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मुड़िकटवा में शान से लहराया तिरंगा
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Fri, 22 Apr 2016 10:30 PM IST
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मुडि़़कटवा शौर्य दिवस पर झंडा फहराते क्षेत्रीय गणमान्य।
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नगर के पश्चिम स्थित कुसहर ग्रामसभा में मुड़िकटवा नामक स्थान पर शुक्रवार को 1857 के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू कुंवर सिंह की स्मृति में शौर्य दिवस मनाया गया। संयोजक बब्लू पांडेय की उपस्थिति में अध्यापक ओमप्रकाश तिवारी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
इस मौके पर इलाके के सैकड़ों लोगों ने सेनानियों को याद कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया। वर्ष 2009 से समाजसेवी अतुल कुमार पांडेय के नेतृत्व में प्रत्येक वर्ष यहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू कुंवर सिंह की स्मृति में शौर्य दिवस मना जाता है।
शुक्रवार को मुड़िकटवा में झंडात्तोलन के बाद गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें वक्ताओं ने कुंवर सिंह की स्मृति में मुड़िकटवा नामक स्थान पर पार्क तथा स्मृतिशाला बनाए जाने का संकल्प लिया। संयोजक बब्लू पांडेय ने कहा कि वीरवर कुंवर सिंह की स्मृति में आज से जल संरक्षण अभियान की शुरूआत की जा रही है।
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इसके लिए आस-पास के तालाबों तथा जलाशयों को साफ कराने का अभियान शुरू किया जाएगा। इससे गिरते जलस्तर की समस्या से निजात मिलेगी। सभा को कौशल सिंह, चंद्रभूषण पांडेय, कांगे्रस नेता रौशन सिंह चंदन, सुनील श्रीवास्तव, कर्मवीर तिवारी आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता बैजनाथ पांडेय तथा संचालन ओमप्रकाश कुंवर मुन्नू ने किया।
ऐसे पड़ा नाम मुड़िकटवा
1857 में कुंवर सिंह जब अपने गांव जगदीशपुर से अंग्रेजी सरकार से विद्रोह करके आगे बढ़े तो उनको काबू करने के लिए अंग्रेेजों की फौज भी उनके पीछे-पीछे चली। आजमगढ़, अतरौलिया, दुल्लौर आदि जगहों पर
अंग्रेजों से युद्ध करते हुए कुंवर सिंह जब रेवती से पश्चिम स्थित घाघरा के छाड़न के पास पहुंचे तो क्षेत्रीय लोग बाबू कुंवर सिंह को बचाने के उद्देश्य से आस-पास के झुरमुटों में नुकीले बांस का खपचा, भाले तथा लाठियों से लैस होकर छिप गए। 22 अप्रैल 1857 को जब अंग्रेजी सेना जब उधर से गुजरने लगी तो घात लगाए लोगों ने सेना पर हमला कर दिया।
इस हमले में कुल मिलाकर 106 लोग मारे गए। इससे हताश होकर अंग्रेेजी सेना भाग खड़ी हुई और कुंवर बाबू को आगे बढ़ने का मौका मिला। उसी युद्ध के बाद से युद्ध भूमि का नाम मुड़िकटवा पड़ गया।
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इस मौके पर इलाके के सैकड़ों लोगों ने सेनानियों को याद कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया। वर्ष 2009 से समाजसेवी अतुल कुमार पांडेय के नेतृत्व में प्रत्येक वर्ष यहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू कुंवर सिंह की स्मृति में शौर्य दिवस मना जाता है।
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शुक्रवार को मुड़िकटवा में झंडात्तोलन के बाद गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें वक्ताओं ने कुंवर सिंह की स्मृति में मुड़िकटवा नामक स्थान पर पार्क तथा स्मृतिशाला बनाए जाने का संकल्प लिया। संयोजक बब्लू पांडेय ने कहा कि वीरवर कुंवर सिंह की स्मृति में आज से जल संरक्षण अभियान की शुरूआत की जा रही है।
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इसके लिए आस-पास के तालाबों तथा जलाशयों को साफ कराने का अभियान शुरू किया जाएगा। इससे गिरते जलस्तर की समस्या से निजात मिलेगी। सभा को कौशल सिंह, चंद्रभूषण पांडेय, कांगे्रस नेता रौशन सिंह चंदन, सुनील श्रीवास्तव, कर्मवीर तिवारी आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता बैजनाथ पांडेय तथा संचालन ओमप्रकाश कुंवर मुन्नू ने किया।
ऐसे पड़ा नाम मुड़िकटवा
1857 में कुंवर सिंह जब अपने गांव जगदीशपुर से अंग्रेजी सरकार से विद्रोह करके आगे बढ़े तो उनको काबू करने के लिए अंग्रेेजों की फौज भी उनके पीछे-पीछे चली। आजमगढ़, अतरौलिया, दुल्लौर आदि जगहों पर
अंग्रेजों से युद्ध करते हुए कुंवर सिंह जब रेवती से पश्चिम स्थित घाघरा के छाड़न के पास पहुंचे तो क्षेत्रीय लोग बाबू कुंवर सिंह को बचाने के उद्देश्य से आस-पास के झुरमुटों में नुकीले बांस का खपचा, भाले तथा लाठियों से लैस होकर छिप गए। 22 अप्रैल 1857 को जब अंग्रेजी सेना जब उधर से गुजरने लगी तो घात लगाए लोगों ने सेना पर हमला कर दिया।
इस हमले में कुल मिलाकर 106 लोग मारे गए। इससे हताश होकर अंग्रेेजी सेना भाग खड़ी हुई और कुंवर बाबू को आगे बढ़ने का मौका मिला। उसी युद्ध के बाद से युद्ध भूमि का नाम मुड़िकटवा पड़ गया।