को भी तरीका नहीं सूझ रहा है।
हरिराम, राधिका व रामेश्वर आदि ने बताया कि अब तक 100 मीटर तक गांव का हिस्सा राप्ती नदी में समाहित हो चुका है। पिछले दो दिनों से राप्ती नदी तेजी से कटान कर रही है। राप्ती नदी की कटान में गांव के 26 लोगों के कच्चे व पक्के मकान समाहित हो चुके हैं।
ग्रामीण सियाराम, रक्षाराम, रामपत, राजितराम, जगराम, बाबूराम, रामचंदर, चौधरी, अमरेश, राम सागर, राम फेरन, कुन्नू, मनोहर, छोटेलाल, पुत्तीलाल, गंगासागर, पूजूराम, संतराम, श्यामदास व अयोध्या सहित 26 लोगों का कच्चा व पक्का मकान राप्ती नदी में समा चुका है।
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इन लोगों का कहना है कि राप्ती नदी ने अचानक कटान शुरू की है। कटान इतनी तेज है कि हम लोग अपना कच्चा व पक्का मकान भी नहीं बचा पा रहे हैं। यदि शीघ्र ही कटान रोकने का कोई उपाय नहीं किया गया तो पूरे मजरे लोगों का घर राप्ती नदी में समाहित हो जाएगा।
सूचना पाकर मौके पर पहुंचे सहायक अभियंता बाढ़ खंड प्रीतम लाल ने बताया कि कटान रोकने के लिए पेड़ों की टहनी डाली जा रही है। समय से सूचना न मिलने के चलते उपाय नहीं किया जा सका है। यदि समय से सूचना मिलती तो गांव वालों का इतना नुकसान नहीं होता। बंबू, कैरेट व कटान रोकने के अन्य संसाधन मंगाए जा रहे हैं। सहायक अभियंता के साथ मौके पर जेई राज कुंवर सिंह भी बाढ़ रोकने के उपाय का जुगाड़ करते दिखे।
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हरिराम, राधिका व रामेश्वर आदि ने बताया कि अब तक 100 मीटर तक गांव का हिस्सा राप्ती नदी में समाहित हो चुका है। पिछले दो दिनों से राप्ती नदी तेजी से कटान कर रही है। राप्ती नदी की कटान में गांव के 26 लोगों के कच्चे व पक्के मकान समाहित हो चुके हैं।
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ग्रामीण सियाराम, रक्षाराम, रामपत, राजितराम, जगराम, बाबूराम, रामचंदर, चौधरी, अमरेश, राम सागर, राम फेरन, कुन्नू, मनोहर, छोटेलाल, पुत्तीलाल, गंगासागर, पूजूराम, संतराम, श्यामदास व अयोध्या सहित 26 लोगों का कच्चा व पक्का मकान राप्ती नदी में समा चुका है।
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इन लोगों का कहना है कि राप्ती नदी ने अचानक कटान शुरू की है। कटान इतनी तेज है कि हम लोग अपना कच्चा व पक्का मकान भी नहीं बचा पा रहे हैं। यदि शीघ्र ही कटान रोकने का कोई उपाय नहीं किया गया तो पूरे मजरे लोगों का घर राप्ती नदी में समाहित हो जाएगा।
सूचना पाकर मौके पर पहुंचे सहायक अभियंता बाढ़ खंड प्रीतम लाल ने बताया कि कटान रोकने के लिए पेड़ों की टहनी डाली जा रही है। समय से सूचना न मिलने के चलते उपाय नहीं किया जा सका है। यदि समय से सूचना मिलती तो गांव वालों का इतना नुकसान नहीं होता। बंबू, कैरेट व कटान रोकने के अन्य संसाधन मंगाए जा रहे हैं। सहायक अभियंता के साथ मौके पर जेई राज कुंवर सिंह भी बाढ़ रोकने के उपाय का जुगाड़ करते दिखे।