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Ballia News: जिला अस्पताल की आरटीपीसीआर मशीन कोरोना के बाद से बंद, स्वाइन फ्लू की जांच नहीं होती
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जिला अस्पताल के ओपीडी में मरीजों का उपचार करते चिकित्सक।संवाद
बलिया। जिले में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में बेड आरक्षित कर आइसोलेशन वार्ड तैयार किए हैं, लेकिन संक्रमण की पुष्टि के लिए जांच व्यवस्था अब भी कमजोर है।
जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर मशीन तो लगी है, लेकिन कोरोना काल के बाद से इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। वर्तमान में मशीन से हेपेटाइटिस की जांच किए जाने की बात कही जा रही है। वहीं, जिले के सीएचसी और पीएचसी पर स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में कमरा नंबर दो व 24 को फ्लू वार्ड बनाया गया है।
जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जांच किट और जरूरी सामग्री के अभाव में अभी नियमित सैंपलिंग नहीं हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एच1एन1 की आरटीपीसीआर जांच के लिए किट मंगाई गई है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 50 से 60 मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं, जिनमें स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, लक्षण होने मात्र से संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती।
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पूर्वांचल में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। आजमगढ़ और बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में पूर्वांचल के करीब 10 संक्रमित मरीजों का इलाज चलने की जानकारी है। बलिया में दो मरीज थे, लेकिन वह लखनऊ में रहते हैं। ऐसे में जिले में संभावित संक्रमण की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए जांच जरूरी हो गई है।
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पशुहारी गांव में तीन महिलाओं की मौत के बाद जागा विभाग
दो दिन पूर्व बेल्थरारोड क्षेत्र के पशुहारी गांव निवासी शिवचंद और उनके बेटे मनन को बीमारी के लक्षणों के चलते जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था। दोनों की खून से संबंधित कई जांचें हुईं। चिकित्सकीय परीक्षण में स्वाइन फ्लू के स्पष्ट लक्षण नहीं मिलने के कारण उनका सैंपल एच1एन1 जांच के लिए नहीं लिया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को स्वाइन फ्लू के लक्षणों पर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन जांच सुविधा के अभाव में संभावित मामलों की पहचान और संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन चुनौती बना हुआ है।
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अलर्ट के 60 फीसदी फ्लू के बढ़े मरीज
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के अलर्ट के बीच उमस भरी गर्मी व बारिश के बीच जिले में सर्दी-जुकाम, गले में खराश, खांसी, तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर व जोड़ों में दर्द की शिकायत वाले (फ्लू) मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जिला अस्पताल में विगत एक सप्ताह से 20 फीसदी से अधिक मरीज बढ़े है, ओपीडी में पहुंचने वाले करीब 60 फीसदी से अधिक मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। प्रदेश के 57 जिलों में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1 एन1) स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है।
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फ्लू के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
स्वाइन फ्लू में बुखार या ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर व मांसपेशियों में दर्द तथा थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। हर मरीज में बुखार होना जरूरी नहीं है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है।
फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ से बचें, खांसते या छींकते समय नाक-मुंह ढंकें और हाथों को साबुन से नियमित धोते रहें। बीमार होने पर घर पर रहें और दूसरों से दूरी बनाए रखें। घर से निकले तो मास्क का इस्तेमाल करें। सांस लेने में परेशानी, सीने में लगातार दर्द या दबाव, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति अथवा ठीक होने के बाद दोबारा तबीयत बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
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जिला अस्पताल में फ्लू ओपीडी का संचालन हो रहा है। लक्षण वाले मरीजों की निगरानी की जा रही है। अस्पताल के इमरजेंसी के ऊपर 12 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, जहां अब तक 10 से अधिक मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा चुका है। अभी उस प्रकार के मरीज मिले नहीं है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है। आरटीपीसीआर लैब जल्द ही चालू होगी। जांच की सुविधा मिलेगी। डॉक्टर अभय नारायण राय, सीमएओ-बलिया
