Samajwadi Party: गाजीपुर के ओमप्रकाश और बलिया के रामगोविंद बने सपा के राष्ट्रीय सचिव, समर्थकों में खुशी
पूर्व मंत्री और सात बार के विधायक ओम प्रकाश सिंह के साथ ही नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी को समाजवादी पार्टी में राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। इस सूचना के बाद से बलिया और गाजीपुर जनपद में समाजवादियों में खुशी की लहर है।
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समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की संशोधित सूची रविवार को जारी हुई। इसमें गाजीपुर के ओमप्रकाश सिंह और बलिया के रामगोविंद चौधरी को भी जगह मिली। दोनों को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। संशोधित सूची जारी होने की सूचना के साथ ही समाजवादियों में प्रसन्नता फैल गई। समर्थकों ने पटाखे फोड़ कर और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं।
संशोधित सूची जारी होने के बाद पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी को बलिया के बांसडीह में आयोजित संत रविदास जयंती कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल मालाओं से लाद कर बधाई दी। रामगोविंद चौधरी ने कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिस आशा और विश्वास के साथ मुझे यह नई जिम्मेदारी दी है, अपनी पूरी क्षमता से खरा उतरने की कोशिश करूंगा।
सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सूची में कुल 67 सदस्य
रामगोविंद चौधरी को पहले कार्यकारिणी में सदस्य बनाया गया था। सात दिन पहले सपा ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित की थी। इसमें कुल 62 लोगों को शामिल किया गया था। शिवपाल यादव को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। पहले 19 राष्ट्रीय सचिव थे। अब 5 राष्ट्रीय सचिव जुड़ने के बाद यह संख्या अब 24 हो गई है। इस प्रकार संशोधित राष्ट्रीय कार्यकारिणी सूची में कुल 67 सदस्य हैं।
सात बार के विधायक हैं ओमप्रकाश सिंह
गाजीपुर की राजनीति में ओम प्रकाश सिंह सपा की मजबूत कड़ी हैं। पार्टी की ओर से राष्ट्रीय सचिव बनाए जाने पर सपा समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सेवराई स्थित पैतृक आवास पर समर्थकों ने पटाखे फोड़े। पूर्व मंत्री और सात बार के विधायकओम प्रकाश सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जो हमें जिम्मेदारी सौंपी है उसका पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करूंगा। उन्होंने कहा कि संगठन को और मजबूत करते हुए आगामी लोकसभा चुनाव में सपा का झंडा बुलंद किया जाएगा।
पिछले दिनों चर्चा में आए थे ओमप्रकाश
पिछले दिनों ओमप्रकाश सिंह तब चर्चा में आए जब सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा हुई। इसमें ओमप्रकाश समेत कई पुराने नेताओं के नाम नहीं थे। उसी दिन दौरान उनसे संबंधित एक ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। जिसके कई अर्थ निकाले गए, लेकिन रविवार को जब संशोधित सूची जारी हुई तो सभी चर्चाओं पर विराम लग गया।