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UP: जातीय चक्रव्यूह में फंसी ये सीट... सपा और भाजपा ने लगाया अगड़े पर दांव तो बसपा ने भी खेला मास्टरस्ट्रोक
Sun, 28 Apr 2024 03:22 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 28 Apr 2024 03:22 PM IST
सार
यूपी की यह सीट जातीय चक्रव्यूह में फंस गई है। यहां सपा और भाजपा ने अगड़े प्रत्याशी पर दांव खेला है। बसपा ने ओबीसी कार्ड खेला है। इस बार यहां त्रिकोणीय संघर्ष के आसार हैं।
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UP Lok Sabha Election
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जैसे-जैसे धूप तीखी हो रही है चुनावी सरगर्मी भी बढ़ती जा रही है। राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है। प्रत्याशियों की भागदौड़ से चुनावी माहौल दिखने लगा है हालांकि अभी मतदाता खामोश हैं। ऐसे में प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।
बलिया और सलेमपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने अपना प्रत्याशी काफी पहले ही घोषित कर दिया था। पिछले दिनों सपा ने भी अपने उम्मीदवार के नाम का एलान कर दिया। सपा ने इस सीट पर जातीय समीकरण का पूरा ख्याल रखा है ताकि ऐसी किलेबंदी हो कि भाजपा काे हराया जा सके। मगर बहुजन समाज पार्टी सपा का खेल बिगाड़ने में लगी है।
सलेमपुर में बसपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राजभर बिरादरी के भीम राजभर को मैदान में उतारकर इसका संकेत भी दिया है। यहां सपा ने भी राजभर बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले पूर्व सांसद रमाशंकर राजभर पर दांव लगाया है।
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सपा 14 फीसदी राजभर मतदाताओं के साथ ही करीब 13 फीसदी अल्पसंख्यक और यादव वोटरों के सहारे भाजपा के उम्मीदवार सांसद रविंद्र कुशवाहा की हैट्रिक रोकने तैयारी में थी, लेकिन बसपा ने भी राजभर बिरादरी का उम्मीदवार मैदान में उतारकर सपा की राह में रोड़े अटकाने का काम किया है। बता दें कि सलेमपुर लोकसभा सीट में गरीब 15% दलित मतदाता है, जो निर्णायक स्थिति में रहते हैं।
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बलिया और सलेमपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने अपना प्रत्याशी काफी पहले ही घोषित कर दिया था। पिछले दिनों सपा ने भी अपने उम्मीदवार के नाम का एलान कर दिया। सपा ने इस सीट पर जातीय समीकरण का पूरा ख्याल रखा है ताकि ऐसी किलेबंदी हो कि भाजपा काे हराया जा सके। मगर बहुजन समाज पार्टी सपा का खेल बिगाड़ने में लगी है।
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सलेमपुर में बसपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राजभर बिरादरी के भीम राजभर को मैदान में उतारकर इसका संकेत भी दिया है। यहां सपा ने भी राजभर बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले पूर्व सांसद रमाशंकर राजभर पर दांव लगाया है।
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सपा 14 फीसदी राजभर मतदाताओं के साथ ही करीब 13 फीसदी अल्पसंख्यक और यादव वोटरों के सहारे भाजपा के उम्मीदवार सांसद रविंद्र कुशवाहा की हैट्रिक रोकने तैयारी में थी, लेकिन बसपा ने भी राजभर बिरादरी का उम्मीदवार मैदान में उतारकर सपा की राह में रोड़े अटकाने का काम किया है। बता दें कि सलेमपुर लोकसभा सीट में गरीब 15% दलित मतदाता है, जो निर्णायक स्थिति में रहते हैं।
ऐसी ही स्थिति बलिया लोकसभा सीट पर भी है। यहां भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को उम्मीदवार बनाकर जीत की हैट्रिक लगाने की जुगत में जुटी है। वहीं, सपा ने ब्राह्मण बिरादरी के सनातन पांडेय को उम्मीदवार बनाकर ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम मतों के सहारे भाजपा के विजय रथ को रोकने की कोशिश में है।
