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मोहल्ला क्लासेज की बात तो दूर ऑनलाइन पढ़ाई भी हुई ठप
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बलिया। जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। मोहल्ला क्लासेज की बात तो दूर रही, आनलाइन पढ़ाई भी बंद हो गई है। बीएसए के आदेश के बावजूद स्कूलों में ताला लटक रहा है। अभिभावक और बच्चे अब स्कूल खुलने का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल, स्कूलों के खुलने के बाद भी तीन मार्च तक पठन-पाठन होना मुश्किल है।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए जिले के कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों को 15 फरवरी तक बंद कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से गांव-गांव में बच्चों को एकत्रित करके मोहल्ला क्लासेज चलाने का निर्देश दिया था। चुनावी समर में कूदे शिक्षक विभागीय निर्देशों को दरकिनार कर न तो मोहल्ला क्लासेज चल रहे हैं और न ही आनलाइन शिक्षा देने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यह अलग बात है कि गांव के अधिकांश बच्चों के पास एनड्रॉइड मोबाइल नहीं है। अधिकांश अभिभावकों के पास मोबाइल है तो रिचार्ज कराने के लिए रुपये नहीं हैं। ऐसे में बच्चों को आनलाइन शिक्षा प्रदान करना शिक्षकों के लिए टेढी खीर साबित हो रहा है। जिले के स्कूलों का हाल यह है कि शिक्षक स्कूलों को बंद करके चुनावी सरगर्मी के हिस्सा बने हुए हैं। इसका खुलासा चुनाव में सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाए गए अधिकारियों ने किया है। बूथ देखने पहुंचे सेक्टर मजिस्ट्रेट इसलिए अंदर नहीं घुस पाए थे, कि स्कूल में ताला लटक रहा था। जबकि बीएसए ने शिक्षकों को स्कूलों में मौजूद रहने का आदेश जारी किया।
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स्कूलों के बंद होने से शिक्षकों को आनलाइन पठन-पाठन जारी रखने को कहा गया है। शिक्षकों से गांव गांव में मोहल्ला क्लास लगाकर पढ़ाई करने को कहा गया है। इससे कोरोना संक्रमण फैलने की संभावना नहीं रहेगी और बच्चों को गृहकार्य भी मिल जाएगा।
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-शिवनारायन सिंह, बीएसए, बलिया।
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कोरोना संक्रमण को देखते हुए जिले के कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों को 15 फरवरी तक बंद कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से गांव-गांव में बच्चों को एकत्रित करके मोहल्ला क्लासेज चलाने का निर्देश दिया था। चुनावी समर में कूदे शिक्षक विभागीय निर्देशों को दरकिनार कर न तो मोहल्ला क्लासेज चल रहे हैं और न ही आनलाइन शिक्षा देने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यह अलग बात है कि गांव के अधिकांश बच्चों के पास एनड्रॉइड मोबाइल नहीं है। अधिकांश अभिभावकों के पास मोबाइल है तो रिचार्ज कराने के लिए रुपये नहीं हैं। ऐसे में बच्चों को आनलाइन शिक्षा प्रदान करना शिक्षकों के लिए टेढी खीर साबित हो रहा है। जिले के स्कूलों का हाल यह है कि शिक्षक स्कूलों को बंद करके चुनावी सरगर्मी के हिस्सा बने हुए हैं। इसका खुलासा चुनाव में सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाए गए अधिकारियों ने किया है। बूथ देखने पहुंचे सेक्टर मजिस्ट्रेट इसलिए अंदर नहीं घुस पाए थे, कि स्कूल में ताला लटक रहा था। जबकि बीएसए ने शिक्षकों को स्कूलों में मौजूद रहने का आदेश जारी किया।
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स्कूलों के बंद होने से शिक्षकों को आनलाइन पठन-पाठन जारी रखने को कहा गया है। शिक्षकों से गांव गांव में मोहल्ला क्लास लगाकर पढ़ाई करने को कहा गया है। इससे कोरोना संक्रमण फैलने की संभावना नहीं रहेगी और बच्चों को गृहकार्य भी मिल जाएगा।
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-शिवनारायन सिंह, बीएसए, बलिया।
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