बलिया। नाम वापसी के बाद विधानसभा चुनाव की तस्वीर साफ हो चुकी है। इस दौरान कई नेताओं के बगावती तेवर अपनाने से पार्टियों को को भितरघात की आशंका सताने लगी है। पार्टियों की ओर से बगावत करने वाले नेताओं को साधने की कोशिशें हुईं, लेकिन उनके तेवर नरम नहीं पड़े। सबसे ज्यादा परेशान भाजपा दिखाई दे रही है, क्योकि सत्ताधारी दल में बगावत करने वालों की संख्या ज्यादा है।
बैरिया विधानसभा से टिकट कटने पर वर्तमान विधायक सुरेंद्र सिंह वीआईपी के बैनर तले चुनाव मैदान में जोदार तरीके से डटे हुए हैं। क्षत्रिय नेता के रूप में पहचान बनाने वाले फायर ब्रांड सुरेंद्र सिंह को कई अन्य संगठनों का भी सहयोग मिल रहा है। ऐसे में पार्टी अपने कोर वोट लेकर यहां आशंकित है। इसी विधानसभा से सपा का साथ छोड़ पूर्व विधायक सुभाष यादव बसपा के टिकट पर मैदान में हैं। यादव मतों का लेकर यहां सपा की चिंता बनी हुई है। बांसडीह विधानसभा में भाजपा से टिकट नहीं मिलने से नाराज पार्टी के नेता अजयशंकर यादव उर्फ कनक पांडेय भी वीआईपी से मैदान में जटे हुए हैं। भाजपा के लिए अपने वोटों को संभालना परेशानी भरा हो सकता है। यहां से सुभासपा में पदाधिकारी रहीं मानती राजभर बसपा के टिकट पर मैदान में हैं। बलिया नगर विधानसभा से जितेंद्र तिवारी भी वीआईपी से मैदान में रमे हुए हैं। फेफना विधानसभा में भाजपा से दावेदार रहे अवलेश सिंह जेडीयू से डटे हुए हैं। ऐसे में अपने बगावती नेताओं से मतों को होने वाले नुकसान से बचना घोषित प्रत्याशियों और दलों के लिए टेंढी खीर साबित हो सकता है।