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सही पाया गया हत्या का आरोप
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Thu, 29 Jan 2015 11:18 PM IST
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15 साल पहले बैरिया थाने पर तैनात दरोगा ने हमराहियों के साथ एक मजदूर को उसके घर से पकड़कर ले जाने के बाद उसकी हत्या कर शव को गायब कर दिया था। मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने तत्कालीन बैरिया थानाध्यक्ष रामसजीवन सचान को दोषी पाया। इस मामले के शेष अभियुक्त गण को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया। प्रकरण की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय कैप्टन डीपीएन सिंह की अदालत में गुरुवार को हुई। सजा के बिंदु पर सुनवाई शुक्रवार को होगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक करीब 15 साल पहले बैरिया थाना क्षेत्र के मधुवनी गांव निवासी मोतीलाल गोंड पुत्र निरंजन गोंड ने एसपी को प्रार्थना पत्र दिया कि उसका लड़का पातर राम गोंड जो राजमिस्त्री का काम करता था। वह तीन अप्रैल 1990 को ससुराल से घर आया था। उसी दिन रात में 12 बजे थानाध्यक्ष आरएस सचान और सुरेमनपुर चौकी इंचार्ज उमेश जायसवाल, हेड कांस्टेबिल रामवृक्ष यादव, कांस्टेबिल गुलाब सिंह, कांस्टेबिल अमीर सिंह और कांस्टेबिल हीरालाल पांडेय तथा जीप चालक राज बहादुर सिंह घर आए और लड़के को पकड़कर जबरन थाने पर ले गए। जहां थानाध्यक्ष और सभी पुलिस कर्मी ने बेटे को इतना पीटा कि वह बेहोश हो गया।
लड़के ने थाना परिसर में ही दम तोड़ दिया। उसकी मृत्यु के बाद बैरिया पुलिस ने शव को ठिकाने कर बेटे के गमछे को बैरिया गोलंबर पर फेंक दिया। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने मामले में बैरिया थानाध्यक्ष और पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। मामले में आरोपियों के विरुद्ध मजिस्ट्रेटी जांच और सीबीसीआईडी की जांच के बाद आरोपपत्र कोर्ट में प्रेषित हुआ।
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कोर्ट ने आरोपी थानाध्यक्ष आरएस सचान को 302/201, 364, 342 आईपीसी का दोष पाकर दोष सिद्ध करार दिया। इस मामले के शेष आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य न मिलने के कारण बरी कर दिया। मामले में अभियोजन का पक्ष एडीजीसी विजय बहादुर यादव और बचाव पक्ष से राजेश सिंह, रंगबली सिंह ने तर्क प्रस्तुत किया।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक करीब 15 साल पहले बैरिया थाना क्षेत्र के मधुवनी गांव निवासी मोतीलाल गोंड पुत्र निरंजन गोंड ने एसपी को प्रार्थना पत्र दिया कि उसका लड़का पातर राम गोंड जो राजमिस्त्री का काम करता था। वह तीन अप्रैल 1990 को ससुराल से घर आया था। उसी दिन रात में 12 बजे थानाध्यक्ष आरएस सचान और सुरेमनपुर चौकी इंचार्ज उमेश जायसवाल, हेड कांस्टेबिल रामवृक्ष यादव, कांस्टेबिल गुलाब सिंह, कांस्टेबिल अमीर सिंह और कांस्टेबिल हीरालाल पांडेय तथा जीप चालक राज बहादुर सिंह घर आए और लड़के को पकड़कर जबरन थाने पर ले गए। जहां थानाध्यक्ष और सभी पुलिस कर्मी ने बेटे को इतना पीटा कि वह बेहोश हो गया।
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लड़के ने थाना परिसर में ही दम तोड़ दिया। उसकी मृत्यु के बाद बैरिया पुलिस ने शव को ठिकाने कर बेटे के गमछे को बैरिया गोलंबर पर फेंक दिया। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने मामले में बैरिया थानाध्यक्ष और पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। मामले में आरोपियों के विरुद्ध मजिस्ट्रेटी जांच और सीबीसीआईडी की जांच के बाद आरोपपत्र कोर्ट में प्रेषित हुआ।
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कोर्ट ने आरोपी थानाध्यक्ष आरएस सचान को 302/201, 364, 342 आईपीसी का दोष पाकर दोष सिद्ध करार दिया। इस मामले के शेष आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य न मिलने के कारण बरी कर दिया। मामले में अभियोजन का पक्ष एडीजीसी विजय बहादुर यादव और बचाव पक्ष से राजेश सिंह, रंगबली सिंह ने तर्क प्रस्तुत किया।