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गोंडा जिले का चक्कर काट रहे बीटीसी ट्रेनिंग के छात्र
Updated Thu, 21 Jun 2018 12:33 AM IST
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जिले के डायट में नहीं हो रही बीटीसी प्रशिक्षण की पढ़ाई
बलरामपुर। बीटीसी ट्रेनिंग के छात्र गोंडा जिले के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में बीटीसी प्रशिक्षण की पढ़ाई अभी तक शुरु नहीं हो सकी है।
जिला बनने के 20 साल बाद भी डायट को बीटीसी ट्रेनिंग कराने की मान्यता नहीं मिल सकी है। जिले के 100 छात्रों को हर साल दर्जीकुंआ गोंडा में बीटीसी प्रशिक्षण के लिए एडमीशन लेना पड़ रहा है।
जिले से हर साल भेजा जा रहा प्रस्ताव शासन की अलमारी में डंप कर दिया जाता है। जिले के लोगों ने बलरामपुर के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान को बीटीसी ट्रेनिंग कराने के लिए मान्यता दिलाने की मांग की है।
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13 साल से हो रहा डायट का संचालन
बलरामपुर को 22 मई 1997 में जिले का दर्जा प्राप्त हुआ। नए जिले का सृजन होने के बाद नार्मल स्कूल के जमीन में वर्ष 2001-02 में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के भवन निर्माण की आधार शिला रखी गई।
भवन निर्माण पूरा होने के बाद वर्ष 2005 में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान का संचालन शुरू किया गया। डायट का संचालन शुरू होने के 11 साल बाद नार्मल स्कूल से डायट के नाम जमीन हस्तानांतरित हुई। वर्ष 2016-17 में नार्मल स्कूल से डायट को जमीन का मालिकाना हक मिला।
ट्रेनिंग की मान्यता के लिए भेजा प्रस्ताव
जिले के 100 छात्रों को हर साल बीटीसी ट्रेनिंग दिलाने के लिए मान्यता संबंधी प्रपत्र वर्ष 2005 में शासन को भेजा गया। तबसे लेकर अब तक हर साल बीटीसी ट्रेनिंग कराने की मान्यता के लिए लगातार शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
13 साल बाद भी डायट को बीटीसी ट्रेनिंग के लिए मान्यता नहीं मिल सकी है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में अफसरों व कर्मियों की भी भारी कमी है। डायट में 47 स्वीकृत पदों के सापेेक्ष मात्र 10 की तैनाती है। 37 पद रिक्त चल रहे है।
52 किलोमीटर काटना पड़ रहा चक्कर
बीटीसी ट्रेनिंग के लिए गोंडा स्थित दर्जीकुंआ के डायट का 52 किलोमीटर दूरी का छात्रों को चक्कर काटना पड़ रहा है। बीटीसी ट्रेनिंग के छात्र श्वेता सिंह, शिवम श्रीवास्तव, आकांक्षा सिंह व मधुबाला पांडेय आदि ने बताया कि जिले में व्यवस्था न होने से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले के डायट को बीटीसी ट्रेनिंग की मान्यता न मिलने से परेशानी हो रही है। इन लोगों ने सीएम योगी आदित्यनाथ से जिले के डायट को बीटीसी ट्रेनिंग की मान्यता प्रदान करने की मांग की है।
मान्यता के लिए हो रहा प्रयास
-डायट में बीटीसी ट्रेनिंग की मान्यता के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। कई वर्षो से नियमित रुप से मान्यता संबंधी प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है।
डीएम कृष्णा करुणेश के निर्देश पर जून माह में शासन को प्रस्ताव की कापी भेजकर पत्राचार किया गया है। शासन ने शीघ्र ही बीटीसी ट्रेनिंग के लिए मान्यता प्रदान करने की अनुमति दी है।
कमलेश कुमार ओझा, प्रभारी डायट प्राचार्य
फैक्ट फाइल
पदनाम-स्वीकृति पद-कार्यरत-रिक्त पद
डायट प्राचार्य-01-00-01
उप प्राचार्य-01-00-01
वरिष्ठ प्रवक्ता-06-01-05
प्रवक्ता-17-01-16
सांख्यकीकार-01-00-01
कार्यानुभव शिक्षक-01-00-01
तकनीकी सहायक-01-00-01
कार्यालय अधीक्षक-01-00-01
पुस्तकालयाध्यक्ष-01-00-01
लेखाकार-01-00-01
