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दुष्कर्म के मामले में दस वर्ष की कैद
अमर उजाला ब्यूरो /बलिया
Updated Thu, 10 Nov 2016 11:21 PM IST
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करीब तीन वर्ष पहले बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के एक गांव से नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म मामले में आरोपी को दस वर्ष की सजा व 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम अमर पाल सिंह की अदालत में हुई।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने थाने में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि दिनांक 29 अपै्रल 2013 को शाम सात बजे बरमेश्वर तिवारी की औरत मंगला मुखी मेरे घर आई और शौच कराने का बहाना बनाकर उसकी नाबालिगक लड़की को घर से दक्षिण खेत की तरफ ले गई। उस समय पीड़िता की मां घर में मौजूद थी। काफी देर बाद उसकी बेटी के न आने पर वादी ने मंगलामुखी के घर पूछताछ के लिए गया तो देखा कि मंगलामुखी के घर ताला लगा है। दूसरे दिन सुबह वादी के रिश्तेदार ने उसकी लड़की को मंगलामुखी व वीरेंद्र तिवारी व विजेंद्र तिवारी के साथ बलिया रेलवे स्टेशन पर देखा था। वादी की बेटी को बहला-फुसलाकर शादी का झांसा देकर अपहरण किया गया है। इस मामले में आरोप पत्र वीरेंद्र तिवारी के विरूद्ध कोर्ट में प्रस्तुत होने के बाद कोर्ट ने दौरान विचारण साक्ष्य का न्यायिक परिसीलन कर आरोपी वीरेंद्र तिवारी को अगवा कर दुष्कर्म करने का दोषी पाते हुए उसे दस वर्ष के कठोर कारावास व 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। अभियोजन की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता भरत तिवारी तथा बचाव पक्ष से अरविंद शर्मा व राजेंद्र त्रिपाठी ने पैरवी की।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने थाने में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि दिनांक 29 अपै्रल 2013 को शाम सात बजे बरमेश्वर तिवारी की औरत मंगला मुखी मेरे घर आई और शौच कराने का बहाना बनाकर उसकी नाबालिगक लड़की को घर से दक्षिण खेत की तरफ ले गई। उस समय पीड़िता की मां घर में मौजूद थी। काफी देर बाद उसकी बेटी के न आने पर वादी ने मंगलामुखी के घर पूछताछ के लिए गया तो देखा कि मंगलामुखी के घर ताला लगा है। दूसरे दिन सुबह वादी के रिश्तेदार ने उसकी लड़की को मंगलामुखी व वीरेंद्र तिवारी व विजेंद्र तिवारी के साथ बलिया रेलवे स्टेशन पर देखा था। वादी की बेटी को बहला-फुसलाकर शादी का झांसा देकर अपहरण किया गया है। इस मामले में आरोप पत्र वीरेंद्र तिवारी के विरूद्ध कोर्ट में प्रस्तुत होने के बाद कोर्ट ने दौरान विचारण साक्ष्य का न्यायिक परिसीलन कर आरोपी वीरेंद्र तिवारी को अगवा कर दुष्कर्म करने का दोषी पाते हुए उसे दस वर्ष के कठोर कारावास व 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। अभियोजन की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता भरत तिवारी तथा बचाव पक्ष से अरविंद शर्मा व राजेंद्र त्रिपाठी ने पैरवी की।
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