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आंगनबाड़ी केंद्र में चल रहा था टेंट हाउस, खाली कराया
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भीमपुरा। नौनिहालों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए शासन की ओर से बनाए गए आंगनबाड़ी केंद्र में कहीं टेंट हाऊस की दुकान संचालित हो रही है तो कहीं आंगनबाड़ी केंद्र की नींव रखकर ही विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से पैसे हजम कर लिए गए। आलम यह है कि केंद्र के अभाव में आंगनबाड़ी कार्यकत्री प्राथमिक विद्यालयों पर जाकर कार्य कर रही है। मीडिया की ओर से मामला संज्ञान में लाने के बाद बृहस्पतिवार को पहुंची सुपरवाइजर ने आंगनबाड़ी केंद्र को खाली कराते हुए केंद्र की कार्यकत्री को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
शासन ने कान्वेंट स्कूलो के तर्ज पर प्राथमिक विद्यालयों में भी प्ले ग्रुप की कक्षाएं चलाने का जिम्मा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सौंपा है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते सरकार की महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। केंद्रों की पड़ताल की गई की तो चौंका देने वाला सच सामने आया। विकास खंड सीयर के ग्राम पंचायत कंधरापुर में पांच साल पूर्व बना आंगनबाड़ी केंद्र में टेन्ट हाउस की दुकान संचालित हो रही थी। इस संबंध में गांव के आंगनबाड़ी कार्यकत्री विभा पांडेय से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि केंद्र को आज तक विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है। केंद्र चार-पांच वर्ष पहले ही बनकर तैयार हो गया है। किसी ने टेंट हाउस का पूरा सामान कर कर बाहर से इस पर ताला लटका दिया है। इस बारे में सीडीपीओ सरस्वती शाक्या को जानकारी दी गई थी तो उन्होंने जांच की बात कही थी। भवन का रखरखाव न होने के कारण खिड़की,शौचालय का दरवाजा, स्लैप, हैण्डपम्प आदि जर्जर स्थिति में हो गया है। साथ ही उसी में टेन्ट हाउस का समान रखा गया था। बृहस्पतिवारर को जांच करने पहुंची मुख्य सेविका गीता देवी ने सच देखा तो भौचक रह गईं। इसके बाद दुकानदार को बुलाकर टेंट हाउस के समान को बाहर निकलवाया। अपना ताला लगाकर केंद्र की कार्यकत्री को चाबी सौंपी। केंद्र का संचालन नियमानुसार करने का दिशा निर्देश दिया। साथ केंद्र की जर्जर व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए विभाग को पत्र के माध्यम से अवगत भी कराया।
उधर, प्राथमिक विद्यालय सैदपुरा में परिसर में कई वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र की नीव जोड़कर छोड़ दी गई है।कार्यकत्री द्वारा प्राथमिक विद्यालय के एकल कक्ष में केंद्र संचालित किया जाता है। यह भी देखने को मिला कि उपस्थिति पंजिका में पंजीकृत बच्चों की संख्या कुछ और है, धरातल पर कुछ और। ऐसे में शासन द्वारा नौनिहालों का भविष्य संवारने का सपना कहा तक सच साबित हो सकता है, जब आगनबाड़ी केंद्र में नौनिहालों की नर्सरी की जगह टेंट हाउस की दुकान चल रही हो। इससे आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि विभाग अपने कर्तव्यों के प्रति कितना जागरूक है।
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शासन ने कान्वेंट स्कूलो के तर्ज पर प्राथमिक विद्यालयों में भी प्ले ग्रुप की कक्षाएं चलाने का जिम्मा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सौंपा है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते सरकार की महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। केंद्रों की पड़ताल की गई की तो चौंका देने वाला सच सामने आया। विकास खंड सीयर के ग्राम पंचायत कंधरापुर में पांच साल पूर्व बना आंगनबाड़ी केंद्र में टेन्ट हाउस की दुकान संचालित हो रही थी। इस संबंध में गांव के आंगनबाड़ी कार्यकत्री विभा पांडेय से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि केंद्र को आज तक विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है। केंद्र चार-पांच वर्ष पहले ही बनकर तैयार हो गया है। किसी ने टेंट हाउस का पूरा सामान कर कर बाहर से इस पर ताला लटका दिया है। इस बारे में सीडीपीओ सरस्वती शाक्या को जानकारी दी गई थी तो उन्होंने जांच की बात कही थी। भवन का रखरखाव न होने के कारण खिड़की,शौचालय का दरवाजा, स्लैप, हैण्डपम्प आदि जर्जर स्थिति में हो गया है। साथ ही उसी में टेन्ट हाउस का समान रखा गया था। बृहस्पतिवारर को जांच करने पहुंची मुख्य सेविका गीता देवी ने सच देखा तो भौचक रह गईं। इसके बाद दुकानदार को बुलाकर टेंट हाउस के समान को बाहर निकलवाया। अपना ताला लगाकर केंद्र की कार्यकत्री को चाबी सौंपी। केंद्र का संचालन नियमानुसार करने का दिशा निर्देश दिया। साथ केंद्र की जर्जर व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए विभाग को पत्र के माध्यम से अवगत भी कराया।
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उधर, प्राथमिक विद्यालय सैदपुरा में परिसर में कई वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र की नीव जोड़कर छोड़ दी गई है।कार्यकत्री द्वारा प्राथमिक विद्यालय के एकल कक्ष में केंद्र संचालित किया जाता है। यह भी देखने को मिला कि उपस्थिति पंजिका में पंजीकृत बच्चों की संख्या कुछ और है, धरातल पर कुछ और। ऐसे में शासन द्वारा नौनिहालों का भविष्य संवारने का सपना कहा तक सच साबित हो सकता है, जब आगनबाड़ी केंद्र में नौनिहालों की नर्सरी की जगह टेंट हाउस की दुकान चल रही हो। इससे आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि विभाग अपने कर्तव्यों के प्रति कितना जागरूक है।
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