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गंगा के उफान में आई कमी से लोगों में सुकून
अमर उजाला ब्यूरोः बलिया
Updated Tue, 16 Aug 2016 10:33 PM IST
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द्वाबा क्षेत्र के इब्राहिमाबाद नौबरार में बाढ़ के पानी से चौतरफा घिरा प्राथमिक स्कूल।
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रविवार के दिन गंगा के उफान पर होने से पानी खेतों में रेंगना शुरू हो गया था साथ ही कुछ पुरवों में नदी का पानी आ जाने से बाढ़ क्षेत्रों के लोगों में दहशत पैदा हो गई थी। मगर मंगलवार को जलस्तर 58.625 से कम होकर 58.125 मीटर हो गया। इससे बाढ़ क्षेत्र के लोगों के साथ ही प्रशासन ने राहत की सांस ली है। हालांकि कुछ फसलों का नुकसान जरूर हुआ है स्वास्थ्य समस्या की आशंका बढ़ गई है।
क्षेत्र में सोमवार को गंगा नदी के जल स्तर में आई गिरावट से क्षेत्र के बाढ़ क्षेत्रों के लोगों ने राहत की सांस ली। कुछ फसलों का नुकसान जरूर हुआ लोगों ने बाढ़ आने के भय से दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी करना भी शुरू कर दी थी साथ ही पशुओं की व्यवस्था में जुट गए थे, परंतु गनीमत रही कि अचानक गंगा के जल स्तर में कमी आने से लोगों ने राहत की सांस ली है। इससे पहले कुछ फसलों का नुकसान जरूर हो गया साथ ही निचले इलाकों में रह रहे लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है, क्योंकि पानी तो उनके घरों के आस पास लग चुका है, जिसको सूखने में वक्त लगेगा इतना ही पानी आ जाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्या आने की आशंका जरूर बढ़ गई है, सबके बावजूद पानी कम हो जाने से जहां बाढ़ क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली वहीं प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है वही कुछ लोगों का कहना है कि पानी थोड़ा और रेंग जाता तो खेतों के दीमक मर जाते क्योंकि बाढ़ आये तीन साल हो गए थे और खेतों में दीमक हो गए है।
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क्षेत्र में सोमवार को गंगा नदी के जल स्तर में आई गिरावट से क्षेत्र के बाढ़ क्षेत्रों के लोगों ने राहत की सांस ली। कुछ फसलों का नुकसान जरूर हुआ लोगों ने बाढ़ आने के भय से दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी करना भी शुरू कर दी थी साथ ही पशुओं की व्यवस्था में जुट गए थे, परंतु गनीमत रही कि अचानक गंगा के जल स्तर में कमी आने से लोगों ने राहत की सांस ली है। इससे पहले कुछ फसलों का नुकसान जरूर हो गया साथ ही निचले इलाकों में रह रहे लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है, क्योंकि पानी तो उनके घरों के आस पास लग चुका है, जिसको सूखने में वक्त लगेगा इतना ही पानी आ जाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्या आने की आशंका जरूर बढ़ गई है, सबके बावजूद पानी कम हो जाने से जहां बाढ़ क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली वहीं प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है वही कुछ लोगों का कहना है कि पानी थोड़ा और रेंग जाता तो खेतों के दीमक मर जाते क्योंकि बाढ़ आये तीन साल हो गए थे और खेतों में दीमक हो गए है।
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