लेकिन यहां भी उसकी राह में बसपा खड़ी है। बसपा ने बलिया लोकसभा सीट से गाजीपुर के पूर्व सैनिक लल्लन सिंह यादव को उम्मीदवार बनाकर सपा के परंपरागत यादव मतदाताओं को अपने पाले में करने का दांव चला है।
बसपा का वार सहना आसान नहीं
बलिया में बसपा का भी जनाधार है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी दूसरे नंबर पर थी। वर्ष 2014 के चुनाव में वह खिसककर तीसरे नंबर पर चली और 2019 में सपा-बसपा गठबंधन के चलते बसपा ने यहां चुनाव नहीं लड़ा था। ऐसे में सपा और भाजपा का समीकरण बिगाड़ने में बसपा का अहम रोल रहेगा। ऊपर से पार्टी ने जातिगत आधार पर उम्मीदवार का चयन कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
बलिया में बसपा का भी जनाधार है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी दूसरे नंबर पर थी। वर्ष 2014 के चुनाव में वह खिसककर तीसरे नंबर पर चली और 2019 में सपा-बसपा गठबंधन के चलते बसपा ने यहां चुनाव नहीं लड़ा था। ऐसे में सपा और भाजपा का समीकरण बिगाड़ने में बसपा का अहम रोल रहेगा। ऊपर से पार्टी ने जातिगत आधार पर उम्मीदवार का चयन कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
पिछड़ी बिरादरी का दबदबा
सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में पिछड़ी बिरादरी का दबदबा है। एक अनुमान के मुताबिक यहां कुर्मी, मौर्य, कुशवाहा समाज के 18 फीसदी मतदाता हैं जबकि राजभर 14 और यादव 13 फीसदी हैं। यह तिकड़ी जब मिलती है तो सियासी समीकरण बदल जाते हैं। इसके अलावा ब्राह्मण 15, अनुसूचित जाति 15, अल्पसंख्यक 13 और क्षत्रिय 4 फीसदी हैं। साथ ही वैश्य व निषाद बिरादरी के चार फीसदी मतदाता हैं।
सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में पिछड़ी बिरादरी का दबदबा है। एक अनुमान के मुताबिक यहां कुर्मी, मौर्य, कुशवाहा समाज के 18 फीसदी मतदाता हैं जबकि राजभर 14 और यादव 13 फीसदी हैं। यह तिकड़ी जब मिलती है तो सियासी समीकरण बदल जाते हैं। इसके अलावा ब्राह्मण 15, अनुसूचित जाति 15, अल्पसंख्यक 13 और क्षत्रिय 4 फीसदी हैं। साथ ही वैश्य व निषाद बिरादरी के चार फीसदी मतदाता हैं।
भितरघात से बचना होगा
सलेमपुर में भाजपा से रविंद्र कुशवाहा दो बार सांसद रह चुके हैं। उन्हें तीसरी बार टिकट मिला है। लेकिन भाजपा में एक ऐसा वर्ग भी है, जो अंदरखाने उनकी उम्मीदवारी का विरोध कर जिले में अपनी सत्ता काबिज रखना चाहता ह। ऐसे में भितरघात रोकना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी।
सलेमपुर में भाजपा से रविंद्र कुशवाहा दो बार सांसद रह चुके हैं। उन्हें तीसरी बार टिकट मिला है। लेकिन भाजपा में एक ऐसा वर्ग भी है, जो अंदरखाने उनकी उम्मीदवारी का विरोध कर जिले में अपनी सत्ता काबिज रखना चाहता ह। ऐसे में भितरघात रोकना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी।
बलिया सीट का जातीय समीकरण
ब्राह्मण- 15 फीसदी
राजपूत- 13 फीसदी
भूमिहार- 8 फीसदी
यादव- 12 फीसदी
बौद्ध- 0.07 फीसदी
ईसाई- 0.14 फीसदी
जैन- 0.01 फीसदी
मुसलमान- 8.03 फीसदी
अनुसूचित जाति- 15.5 फीसदी
अनुसूचित जनजाति- 2.6 फीसदी
सिख- 0.03 फीसदी
अन्य-18 फीसदी
ब्राह्मण- 15 फीसदी
राजपूत- 13 फीसदी
भूमिहार- 8 फीसदी
यादव- 12 फीसदी
बौद्ध- 0.07 फीसदी
ईसाई- 0.14 फीसदी
जैन- 0.01 फीसदी
मुसलमान- 8.03 फीसदी
अनुसूचित जाति- 15.5 फीसदी
अनुसूचित जनजाति- 2.6 फीसदी
सिख- 0.03 फीसदी
अन्य-18 फीसदी
बलिया सीट पर मतदाता
कुल वोटर : 19,12,864
पुरुष मतदाता : 10,26,474
महिला मतदाता : 8,86,316
थर्ड जेंडर मतदाता : 74
पुरुष मतदाता : 10,26,474
महिला मतदाता : 8,86,316
थर्ड जेंडर मतदाता : 74
सलेमपुर सीट पर मतदाता
कुल मतदाता : 17,61,652
पुरुष मतदाता : 9,37,162
महिला मतदाता : 8,24,490
थर्ड जेंडर मतदाता : 69
पुरुष मतदाता : 9,37,162
महिला मतदाता : 8,24,490
थर्ड जेंडर मतदाता : 69