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बढ़ा डेंगू का असर तो चढ़ा मच्छर अगरबत्ती का बाजार

Fri, 18 Nov 2022 11:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2022 11:00 PM IST
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The effect of dengue increased, the market of mosquito incense sticks increased
बलिया। डेंगू के बुखार का प्रभाव बढ़ते ही लोग इससे बचने के उपाय करने लगे हैं। मच्छरों के प्रकोप को कम करने के लिए मच्छर अगरबत्ती सहित अन्य उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ने से इनके बाजार में तेजी आ गई है। केवल शहर में ही प्रति माह मच्छरों को मारने वाले उत्पादों की बिक्री 40 से 50 लाख रुपये तक हो रही है। इस तरह लोगों को औसतन प्रतिदिन 5-10 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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जिले में वर्तमान में डेंगू के 161 केस सामने आ चुके हैं। एक तरफ स्वास्थ्य विभाग बीमारों के इलाज के इंतजाम में जुटा है तो दूसरी ओर मच्छरों से बचाव में प्रयोग होने वाली अगरबत्ती, क्वाइल, लिक्विड आदि का कारोबार बढ़ गया है। इन उत्पादों का कारोबार तीन से चार गुना बढ़ा है। इसकी वजह से इस धंधे से जुड़े लोग भी हैरत में हैं। इन उत्पादों को बेचने वाले डीलर और वितरकों की मानें तो लोग मच्छरों को मारने वाले उत्पादों को खरीदने में एक माह में एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रहे हैं।
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मनियर कस्बे के कारोबारी रजनीश ने बताया कि मच्छरों से बचाव में प्रयोग होने वाली अगरबत्ती की बिक्री तीन माह पहले दो लाख रुपये थी, जो अब बढ़कर प्रतिमाह आठ लाख रुपये से अधिक की हो गई है। अगरबत्ती वाराणसी, कानपुर आदि शहरों से मंगाई जाती है। अक्तूबर से पहले दो-तीन गत्ता लिक्विड और आठ दस गत्ता क्वायल बिक जाता था। मगर इन दिनों इनकी बिक्री में काफी तेजी आ गई है। बताया कि अब एक माह में लिक्विड के 12 गत्ते से अधिक बिक जा रहे हैं। एक गत्ते की कीमत 12 हजार रुपये है। वहीं, क्वायल की बिक्री 70-80 गत्ते की है। इसके एक गत्ते की कीमत 800 रुपये है। बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के चंद्रपुरा गांव निवासी अरुण सिंह ने बताया कि पहले प्रतिदिन दो से तीन रुपये खर्च होते थे, अब मच्छरों से बचने के लिए आठ से नौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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मच्छरदानी की बिक्री 10 प्रतिशत बढ़ी
शहर के रहने वाले मच्छरदानी विक्रेता विजय गुप्ता ने बताया कि इधर मच्छरदानी की बिक्री 10 प्रतिशत तक बढ़ गई है। हालांकि, मूल्य में इजाफा नहीं हुआ है। सिंगल बेड मच्छरदानी की कीमत 150 रुपये के करीब है। डबल बेड को मच्छरदानी 225 रुपये में बिक रही है।
स्वास्थ्य विभाग और पालिका की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका प्रशासन अगर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक ढंग से करें तो मच्छरों का प्रकोप कम हो जाए। मच्छरों पर नियंत्रण के लिए बेहतर ढंग से छिड़काव और साफ सफाई की जरूरत होती है। ऐसा नहीं होने पर मच्छर पनपते हैं। लोग बीमार होते हैं और अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ता है। वहीं, जनता को दवाई और इलाज पर खर्च करना पड़ता है। इसके अलावा मच्छरों से बचाव के लिए भी लोगों को अधिक खर्च करना पड़ता है।
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी सत्य प्रकाश सिंह ने बताया कि नगर पालिका क्षेत्र में मच्छरों के प्रभाव को कम करने के लिए हर माह करीब दो लाख 50 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं। नगर क्षेत्र में नालियों की सफाई के लिए कर्मचारियों की टीम लगी है। प्रत्येक दिन सफाई कराई जाती है। लोगों से अपील है कि नगर को स्वच्छ रखें।

जिला मलेरिया अधिकारी सुनील यादव ने बताया कि कूलर, गमलों और टूटे-फूटे प्लास्टिक के बर्तनों में पानी एकत्रित होने, नाली को बेहतर ढंग से सफाई नहीं होने के कारण मच्छर ज्यादा होते हैं। घरों में फ्रीज के पीछे पानी को फेंकते रहना चाहिए। घर के आसपास गड्डों में पानी न रुकने दें। इस पर ध्यान देने से मच्छर कम होंगे।
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