बलिया : प्रश्नपत्र लीक करने वाले स्कूल को डीएम की समिति ने ही बनाया था परीक्षा केंद्र
यूपी बोर्ड अंग्रेजी के प्रश्नपत्र लीक मामले में बलिया जिले के अधिकारियों की भूमिका हर कदम पर संदिग्ध दिख रही है। माध्यमिक शिक्षा परिषद से तय केंद्रों में से 10 केंद्र बाद में जिला स्तरीय समिति की संस्तुति पर बदले गए।
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इंटरमीडिएट अंग्रेजी के प्रश्नपत्र लीक मामले में शामिल डीआरआर उच्च माध्यमिक विद्यालय, औराई खुर्द को जिला मजिस्ट्रेट की अगुवाई वाली समिति ने ही परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश की थी। इस केंद्र की प्रबंधक कुसुम सिंह, उनके पति रवीन्द्रनाथ सिंह, प्रधानाचार्य व केंद्र व्यवस्थापक रीना भारती और बाह्य केंद्र व्यवस्थापक जगदीश सिंह अब गिरफ्तार हैं। दरअसल, बोर्ड परीक्षा आयोजन में अधिकारियों की भूमिका हर कदम पर संदिग्ध दिख रही है। माध्यमिक शिक्षा परिषद से तय केंद्रों में से 10 केंद्र बाद में जिला स्तरीय समिति की संस्तुति पर बदले गए।
डीएम इस समिति के अध्यक्ष हैं। समिति की ओर से प्रस्तावित अधिकांश केंद्र वित्तविहीन स्कूल हैं। शिक्षा परिषद ने 211 स्कूल तय किए थे। समिति ने इन केंद्रों में से सत्यापन के नाम पर 22 केंद्र बदल दिए और नए स्कूलों के प्रस्ताव भेजकर उन्हें भी केंद्र बना दिया गया।
तीन वाह्य केंद्र प्रभारी होंगे निलंबित
पेपर लीक होने के बाद जागे प्रशासन ने तीन संदिग्ध वाह्य केंद्र व्यवस्थापकों के निलंबन की संस्तुति की है। इनमें सहायक अध्यापक विनीत कुमार सुदर्शन कृषि उमावि के सहायक अध्यापक जगदीश सिंह और गोपाल कृष्ण श्रीवास्तव शामिल हैं।
पत्रकारों के समर्थन में उतरी सपा, राज्यपाल को भेजा ज्ञापन
पेपर लीक मामले में बलिया के पत्रकारों पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के मुद्दे पर बुधवार को जिले की समाजवादी पार्टी भी सड़क पर उतर कर विरोध प्रगट किया और जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी को दिया।
जिसमें उल्लेख किया है कि जनपद के पत्रकारों ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए परीक्षा के पेपर आउट की सूचना प्रकाषित किया था। जिस पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया गया जो सरासर गलत है। इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
बैठक को संबोधित करते हुए उत्तर पर सरकार के पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार को लोकतंत्र तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में कोई विश्वास नहीं है। पूंजीपतियों के इशारे पर खेलने वाली सरकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की जुबान को पुलिस और प्रशासन के बल पर बंद कराकर लोकतंत्र को पंगु बनाना चाहती हैं। जिसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परीक्षा लीक मामले में अपनी नाकामियों को ढ़कने के लिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर कार्यवाही करना घोर निंदनीय है।
डीएम-एसपी को निलंबित करने की उठी मांग
पेपर लीक मामले में फंसाए गए तीन पत्रकारों की रिहाई की मांग को लेकर बुधवार को संयुक्त पत्रकार संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जिले के पत्रकार, छात्र नेताओं और व्यापारी नगर के शहीद चौक के सामने धरना दिया तथा हस्ताक्षर अभियान चलाया। उन्होंने डीएम व एसपी को निलंबित करने की मांग की।
संकल्प संस्था के कलाकारों ने रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी के नेतृत्व में गीत प्रस्तुत किया। मनोज चतुर्वेदी ने कहा कि जिला प्रशासन अपनी कारगुजारी को छुपाने के लिए हमारे तीन साथियों पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने का काम किया। जिसे कत्तई बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
अखिलानंद तिवारी ने कहा कि जिलाधिकारी को पूरे जनपद के कालेजों की लिस्ट है कि कौन कैसा कालेज है। बावजूद उन ब्लैकलिस्टेड कालेजों को परीक्षा केंद्र बनाने का काम किया और जब पत्रकारों ने उसे उजागर करने का काम किया तो उन्हें सलाखों में डाल दिया गया।
करूण सिंधु सिंह ने कहा कि बलिया के डीएम ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए बिना मुकदमा दर्ज किए पत्रकारों को गिरफ्तार कर जेल भेजने का काम किया। डीएम ने कहा कि बलिया में पर्चा नहीं खुला तो फिर पत्रकार की गिरफ्तारी किस आधार पर किया। नरेंद्र मिश्र ने कहा कि डीएम साहब ने तीन थानों में मुकदमा दर्ज कराकर पत्रकारों पर दबाव बनाना चाहा।