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सड़क बनाने वालों ने गांव के नाम ही बदल डाले
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बलिया। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31 का निर्माण चल रहा है। सड़क बनाने वाली कंपनी ने गांवों के किनारे रेडियम पेंट से बने गांवों के नाम के बोर्ड लगवाए हैं। गांवों का नाम गलत लिखने के कारण आने-जाने वालों को असुविधा हो रही है। गांव वालों ने इसका विरोध किया तो एक जगह बोर्ड को पोत दिया गया।
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31 की लंबाई जिले में 90 किलोमीटर के करीब है। यह सड़क पिछले कई साल से क्षतिग्रस्त थी। जून 2020 में गाजीपुर से मांझी तक एनएच के मरम्मत को 102 करोड़ का टेंडर हुआ लेकिन कंपनी ने काम नहीं किया। इसके बाद दिसंबर 2021 नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया पूरी की गई। गाजीपुर से फेफना तक 60 किलोमीटर, फेफना से चिरैयामोड़ तक 45 किलोमीटर और चिरैया मोड़ से मांझी के जयप्रभा सेतु तक 16 किलोमीटर के कार्य को अलग-अलग तीन एजेंसियों को 117 करोड़ रुपये में मरम्मत करने का जिम्मा सौंपा गया। तीनों एजेंसियां कार्य कर रही हैं। फेफना से भरौली तक करीब 20 किमी की सड़क पर कार्य लगभग पूरा कर लिया है। सड़क के किनारे गांव के नाम का रेडियम पेंटेड बोर्ड लगा रही है। कई गांवों के सामने गलत नाम अंकित किया जा रहा है। तेतारपुर के निवासियों ने इस पर विरोध जताया तो बोर्ड की पोताई करके नाम दुरुस्त कर दिया गया लेकिन उसे पढ़ने में भी असुविधा हो रही है। सुरही गांव को सुराही, सोबंथा को सोबान्ता बना दिया गया है।
गांव के लोगों का कहना है कि आसपास के लोगों को गलत नाम से कोई दिक्कत नहीं हो रही है लेकिन दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले लोगों को गांवों की तलाश में मुश्किल होगी। जो लोग गूगल मैप की मदद लेते हैं, वे भी सही गांव नहीं खोज पाएंगे।
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राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31 की लंबाई जिले में 90 किलोमीटर के करीब है। यह सड़क पिछले कई साल से क्षतिग्रस्त थी। जून 2020 में गाजीपुर से मांझी तक एनएच के मरम्मत को 102 करोड़ का टेंडर हुआ लेकिन कंपनी ने काम नहीं किया। इसके बाद दिसंबर 2021 नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया पूरी की गई। गाजीपुर से फेफना तक 60 किलोमीटर, फेफना से चिरैयामोड़ तक 45 किलोमीटर और चिरैया मोड़ से मांझी के जयप्रभा सेतु तक 16 किलोमीटर के कार्य को अलग-अलग तीन एजेंसियों को 117 करोड़ रुपये में मरम्मत करने का जिम्मा सौंपा गया। तीनों एजेंसियां कार्य कर रही हैं। फेफना से भरौली तक करीब 20 किमी की सड़क पर कार्य लगभग पूरा कर लिया है। सड़क के किनारे गांव के नाम का रेडियम पेंटेड बोर्ड लगा रही है। कई गांवों के सामने गलत नाम अंकित किया जा रहा है। तेतारपुर के निवासियों ने इस पर विरोध जताया तो बोर्ड की पोताई करके नाम दुरुस्त कर दिया गया लेकिन उसे पढ़ने में भी असुविधा हो रही है। सुरही गांव को सुराही, सोबंथा को सोबान्ता बना दिया गया है।
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गांव के लोगों का कहना है कि आसपास के लोगों को गलत नाम से कोई दिक्कत नहीं हो रही है लेकिन दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले लोगों को गांवों की तलाश में मुश्किल होगी। जो लोग गूगल मैप की मदद लेते हैं, वे भी सही गांव नहीं खोज पाएंगे।
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