आशु लिपिक-01-01-00
प्रयोशाला सहायक-01-00-01
कनिष्ठ सहायक-09-03-06
चतुर्थ श्रेणी कर्मी-05-04-01
बलरामपुर। बीटीसी ट्रेनिंग के छात्र गोंडा जिले के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में बीटीसी प्रशिक्षण की पढ़ाई अभी तक शुरु नहीं हो सकी है।
जिला बनने के 20 साल बाद भी डायट को बीटीसी ट्रेनिंग कराने की मान्यता नहीं मिल सकी है। जिले के 100 छात्रों को हर साल दर्जीकुंआ गोंडा में बीटीसी प्रशिक्षण के लिए एडमीशन लेना पड़ रहा है।
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जिले से हर साल भेजा जा रहा प्रस्ताव शासन की अलमारी में डंप कर दिया जाता है। जिले के लोगों ने बलरामपुर के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान को बीटीसी ट्रेनिंग कराने के लिए मान्यता दिलाने की मांग की है।
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13 साल से हो रहा डायट का संचालन
बलरामपुर को 22 मई 1997 में जिले का दर्जा प्राप्त हुआ। नए जिले का सृजन होने के बाद नार्मल स्कूल के जमीन में वर्ष 2001-02 में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के भवन निर्माण की आधार शिला रखी गई।
भवन निर्माण पूरा होने के बाद वर्ष 2005 में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान का संचालन शुरू किया गया। डायट का संचालन शुरू होने के 11 साल बाद नार्मल स्कूल से डायट के नाम जमीन हस्तानांतरित हुई। वर्ष 2016-17 में नार्मल स्कूल से डायट को जमीन का मालिकाना हक मिला।
ट्रेनिंग की मान्यता के लिए भेजा प्रस्ताव
जिले के 100 छात्रों को हर साल बीटीसी ट्रेनिंग दिलाने के लिए मान्यता संबंधी प्रपत्र वर्ष 2005 में शासन को भेजा गया। तबसे लेकर अब तक हर साल बीटीसी ट्रेनिंग कराने की मान्यता के लिए लगातार शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
13 साल बाद भी डायट को बीटीसी ट्रेनिंग के लिए मान्यता नहीं मिल सकी है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में अफसरों व कर्मियों की भी भारी कमी है। डायट में 47 स्वीकृत पदों के सापेेक्ष मात्र 10 की तैनाती है। 37 पद रिक्त चल रहे है।
52 किलोमीटर काटना पड़ रहा चक्कर
बीटीसी ट्रेनिंग के लिए गोंडा स्थित दर्जीकुंआ के डायट का 52 किलोमीटर दूरी का छात्रों को चक्कर काटना पड़ रहा है। बीटीसी ट्रेनिंग के छात्र श्वेता सिंह, शिवम श्रीवास्तव, आकांक्षा सिंह व मधुबाला पांडेय आदि ने बताया कि जिले में व्यवस्था न होने से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले के डायट को बीटीसी ट्रेनिंग की मान्यता न मिलने से परेशानी हो रही है। इन लोगों ने सीएम योगी आदित्यनाथ से जिले के डायट को बीटीसी ट्रेनिंग की मान्यता प्रदान करने की मांग की है।
मान्यता के लिए हो रहा प्रयास
-डायट में बीटीसी ट्रेनिंग की मान्यता के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। कई वर्षो से नियमित रुप से मान्यता संबंधी प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है।
डीएम कृष्णा करुणेश के निर्देश पर जून माह में शासन को प्रस्ताव की कापी भेजकर पत्राचार किया गया है। शासन ने शीघ्र ही बीटीसी ट्रेनिंग के लिए मान्यता प्रदान करने की अनुमति दी है।
कमलेश कुमार ओझा, प्रभारी डायट प्राचार्य
फैक्ट फाइल
पदनाम-स्वीकृति पद-कार्यरत-रिक्त पद
डायट प्राचार्य-01-00-01
उप प्राचार्य-01-00-01
वरिष्ठ प्रवक्ता-06-01-05
प्रवक्ता-17-01-16
सांख्यकीकार-01-00-01
कार्यानुभव शिक्षक-01-00-01
तकनीकी सहायक-01-00-01
कार्यालय अधीक्षक-01-00-01
पुस्तकालयाध्यक्ष-01-00-01
लेखाकार-01-00-01
आशु लिपिक-01-01-00
प्रयोशाला सहायक-01-00-01
कनिष्ठ सहायक-09-03-06
चतुर्थ श्रेणी कर्मी-05-04-01