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कटान पीड़ितों की झोपड़ियां राख
अमर उजाला ब्यूरो /बलिया
Updated Wed, 01 Mar 2017 10:39 PM IST
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कटान से बेघर होकर बैरिया थाना क्षेत्र के सुघर छपरा बंधे पर बसे कटान पीड़ितों के झोपड़ी में बुधवार की दोपहर अज्ञात कारणों से आग लगने से आठ परिवारों की झोपड़ियों राख हो गई। अगलगी में एक मासूम की मौत हो गई, जबकि दो लोग झुलस गए। उन्हें सीएचसी सोनबरसा पहुंचाया गया। आक्रोशित कटान पीड़ितों ने एनएच-31 पर शव रख जाम कर दिया। सूचना पर पहुंची 100 नंबर पुलिस ने जाम समाप्त कराने का प्रयास किया। जिन्हें आक्रोशित लोगों ने भगा दिया। करीब पांच घंटे बाद एसडीएम बैरिया एके मिश्रा, सीओ बैरिया टीएन दुबे हमराहियों के साथ पहुंचे, जहां एसडीएम द्वारा मुआवजा देने के आश्वासन पर जामकर्ताओं ने जाम समाप्त किया। तत्पश्चात पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अंत्य परीक्षण के लिए भेज दिया।
इस वर्ष गंगा के कटान से बेघर होकर श्रीनगर हरिजन बस्ती के सैकड़ों लोग सुघर छपरा से दूबेछपरा तक झुग्गी झोपड़ी बंधे पर लगाकर जीवन यापन कर रहे थे। जहां बुधवार की दोपहर श्रीनगर निवासी ललन राम के मड़हे से अचानक आग की लपटें उठने लगी। अभी लोग कुछ कर पाते कि आग ने विकराल रूप धारण कर बगल के रामआशीष राम, अशोेक राम, ऋषिमुनि राम, टीपू राम, जनक राम, राजेश राम, मंडल राम के मड़हे को अपने आगोश में ले लिया। समान बचाने में रामआशीष व अशोक गंभीर रूप से झुलस गए। इसके अलावा ललन का सात माह का पुत्र भी आग से जलकर मर गया। इस दौरान मृतक की मां सरिता एक मासूम का इलाज कराने चिकित्सक के यहां गई थी। लल्लन के जुड़वा बच्चे थे। जिसमें से एक की तबीयत खराब थी। मासूम के मौत के बाद मां सरिता व पिता ललन बेसुध हो गए है। सूचना के घंटों बाद पहुुंचे फायर ब्रिगेड की गाड़ी को बैरंग लौटना पड़ा। हद तब हो गयी कि जब ग्रामीणों द्वारा एसडीएम से लगायत जिलाधिकारी तक को अगलगी की सूचना दी गई। लेकिन किसी भी अधिकारी ने वहां त्वरित पहुंचाना मुनासिब नहीं समझा। जिससे नाराज लोगों ने एनएच-31 को जाम कर दिया। करीब पांच घंटे बाद एसडीएम बैरिया पहुंचे और पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन दिया। जिसके बाद जामकर्ता जाम समाप्त किया। वहीं देर शाम तक एडीएम के निर्देश पर क्षेत्रीय लेखपाल ने पीड़ितों की सूची बनाकर तहसील प्रशासन को सौंपा ।
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इस वर्ष गंगा के कटान से बेघर होकर श्रीनगर हरिजन बस्ती के सैकड़ों लोग सुघर छपरा से दूबेछपरा तक झुग्गी झोपड़ी बंधे पर लगाकर जीवन यापन कर रहे थे। जहां बुधवार की दोपहर श्रीनगर निवासी ललन राम के मड़हे से अचानक आग की लपटें उठने लगी। अभी लोग कुछ कर पाते कि आग ने विकराल रूप धारण कर बगल के रामआशीष राम, अशोेक राम, ऋषिमुनि राम, टीपू राम, जनक राम, राजेश राम, मंडल राम के मड़हे को अपने आगोश में ले लिया। समान बचाने में रामआशीष व अशोक गंभीर रूप से झुलस गए। इसके अलावा ललन का सात माह का पुत्र भी आग से जलकर मर गया। इस दौरान मृतक की मां सरिता एक मासूम का इलाज कराने चिकित्सक के यहां गई थी। लल्लन के जुड़वा बच्चे थे। जिसमें से एक की तबीयत खराब थी। मासूम के मौत के बाद मां सरिता व पिता ललन बेसुध हो गए है। सूचना के घंटों बाद पहुुंचे फायर ब्रिगेड की गाड़ी को बैरंग लौटना पड़ा। हद तब हो गयी कि जब ग्रामीणों द्वारा एसडीएम से लगायत जिलाधिकारी तक को अगलगी की सूचना दी गई। लेकिन किसी भी अधिकारी ने वहां त्वरित पहुंचाना मुनासिब नहीं समझा। जिससे नाराज लोगों ने एनएच-31 को जाम कर दिया। करीब पांच घंटे बाद एसडीएम बैरिया पहुंचे और पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन दिया। जिसके बाद जामकर्ता जाम समाप्त किया। वहीं देर शाम तक एडीएम के निर्देश पर क्षेत्रीय लेखपाल ने पीड़ितों की सूची बनाकर तहसील प्रशासन को सौंपा ।
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