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सरयू में बढ़ाव से बरसाती पानी खेतों में भरा, सैकड़ों एकड़ की फसल बर्बाद

Sun, 16 Aug 2020 09:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 16 Aug 2020 09:18 PM IST
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Rain water flooded in Saryu, hundreds of acres of crop wasted
रेवती। क्षेत्र में बरसात का जो पानी विभिन्न ड्रेनों तथा नालों से होकर सरयू में गिर जाया करता था वह उल्टी धारा में परिवर्तित होकर क्षेत्र के विभिन्न मौजे के खेतों में रुकने लगा है।
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सरयू के जलस्तर में बढ़ोतरी होने लगी है जिससे देवपुर रेगुलेटर के फाटक के झरोखे से होकर निकलता पानी दक्षिणी क्षेत्र की उपजाऊ भूमि की ओर फैल गया है। किसानों ने बताया कि मक्के की फसल नष्ट हो गई है और धान भी पूरी तरह डूब कर बर्बाद हो गया है। छेड़ी 1800 बीघे का मौजा है जो पूरा डूबा है। इसी तरह चौबे छपरा 600 बीघे के मौजे में करीब 500 बीघा डूबा पड़ा है, विशुनपुरा 1500 बीघा का कुल मौजा है जिसमें करीब 1000 बीघा से अधकि की फसलें डूबी हुई है। उधर, खदरा मौजा के 300 बीघा में से 250 बीघा, कामता मौजा का करीब 100 बीघा, मून छपरा का करीब 400 बीघा तथा मानसिंह छपरा के 350 बीघा खेत की फसलें जलभराव से बर्बादी के कगार पर हैं। इसके अलावा कंचनपुर, बेलहरी, नवाबारा आदि मौजे के भी 100 बीघे से अधिक की फसल जलमग्न हैं।
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विधायक सुरेंद्र सिंह ने लिया कटान का जायजा
रामगढ़। बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह ने बाढ़ विभाग के अधिकारियों के साथ नौरंगा में हो रहे कटान का निरीक्षण किया। विधायक ने अधिकारियों से कहा कि हर हाल में कटान रोका जाए। अगर बंधा कटता है तो कार्रवाई तय है। उन्होंने कहा कि नौरंगा चक्की संपर्क मार्ग और गांवों को गंगा की धारा में विलीन होने से बचाया जाए। उधर, केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर रविवार को दोपहर 55.64 मीटर दर्ज की गई। प्रति घंटा एक सेमी का बढ़ाव बना हुआ है।
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करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से नौरंगा में पार्कोंपाइन विधि द्वारा कटान रोधी कार्य का शुभारंभ 11 मई को किया गया था। गंगा नदी में करीब 3 लेयर ही ईसी बैग डाला गया था कि गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा और आनन-फानन में ठेकेदार द्वारा ईसी बैग के काम को बंद कर सीमेंट के खंभों को खड़ा कर उसमें कंक्रीट भरने का काम शुरू हुआ किया। गंगा का जलस्तर और बढ़ने लगा जिसके चलते ठेकेदार ने काम बंद कर दिया। करीब एक माह से नौरंगा में कटान रोधी कार्य बंद पड़ा हुआ है। शनिवार की सुबह नौरंगा में जहां पर पार्कोपाइन विधि द्वारा सीमेंट का खंभा खड़ा किया गया है। वहां गंगा की उफनती लहरों ने कहर बरसाना शुरू कर दिया है। उसी स्थान पर करीब 200 मीटर की लंबाई में अरार का कटना शुरू हो गया। इससे पूरे गांव में अफरातफरी मची है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरीके से नदी कटान कर रही है अगर उसकी धारा को नहीं मोड़ा गया तो नौरंगा भुआल छपरा का अस्तित्व इस साल मिट जाएगा। इस मौके पर बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र, एसडीओ कमलेश कुमार, अवर अभियंता प्रशांत कुमार, अवर अभियंता जावेद अहमद, परशुराम सिंह, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि अयोध्या प्रसाद हिंद, निर्मल खरवार, विनोद ठाकुर, धनंजय ठाकुर, चिंटू ठाकुर, बुआ कुमार आदि रहे।

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लगातार कटान से गांव में अफरातफरी
रामगढ़। नौरंगा में शनिवार से कटान शुरू होते ही गांव में अफरातफरी मच गई है। मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय विधायक ने बाढ़ विभाग के अधिकारियों से पूछा कि इस समय नदी की धारा कैसे कम किया जाएगा तो बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र ने बताया कि डाइटिंग के तहत हरे पेड़ों की टहनियों को काटकर अब गंगा नदी की धारा में डालकर ही धारा को रोकना ही विकल्प है। विधायक ने कहा कि जैसे भी हो कटान रुकना चाहिए। गंगा की लहरें अब पुलिया पर ठोकर मारना शुरू कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया के कटते ही करीब 20 हजार की आबादी पानी में डूब जाएगी।
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