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विधान परिषद चुनाव के लिए बिछने लगी बिसात
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बलिया। विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद अब सभी दल विधान परिषद चुनाव के लिए बिसात बिछाने में जुट गए हैं। प्रदेश की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के बाद भाजपा एमएलसी चुनाव में दमदारी से ताल ठोकेगी तो सपा भी पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में जुटी है। दोनों दलों के प्रत्याशियों के चयन पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
इस बीच तेजी से चर्चा चल रही है कि बीते वर्ष भाजपा में शामिल हुए एमएलसी रविशंकर सिंह पप्पू पर पार्टी दांव लगा सकती है। हालांकि कुछ अन्य चेहरे भी पार्टी में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष जय प्रकाश साहू ने इसे कयासबाजी बताया और कहा कि आने वाले दो से चार दिन के अंदर पार्टी उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया गया। वहीं, समाजवादी पार्टी भी नए चेहरों को प्रत्याशी बनाने की कवायद में जुटी है। पार्टी में ऐसे चेहरे की तलाश तेज हो गई है, जिन्हें एमएलसी चुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सके। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वाले प्रत्याशियों को भी विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवारों बनाने की संभावनाओं को टटोला जा रहा है। सपा के जिलाध्यक्ष राजमंगल यादव ने कहा कि एमएलसी चुनाव को लेकर पार्टी हाई कमान शीघ्र ही निर्णय करेगा।
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एक-दूसरे को पछाड़ने की लगी होड़
विधान परिषद के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए कमर कस ली है। दोनों ही दल उच्च सदन में अपना दबदबा कायम करने के लिए अधिक से अधिक सीटें जीतने के प्रयास में लगे हैं। विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका होगा जब भाजपा की दोबारा सरकार बनने के साथ ही विधान परिषद में भी उसे बहुमत मिल सकता है। हालांकि भाजपा के लिए यह सुनहरा अवसर है कि विधान सभा चुनाव में हार का सामना करने वाले अपने दिग्गज नेताओं को विधान परिषद चुनाव के जरिए उच्च सदन भेज सकती है।
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इस बीच तेजी से चर्चा चल रही है कि बीते वर्ष भाजपा में शामिल हुए एमएलसी रविशंकर सिंह पप्पू पर पार्टी दांव लगा सकती है। हालांकि कुछ अन्य चेहरे भी पार्टी में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष जय प्रकाश साहू ने इसे कयासबाजी बताया और कहा कि आने वाले दो से चार दिन के अंदर पार्टी उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया गया। वहीं, समाजवादी पार्टी भी नए चेहरों को प्रत्याशी बनाने की कवायद में जुटी है। पार्टी में ऐसे चेहरे की तलाश तेज हो गई है, जिन्हें एमएलसी चुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सके। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वाले प्रत्याशियों को भी विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवारों बनाने की संभावनाओं को टटोला जा रहा है। सपा के जिलाध्यक्ष राजमंगल यादव ने कहा कि एमएलसी चुनाव को लेकर पार्टी हाई कमान शीघ्र ही निर्णय करेगा।
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एक-दूसरे को पछाड़ने की लगी होड़
विधान परिषद के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए कमर कस ली है। दोनों ही दल उच्च सदन में अपना दबदबा कायम करने के लिए अधिक से अधिक सीटें जीतने के प्रयास में लगे हैं। विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका होगा जब भाजपा की दोबारा सरकार बनने के साथ ही विधान परिषद में भी उसे बहुमत मिल सकता है। हालांकि भाजपा के लिए यह सुनहरा अवसर है कि विधान सभा चुनाव में हार का सामना करने वाले अपने दिग्गज नेताओं को विधान परिषद चुनाव के जरिए उच्च सदन भेज सकती है।
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