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जिला अस्पताल में दो फ्लू ओपीडी का संचालन किया जा रहा है। अभी किसी मरीज में स्वाइन फ्लू का लक्षण नहीं मिला, जिसके कारण सैम्पलिंग कराई जाए। दो दिन के अंदर अस्पताल के आरटीपीसीआर में जांच की सुविधा मिलने लगेगी।-- -डॉक्टर एसके यादव, सीएमएस जिला अस्पताल ।
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जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर मशीन तो लगी है, लेकिन कोरोना काल के बाद से इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। वर्तमान में मशीन से हेपेटाइटिस की जांच किए जाने की बात कही जा रही है। वहीं, जिले के सीएचसी और पीएचसी पर स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में कमरा नंबर दो व 24 को फ्लू वार्ड बनाया गया है।
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जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जांच किट और जरूरी सामग्री के अभाव में अभी नियमित सैंपलिंग नहीं हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एच1एन1 की आरटीपीसीआर जांच के लिए किट मंगाई गई है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 50 से 60 मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं, जिनमें स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, लक्षण होने मात्र से संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती।
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पूर्वांचल में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। आजमगढ़ और बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में पूर्वांचल के करीब 10 संक्रमित मरीजों का इलाज चलने की जानकारी है। बलिया में दो मरीज थे, लेकिन वह लखनऊ में रहते हैं। ऐसे में जिले में संभावित संक्रमण की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए जांच जरूरी हो गई है।
पशुहारी गांव में तीन महिलाओं की मौत के बाद जागा विभाग
दो दिन पूर्व बेल्थरारोड क्षेत्र के पशुहारी गांव निवासी शिवचंद और उनके बेटे मनन को बीमारी के लक्षणों के चलते जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था। दोनों की खून से संबंधित कई जांचें हुईं। चिकित्सकीय परीक्षण में स्वाइन फ्लू के स्पष्ट लक्षण नहीं मिलने के कारण उनका सैंपल एच1एन1 जांच के लिए नहीं लिया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को स्वाइन फ्लू के लक्षणों पर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन जांच सुविधा के अभाव में संभावित मामलों की पहचान और संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन चुनौती बना हुआ है।
अलर्ट के 60 फीसदी फ्लू के बढ़े मरीज
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के अलर्ट के बीच उमस भरी गर्मी व बारिश के बीच जिले में सर्दी-जुकाम, गले में खराश, खांसी, तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर व जोड़ों में दर्द की शिकायत वाले (फ्लू) मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जिला अस्पताल में विगत एक सप्ताह से 20 फीसदी से अधिक मरीज बढ़े है, ओपीडी में पहुंचने वाले करीब 60 फीसदी से अधिक मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। प्रदेश के 57 जिलों में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1 एन1) स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है।
फ्लू के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
स्वाइन फ्लू में बुखार या ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर व मांसपेशियों में दर्द तथा थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। हर मरीज में बुखार होना जरूरी नहीं है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है।
फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ से बचें, खांसते या छींकते समय नाक-मुंह ढंकें और हाथों को साबुन से नियमित धोते रहें। बीमार होने पर घर पर रहें और दूसरों से दूरी बनाए रखें। घर से निकले तो मास्क का इस्तेमाल करें। सांस लेने में परेशानी, सीने में लगातार दर्द या दबाव, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति अथवा ठीक होने के बाद दोबारा तबीयत बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
जिला अस्पताल में फ्लू ओपीडी का संचालन हो रहा है। लक्षण वाले मरीजों की निगरानी की जा रही है। अस्पताल के इमरजेंसी के ऊपर 12 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, जहां अब तक 10 से अधिक मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा चुका है। अभी उस प्रकार के मरीज मिले नहीं है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है। आरटीपीसीआर लैब जल्द ही चालू होगी। जांच की सुविधा मिलेगी। डॉक्टर अभय नारायण राय, सीमएओ-बलिया
जिला अस्पताल में दो फ्लू ओपीडी का संचालन किया जा रहा है। अभी किसी मरीज में स्वाइन फ्लू का लक्षण नहीं मिला, जिसके कारण सैम्पलिंग कराई जाए। दो दिन के अंदर अस्पताल के आरटीपीसीआर में जांच की सुविधा मिलने लगेगी।