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अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस --------------------------- विधवा की स्थिति सुधारने को पर्याप्त नहीं हैं योजनाएं--

Tue, 23 Jun 2020 09:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2020 09:51 PM IST
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Plans are not enough to improve the situation of widow
बलिया। प्रदेश और केंद्र सरकार ने विधवा की तकलीफों का भी पूरा ध्यान रखते हुए तमाम योजनाएं चलाई हैं। लेकिन इसका उनको पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता है। आज भी बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं असहाय की तरह जीवन जी रही हैं। पति की मृत्यु के बाद एक पत्नी जिन समस्याओं से गुजरती है, लोगों को उसकी बहुत कम ही जानकारी हो पाती है। उनकी समस्याओं को समझने और स्थिति में सुधार के लिए सामान्य योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि जिले में कुल 39027 विधवा को पेंशन का लाभ दिया जाता है।
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प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं के कल्याण और मदद के लिए कई योजनाएं चलाई जाती हैं। इनमें से एक पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिलाओं को सहायक अनुदान योजना है। इस योजना के तहत सरकार विधवा निराश्रित महिलाओं को सालाना 6000 रुपये की पेंशन उपलब्ध कराती है। हालांकि पहले से संचालित विधवा पेंशन योजना में प्रदेश सरकार ने तीन साल पहले बदलाव किया। इसके तहत ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को लाभ देने के लिए आय सीमा बढ़ा कर दो लाख रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही अगर महिला का कोई बालिग पुत्र है, तो भी उसे विधवा पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें बाबूगिरी की प्रक्रिया से बचाने के लिए योजना को ऑनलाइन कर दिया गया है। विधवा पेंशन योजना का संचालन जिला प्रोबेशन कार्यालय के माध्यम से किया जाता है। योजना को अब पूरी तरह से ऑनलाइन कर दी गई है। अब पात्र महिलाएं सीधे जन सुविधा केंद्रों पर जाकर आवेदन करती हैं। इसके लिए सीडीओ की अध्यक्षता में अनुश्रवण समिति गठित की गई है। इसमें डीपीओ और डीडीओ को सदस्य बनाया गया है। आवेदन को ऑनलाइन करने के साथ नियमों को भी सरल किया गया है। एक तो उम्र की सीमा को खत्म कर दिया गया है। अब अगर 18 साल की विधवा है, तो उसे भी योजना का लाभ दिया जा रहा है।
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इन्हें नहीं मिलेगा लाभ
विधवा महिला यदि दोबारा विवाह कर लेती है, तो उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा। आवेदन के साथ विधवा को यह शपथ पत्र भी देना होगा कि वह किसी अन्य योजना का लाभ नहीं ले रही है।
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पुनर्विवाह व पुत्री की शादी के लिए भी अनुदान का प्रावधान
बलिया। विधवा की मदद को पेंशन के अलावा सरकार की ओर से खुद के पुनर्विवाह और पुत्री की शादी के लिए भी योजनाएं संचालित हैं। पुनर्विवाह के लिए 15 हजार और बेटी हो तो उसकी विवाह के लिए 10 हजार रुपये अनुदान का प्रावधान है। लेकिन नियम-कायदों के मकड़जाल के कारण यह योजना भी परवान नहीं चढ़ सका है। यही वजह है कि विधवा महिलाएं इधर-उधर मेहनत-मजदूरी करके अपना और बच्चों का गुजारा कर रही हैं।
महंगाई में नाकाफी है 500 रुपये मासिक का पेंशन, कई तो सालों से लगा रहीं चक्कर
बलिया। विधवा पेंशन की लाभ लेने वाली शहर की निवासिनी चंद्रावती देवी ने बताया कि पेंशन से कुछ सहारा तो मिलता है। लेकिन यह पेंशन भी समय से खाते में नहीं आता। महीनों बाद एकमुश्त आता है और इसके लिए कई बार कार्यालय जाकर पता करना पड़ता है। शहर की विधवा चानमती देवी ने कहा कि महंगाई के समय से 500 रुपये महीने के पेंशन से गुजारा नहीं होता। मजदूरी आदि करके किसी तरह अपना काम चलाती हैं। सोहांवय ब्लॉक के अमांव गांव निवासिनी ज्ञांति देवी व लीलावती देवी ने कहार्क सरकार की ओर मिलने वाला पेंशन नाकाफी है। कहा कि एक तो समय से पेंशन की राशि खाते में नहीं आती वहीं दूसरी ओर इस महंगाई में यह राशि नाकाफी साबित होती है। उधर, आज भेी कई विधवा योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। सोहांव ब्लॉक के टुटुवारी गांव निवासिनी माया देवी ने कहा कि उनके पति की मौत चार साल पहले हुई थी। इसके बाद से लेकर आज तक करीब 10 बार ऑनलाइन आवेदन किया लेकिन आज उसका पेंशन स्वीकृत नहीं किया गया। बताया कि गांव के खेतों में मजदूरी करके वह परिवार का भरण पोषण करती हैं। इसी तरह सोहांव ब्लॉक के ही सोहांव गांव निवासी फातिमा ने कहा कि पति की मौत दो साल पहले हो गई। इसके बाद से विधवा पेंशन के लिए वह कई बार ऑनलाइन कर चुकी है लेकिन आवेदन महीनों लंबित रखने के बाद निरस्त कर दिया जाता है।

विधवा पेंशन के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था है। एक ही अभ्यर्थी अगर एक से अधिक से आवेदन करता है तो सभी आवेदन सर्वर में फंस जाते हैं लिहाजा एक के अलावा अन्य आवेदनों को निरस्त करना पड़ता है। विधवा पेंशन की स्वीकृति जनपद में गठित समिति की ओर से की जाती है।
- लाल बहादुर सरोज, जिला प्रोबेशन अधिकारी, बलिया।
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