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पसंदीदा मौसम है ये मच्छरों का...इस बार और ज्यादा

Sun, 20 Feb 2022 11:28 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 20 Feb 2022 11:28 PM IST
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This is the favorite season for mosquitoes...more this time
बलिया। ठंड की विदाई के साथ शहर में मच्छरों की फौज हमले के लिए तैयार होने लगी है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल जनवरी के बाद बदला मौसम मच्छरों की वंशवृद्धि के अनुकूल रहा है। जलभराव और गंदगी से मच्छरों के पनपने में मदद मिलेगी। इस बार भीषण गर्मी होने तक मच्छर ज्यादा सताएंगे। मच्छरों का प्रकोप शुरू हैं और नगर निकाय के साथ ही ग्राम पंचायतों की ओर से अभी छिड़काव की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इससे परेशानी बढ़ती जा रही है।
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टीडी कॉलेज के जंतु विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. दयालानंद राय का कहना है कि तेज लू चलने तक इस बार मच्छरों की मौजूदगी रहेगी। क्योंकि जनवरी और फरवरी में हुई बारिश से हवा में खासी नमी है। लिहाजा लंबे समय तक मच्छरों के लार्वा को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिलता रहेगा। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुनील यादव बताते है कि मच्छरों का इस बार अभी से हमला शुरू होने पर मलेरिया विभाग ने जिला स्वास्थ्य समिति की आगामी बैठक में रखने के लिए मच्छरजनित रोगों की रोकथाम का एक्शन प्लान बनाना शुरू कर दिया है। जिला मलेरिया अधिकारी बताते है कि मच्छर 22 से 30 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर पनपते हैं। बलिया में अब तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज होने लगा है। तापमान के 35 डिग्री सेल्सियस पहुंचने तक मच्छरों को पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना रहता है। बारिश और लंबे समय तक ठंड बने रहने से इस बार तापमान के 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुचन में काफी वक्त लगेगा। मई के अंतिम सप्ताह अथवा जून में ही तापमान अधिक होने के बाद मच्छरों से निजात मिलने की उम्मीद है।
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गर्भवती महिलाओं और शराबियों को ज्यादा काटते हैं मच्छर
घरों के आसपास पेड़-पौधों पर रहने वाले मच्छर नहीं काटते हैं, क्योंकि ये नर मच्छर होते हैं। जो पेड़-पौधों की पत्तियों का रस चूसकर पलते हैं। केवल मादा मच्छर काटतीं हैं। यह सिर्फ खून चूसते हैं, इसलिए इनका ठिकाना घरों के कोनों बेड के नीचे या ऐसे ही छिपने के स्थानों पर रहता है। जहां कार्बन डाईऑक्साइड (सीओ-2) गैस होती है, वहीं मच्छरों का प्रकोप होता है। पेड़ सीओ-2 गैस छोड़ हैं, इसलिए शाम को पेड़ों के आसपास मच्छरों का झुंड रहता है। शरीर के तापमान और महक से भी मच्छर समीप आते हैं। गर्भवती महिलाओं और शराबियों को मच्छर अधिक काटते हैं।
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कीटनाशक में मिलावट की आशंका
नगर पालिका हर साल स्वास्थ्य विभाग की सहभागिता से मार्च से जून और अक्तूबर से नवंबर तक हजारों रुपये के कीटनाशक का मच्छरों का सफाया करने के नाम पर छिड़काव करता है। लेकिन, लोगों का आरोप है कि कीटनाशक में जो केमिकल होता है, उसकी हल्की मात्रा में ही कीड़ों को मारने की क्षमता होती है। अगर मिलावट होगी तो मच्छर मरेंगे नहीं बल्कि इनके संपर्क में आकर एंटीबॉडी विकसित कर लेते हैं फिर इन पर कीटनाशकों का असर नहीं होता है। जिला अस्पताल के डॉक्टर एके स्वर्णकार के मुताबिक परजीवी या बैक्टीरिया को मारने के लिए जो दवा दी जाती हैं, उसके बाद पनपे परजीवी में दवा सहने के लिए एंटीबॉडी बन जाती है। किसी भी मच्छररोधी क्वाइल, लिक्विड या कार्ड का उपयोग करने के पांच घंटे बाद ही मच्छर फिर डंक मारना शुरू कर देते हैं।
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कीटनाशक के बजाय नीम की पत्तियों का धुआं करें
घर के आसपास पानी जमा न होने दें। गंदगी बिल्कुल न रखें। नालियों को ढंक दें। मच्छरदानी लगाकर सोएं। नालियों में केरोसिन या सरसों का तेल डालें। परफ्यूम कम लगाएं पूरी बांह के कपड़े पहनें, कम रोशनी करें। एंटी लार्वा का छिड़काव करना क्यूलेक्स, एनाफिलीज, एडीज मच्छरों के हमले से बचा सकता है। नीम की पत्तियों को जलाकर धुआं करने से भी मच्छर और अन्य कीट समाप्त हो जाते हैं।

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मच्छरजनित रोग और उनके लक्षण
मच्छरों के काटने के बाद सर्दी लगना, बुखार आना, उल्टियां, थकावट, कमजोरी, सिरदर्द, बदन दर्द, हाथ पैर में ऐंठन आदि लक्षण प्रकट होते हैं। मच्छरों के काटने से फाइलेरिया, जापानी इंसेफेलाइटिस, डेंगू, चिकनगुनिया, जीका आदि रोग हो सकते हैं। इन रोगों से ग्रसित व्यक्ति को काटने के बाद वही मच्छर अगर दूसरे व्यक्ति को काट ले तो वह भी संक्रमित हो जाता है।
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