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Ballia News: सुरहा ताल को वैश्विक पहचान मिलेगी, बढ़ेगी विदेशी पर्यटकों की संख्या

Fri, 05 Jun 2026 10:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2026 10:51 PM IST
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Surha Tal will get global recognition, the number of foreign tourists will increase.
सुरहाल पंक्षी विहार।सूचना विभाग
बलिया। जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी दूर स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को रामसर साइट घोषित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से इसे वैश्विक पहचान प्राप्त होगी। इससे विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। पर्यटकों की सुविधाओं के विकास के लिए उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड निरंतर प्रयासरत है। सुरहा ताल के समीप विभिन्न पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
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उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा बलिया जनपद के सुरहा ताल के निकट स्थित मैरीटार गांव में 4.99 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत ओपन एयर थिएटर, पाथवे, हॉर्टिकल्चर कार्य, साइनेज, चिल्ड्रेन एरिया, मल्टीपर्पज हॉल, घाट विकास, बर्ड वाचिंग टावर, कियोस्क, इंटरप्रिटेशन गैलरी, बेंच तथा अन्य सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। सुरहा ताल आर्द्रभूमि अपनी समृद्ध पक्षी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है और अनेक प्रवासी तथा स्थानीय पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास स्थल है। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता सुरहा ताल को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी तथा क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस वर्ष फरवरी से अब तक उत्तर प्रदेश की तीन आर्द्रभूमियों को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ है। फरवरी में एटा स्थित पटना पक्षी विहार, अप्रैल में अलीगढ़ स्थित शेखा पक्षी विहार तथा अब सुरहा ताल को रामसर स्थल के रूप में अधिसूचित किया गया है।
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अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती- जयवीर सिंह
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि नए रामसर स्थलों की अधिसूचना से इन क्षेत्रों में घरेलू के साथ-साथ विशेष रूप से विदेशी पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कहा कि प्रदेश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण की यह पहल न केवल जैव विविधता संरक्षण को सुदृढ़ करेगी, बल्कि प्रवासी पक्षियों के संरक्षण, जल सुरक्षा, पारिस्थितिक संतुलन तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सशक्त बनाएगी।
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वर्ष 1971 में हुई थी शुरुआत
रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमि के संरक्षण एवं उनके सतत उपयोग के लिए स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि की पहचान कर उन्हें रामसर साइट के रूप में नामित करना तथा उनके संरक्षण और प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है।

जेएनसीयू के कुलपति ने प्रधानमंत्री का जताया आभार
बलिया। जेएनसीयू के कुलपति प्रो़ नरेंद्र कुमार शुक्ला ने जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य, सुरहा ताल को देश का 100वां रामसर स्थल चुने जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है और आभार जताया है। कहा कि यह स्थान प्रवासी पक्षियों एवं स्थानीय पक्षियों की शरणस्थली है। आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए बनी रामसर सूची में सम्मिलित स्थलों का प्रकृति के संरक्षण के लिए विकास एवं संरक्षण आवश्यक है।
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