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रामलीला शुरू, अब मंच के सामने गुजरेगी शाम
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Wed, 07 Oct 2015 10:51 PM IST
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नगर बलिया रामलीला कमेटी के तत्वावधान में मंगलवार की रात नगर के रामलीला मैदान में बुधवार से रामलीला मंचन शुरू हो गया।
महीनों से इसका इंतजार कर रहे रामलीला प्रेिमयों की शामें अब राम और उनसे जुड़े पात्रों के नाम हो गईं है। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुकुट पूजन तथा प्रभु श्रीराम और सीता की आरती की गई। तत्पश्चात नारद मोह का भावपूर्ण मंचन दरभंगा के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया। जिसे देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
मंच पर पहले दिन नारद लीला का मंचन िकया गया। कामदेव पर विजय के बाद नारद को घमंड हो गया है। नारद के घमंड तोड़ने के लिए विष्णु विश्वमोहिनी का रूप धारण कर स्वयंवर स्थल पर पहुंच गए।
उधर नारद हरि सा रूप पाकर स्वयंवर स्थल पर पहुंचे। जहां विश्वमोहिनी ने हरि रूपी नारद की उपेक्षा करते हुए विश्वमोहिनी ने विष्णु के गले में जयमाला डाल दी। अपने साथ धोखे से आहत नारद बौखला गए और आगबबूला होकर शाप दे दिया। शाप दिया कि जिस प्रकार से मैं पत्नी वियोग में तड़प रहा हूं।
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उसी प्रकार तुम भी पत्नी वियोग में तड़पोगे। क्रोध शांत होने पर नारद को भूल का एहसास हुआ। नारद ने तत्काल विष्णु से क्षमा याचना की। इस दौरान नारद और विष्णु के बीच कर्णप्रिय संवाद सुन लीलाप्रेमी रोमांचित हो उठे। इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष विनोद सरावगी, कनिष्ठ अध्यक्ष दीपक केशरी, मानिक चंद्र, जितेंद्र, डा. गणेश प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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महीनों से इसका इंतजार कर रहे रामलीला प्रेिमयों की शामें अब राम और उनसे जुड़े पात्रों के नाम हो गईं है। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुकुट पूजन तथा प्रभु श्रीराम और सीता की आरती की गई। तत्पश्चात नारद मोह का भावपूर्ण मंचन दरभंगा के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया। जिसे देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
मंच पर पहले दिन नारद लीला का मंचन िकया गया। कामदेव पर विजय के बाद नारद को घमंड हो गया है। नारद के घमंड तोड़ने के लिए विष्णु विश्वमोहिनी का रूप धारण कर स्वयंवर स्थल पर पहुंच गए।
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उधर नारद हरि सा रूप पाकर स्वयंवर स्थल पर पहुंचे। जहां विश्वमोहिनी ने हरि रूपी नारद की उपेक्षा करते हुए विश्वमोहिनी ने विष्णु के गले में जयमाला डाल दी। अपने साथ धोखे से आहत नारद बौखला गए और आगबबूला होकर शाप दे दिया। शाप दिया कि जिस प्रकार से मैं पत्नी वियोग में तड़प रहा हूं।
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उसी प्रकार तुम भी पत्नी वियोग में तड़पोगे। क्रोध शांत होने पर नारद को भूल का एहसास हुआ। नारद ने तत्काल विष्णु से क्षमा याचना की। इस दौरान नारद और विष्णु के बीच कर्णप्रिय संवाद सुन लीलाप्रेमी रोमांचित हो उठे। इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष विनोद सरावगी, कनिष्ठ अध्यक्ष दीपक केशरी, मानिक चंद्र, जितेंद्र, डा. गणेश प्रसाद आदि मौजूद रहे।