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Ballia News: 636 पंडालों में से 30 बना दिए गए झूलते तारों के नीचे
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नगर के कलेक्ट्रेट कालोनी स्थित दुर्गा पूजा पंडाल के उपर से गुजर रहे विद्युत तार। संवाद
- फोटो : 1
बलिया। मां की प्रतिमाओं को स्थापित करने के लिए जिले में 636 जगहों पर पंडाल बनाए जा रहे हैं। पूजा पंडालों के निर्माण को दिन- रात काम चल रहा है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पूजा पंडालों के निर्माण में सुरक्षा अनदेखी भारी पड़ सकती है। तारों के मकड़जाल के पास ही पूजा पंडालों के लोहे व बांस का ढांचा तैयार किया जा रहा है।
ऐसे में नवरात्र के समय मां का पंडालों में दर्शन व पूजन करने आने वाले का सुरक्षा की अनदेखी भारी पड़ सकती है। पंडालों में शाम को ही अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ होती है। शहर के कई प्रमुख पंडालों के पास बिजली के तार बगल से गुजरे हैं। कहीं तार लोहे के ढांचे के करीब हैं तो कहीं पंडाल के आसपास से गुजर रहे हैं।
कासिम बाजार, आर्य समाज रोड, लोहा पट्टी आदि के पंडालों के पास से तार गुजरे हुए है। हालांकि समितियों की तरफ से विद्युत तारों को दूर करने के उपाय किए गए है लेकिन अस्थाई व्यवस्था से सुरक्षा नहीं हो सकती है। लोहे के ढांचे के पास लटक रहे तार किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। बारिश या नमी की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता है। पंडालों के आसपास बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भी आवाजाही रहती है। भीड़ बढ़ने पर किसी का तार या लोहे के ढांचे के संपर्क में आना गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।
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11.61 करोड़ जारी होने के बाद भी जर्जर तार से नहीं मिली मुक्ति : शहर सहित विद्युत वितरण खंड नगर में जर्जर बिजली तारों को बदलने के लिए बिजनेस प्लान में 11.61 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी, लेकिन इसके बाद भी कई इलाकों में स्थिति जस की तस बनी हुई है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लटकते और जर्जर तार हादसों को दावत दे रहे हैं। कई जगह खंभे झूके हुए हैं और तार आपस में उलझे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बजट आने के बाद भी काम कागजों पर ही हुआ है।
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ऐसे में नवरात्र के समय मां का पंडालों में दर्शन व पूजन करने आने वाले का सुरक्षा की अनदेखी भारी पड़ सकती है। पंडालों में शाम को ही अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ होती है। शहर के कई प्रमुख पंडालों के पास बिजली के तार बगल से गुजरे हैं। कहीं तार लोहे के ढांचे के करीब हैं तो कहीं पंडाल के आसपास से गुजर रहे हैं।
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कासिम बाजार, आर्य समाज रोड, लोहा पट्टी आदि के पंडालों के पास से तार गुजरे हुए है। हालांकि समितियों की तरफ से विद्युत तारों को दूर करने के उपाय किए गए है लेकिन अस्थाई व्यवस्था से सुरक्षा नहीं हो सकती है। लोहे के ढांचे के पास लटक रहे तार किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। बारिश या नमी की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता है। पंडालों के आसपास बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भी आवाजाही रहती है। भीड़ बढ़ने पर किसी का तार या लोहे के ढांचे के संपर्क में आना गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।
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11.61 करोड़ जारी होने के बाद भी जर्जर तार से नहीं मिली मुक्ति : शहर सहित विद्युत वितरण खंड नगर में जर्जर बिजली तारों को बदलने के लिए बिजनेस प्लान में 11.61 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी, लेकिन इसके बाद भी कई इलाकों में स्थिति जस की तस बनी हुई है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लटकते और जर्जर तार हादसों को दावत दे रहे हैं। कई जगह खंभे झूके हुए हैं और तार आपस में उलझे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बजट आने के बाद भी काम कागजों पर ही हुआ है।