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ग्रामीण क्षेत्रों में दूसरे दिन भी नहीं हो सकी आपूर्ति बहाल
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बलिया। विद्युत कर्मियों की हड़ताल से निपटने को लेकर जिला प्रशासन की कवायद केवल कागजी निर्देशों तक सिमट कर रह गई। हड़ताल खत्म होने के बाद शहरी इलाकों में तो आपूर्ति देर शाम शुरू हो गई लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश इलाकों में दूसरे दिन मंगलवार को भी बिजली की आपूर्ति नहीं मिली। इतना ही नहीं जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों के तो मोबाइल बंद या नेटवर्क क्षेत्र से बाहर रहा तो किसी ने मोबाइल कॉल रिसीव ही नहीं किया। अधिकांश इलाकों में दो दिनों तक बिजली की आपूर्ति नहीं होने से सभी पेयजल नलकूप भी बन्द रहे। अधिकांश इलाकों में बिजली के अभाव में टॉवर बन्द होने से नेटवर्क की समस्या बनी रही।
निजीकरण के खिलाफ विद्युत कर्मियों ने सोमवार की सुबह हड़ताल कर दी और शहर से लेकर गांवों तक की बिजली आपूर्ति बंद कर दी। शासन के निर्देश के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी केवल निर्देश देने का काम करते रहे लिहाजा दो दिनों तक लोग बिजली के अभाव में बिलबिलाते रहे। मंगलवार की शाम जिलाधिकारी की ओर से सभी विद्युत उपकेंद्रों पर एक संस्था की ओर से उपलब्ध कराए एसएसओ की तैनाती करने का निर्देश भी हवा हवाई ही रह गया। आलम यह रहा कि जिम्मेदार एसडीएम व तहसीलदारों के मोबाइल बंद या नेटवर्क क्षेत्र से बाहर रहा था या फिर फोन रिसीव ही नहीं किया गया। बतौर उदाहरण मंगलवार देर शाम तक सोहांव व नारायनपुर विद्युत उपकेंद्र पर कोई नहीं पहुंचा। इन उपकेंद्रों से जुड़े ग्रामीणों ने एसडीएम सदर को कई बार फोन किया लेकिन उनका मोबाइल नेटवर्क क्षेत्र से बाहर बताता रहा जबकि तहसीलदार ने फोन रिसीव ही नहीं किया। हड़ताल समाप्त होने के बावजूद सोहांव ब्लॉक के 56 गांवों की आपूर्ति दूसरे दिन भी बंद रही। कुछ इलाकों में बुधवार की सुबह 10 बजे के बाद आपूर्ति शुरू हुई।
हड़ताल समाप्त होने के बाद भी शुरू नहीं हो सकी आपूर्ति
बेल्थरारोड। निजीकरण के विरोध में विद्युत विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की हड़ताल से आपूर्ति व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई है। सोमवार की सुबह से ही आपूर्ति ठप हो गई जो मंगलवार को भी जारी रहा। हड़ताल की समाप्ति के बावजूद अधिकांश इलाकों में आपूर्ति ठप रही। रात भर लोग गर्मी, उमस और मच्छर से परेशान रहे। हालांकि बुधवार को करीब 10 बजे आपूर्ति शुरू हुई।
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निजीकरण के खिलाफ विद्युत कर्मियों ने सोमवार की सुबह हड़ताल कर दी और शहर से लेकर गांवों तक की बिजली आपूर्ति बंद कर दी। शासन के निर्देश के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी केवल निर्देश देने का काम करते रहे लिहाजा दो दिनों तक लोग बिजली के अभाव में बिलबिलाते रहे। मंगलवार की शाम जिलाधिकारी की ओर से सभी विद्युत उपकेंद्रों पर एक संस्था की ओर से उपलब्ध कराए एसएसओ की तैनाती करने का निर्देश भी हवा हवाई ही रह गया। आलम यह रहा कि जिम्मेदार एसडीएम व तहसीलदारों के मोबाइल बंद या नेटवर्क क्षेत्र से बाहर रहा था या फिर फोन रिसीव ही नहीं किया गया। बतौर उदाहरण मंगलवार देर शाम तक सोहांव व नारायनपुर विद्युत उपकेंद्र पर कोई नहीं पहुंचा। इन उपकेंद्रों से जुड़े ग्रामीणों ने एसडीएम सदर को कई बार फोन किया लेकिन उनका मोबाइल नेटवर्क क्षेत्र से बाहर बताता रहा जबकि तहसीलदार ने फोन रिसीव ही नहीं किया। हड़ताल समाप्त होने के बावजूद सोहांव ब्लॉक के 56 गांवों की आपूर्ति दूसरे दिन भी बंद रही। कुछ इलाकों में बुधवार की सुबह 10 बजे के बाद आपूर्ति शुरू हुई।
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हड़ताल समाप्त होने के बाद भी शुरू नहीं हो सकी आपूर्ति
बेल्थरारोड। निजीकरण के विरोध में विद्युत विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की हड़ताल से आपूर्ति व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई है। सोमवार की सुबह से ही आपूर्ति ठप हो गई जो मंगलवार को भी जारी रहा। हड़ताल की समाप्ति के बावजूद अधिकांश इलाकों में आपूर्ति ठप रही। रात भर लोग गर्मी, उमस और मच्छर से परेशान रहे। हालांकि बुधवार को करीब 10 बजे आपूर्ति शुरू हुई।
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