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Ballia News: बचाव कार्य काम नहीं आया, सरयू में समाया कोयलवीर बाबा का स्थान, बरगद का पेड़ भी नदी में गिरा
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तुर्तीपार ग्राम पंचायत के मल्लाह टोला बस्ती के समीप कटान करती सरयू नदी के कटान का निरीक्षण करते
बांसडीह। सरयू का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन सुल्तानपुर पोखरा में नदी का कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार की देर रात करीब दो बजे सरयू की तेज कटान में कोयलवीर बाबा का स्थान और वहां का विशाल बरगद का पेड़ नदी में समा गया।
कोयलवीर बाबा का स्थान और विशाल बरगद का पेड़ ग्रामीणों की आस्था का प्रमुख केंद्र था। इसके नदी में समा जाने के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि नदी इसी रफ्तार से जमीन काटती रही तो गांव को बचाना बड़ी चुनौती होगी। कटान की जद में आने से करीब 800 से 1000 लोगों के प्रभावित होने की आशंका है।
कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए शनिवार को नवागत जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने सुल्तानपुर पोखरा पहुंचकर कटान स्थल का निरीक्षण किया था। उन्होंने बाढ़ विभाग के अधिकारियों को तत्काल बचाव कार्य कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग की ओर से मौके पर बचाव कार्य तेज किया गया। बाढ़ खंड की ओर से कोयलवीर बाबा स्थान को बचाने के लिए जियो बैग और बोरियों के सहारे नदी के किनारे को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन नदी की कटान की रफ्तार इतनी तेज रही कि रविवार की रात बाबा स्थान और विशाल बरगद नदी में समा गए।
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ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के दौरान नदी का पानी घरों तक पहुंच गया था, लेकिन उस समय मकान सुरक्षित थे। अब पानी उतरने के बाद नदी की कटान ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। खेतों की जमीन लगातार नदी में समाहित हो रही है। ग्रामीणों ने गांव को बचाने के लिए युद्धस्तर पर कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है।
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कोयलवीर बाबा का स्थान और विशाल बरगद का पेड़ ग्रामीणों की आस्था का प्रमुख केंद्र था। इसके नदी में समा जाने के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि नदी इसी रफ्तार से जमीन काटती रही तो गांव को बचाना बड़ी चुनौती होगी। कटान की जद में आने से करीब 800 से 1000 लोगों के प्रभावित होने की आशंका है।
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कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए शनिवार को नवागत जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने सुल्तानपुर पोखरा पहुंचकर कटान स्थल का निरीक्षण किया था। उन्होंने बाढ़ विभाग के अधिकारियों को तत्काल बचाव कार्य कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग की ओर से मौके पर बचाव कार्य तेज किया गया। बाढ़ खंड की ओर से कोयलवीर बाबा स्थान को बचाने के लिए जियो बैग और बोरियों के सहारे नदी के किनारे को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन नदी की कटान की रफ्तार इतनी तेज रही कि रविवार की रात बाबा स्थान और विशाल बरगद नदी में समा गए।
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ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के दौरान नदी का पानी घरों तक पहुंच गया था, लेकिन उस समय मकान सुरक्षित थे। अब पानी उतरने के बाद नदी की कटान ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। खेतों की जमीन लगातार नदी में समाहित हो रही है। ग्रामीणों ने गांव को बचाने के लिए युद्धस्तर पर कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है।