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राप्ती के पानी से 25 से अधिक गांव बने टापू
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बलरामपुर। प्रशासनिक लापरवाही के चलते श्रीदत्तगंज व उतरौला ब्लॉक के 25 से अधिक गांव टापू बने हुए हैं। राप्ती नदी के बाढ़ का पानी इन गांवों के चारों तरफ भरा है। हजारों हेक्टेअर फसलें पानी में डूब गई हैं। जिससे क्षेत्रवासी परेशान है। रास्तों पर भरे पानी के बीच आवागमन करने को लोग मजबूर है।
विदित हो कि करीब एक दशक पूर्व बलरामपुर-भड़रिया तटबंध का निर्माण कराया गया था। जिम्मेदार अफसरों ने बांध में कई जगह गैप छोड़ दिया था। यही गैप अब 25 से अधिक तटवर्ती गांवों के लिए अभिशाप बन गया है। राप्ती नदी में बाढ़ आते ही इसी गैप से होकर पानी मनियरिया, खम्हरिया, मंझारी बाछिल, चित्तरसिंहडीह, केरावगढ़, वीरबलडीह, डिहुलिया, भिठौड़ी, नवडीह, कोड़खा, लारम, बंजरहा, नरमे, तिसाह, बाघाजोत, सिरिया, कोलवा व चंदापुर सहित 25 से अधिक गांवों के चारों तरफ भर जाता है।
पीड़ित सर्वेश सिंह राणा, चंदन सिंह, कृष्णपाल सिंह, अनिल गिरि, राम अचल वर्मा, शिव कुमार तिवारी व इलियास का कहना है कि बांध बनने के पहले जब नदी में बाढ़ आती थी तो पानी भर जाता था। बाढ़ कम होते ही पानी नदी में उतर जाता था। प्रशासन ने बांध तो बना दिया लेकिन जल निकासी के लिए बार-बार मांग के बावजूद साईफन नहीं बनाया।
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खेतों व गांव के चारों तरफ भरा पानी नदी का जलस्तर कम होने के बाद भी करीब तीन हजार हेक्टेअर फसलों व रास्तों पर भरा रहता है। विगत 10 वर्षों से हर साल धान की खेती बर्बाद हो जाती है। इन लोगों ने सूबे के जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह को ज्ञापन देकर जल निकासी के लिए बांध में साईफन बनवाने की मांग की है।
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विदित हो कि करीब एक दशक पूर्व बलरामपुर-भड़रिया तटबंध का निर्माण कराया गया था। जिम्मेदार अफसरों ने बांध में कई जगह गैप छोड़ दिया था। यही गैप अब 25 से अधिक तटवर्ती गांवों के लिए अभिशाप बन गया है। राप्ती नदी में बाढ़ आते ही इसी गैप से होकर पानी मनियरिया, खम्हरिया, मंझारी बाछिल, चित्तरसिंहडीह, केरावगढ़, वीरबलडीह, डिहुलिया, भिठौड़ी, नवडीह, कोड़खा, लारम, बंजरहा, नरमे, तिसाह, बाघाजोत, सिरिया, कोलवा व चंदापुर सहित 25 से अधिक गांवों के चारों तरफ भर जाता है।
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पीड़ित सर्वेश सिंह राणा, चंदन सिंह, कृष्णपाल सिंह, अनिल गिरि, राम अचल वर्मा, शिव कुमार तिवारी व इलियास का कहना है कि बांध बनने के पहले जब नदी में बाढ़ आती थी तो पानी भर जाता था। बाढ़ कम होते ही पानी नदी में उतर जाता था। प्रशासन ने बांध तो बना दिया लेकिन जल निकासी के लिए बार-बार मांग के बावजूद साईफन नहीं बनाया।
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खेतों व गांव के चारों तरफ भरा पानी नदी का जलस्तर कम होने के बाद भी करीब तीन हजार हेक्टेअर फसलों व रास्तों पर भरा रहता है। विगत 10 वर्षों से हर साल धान की खेती बर्बाद हो जाती है। इन लोगों ने सूबे के जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह को ज्ञापन देकर जल निकासी के लिए बांध में साईफन बनवाने की मांग की है।