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फर्जी बैनामा मामला : अफसर फंसे लेकिन कर्मचारी सेफ

Tue, 22 Oct 2019 10:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 22 Oct 2019 10:30 PM IST
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Officer stranded, employee safe
बलिया। सदर तहसील के रजिस्ट्री कार्यालय में दस्तावेजों में कूटरचना कर बैनामा करने और जमीनों पर नामांतरण कराने के मामले में उप निबंधक, प्रभारी उप निबंधकों समेत 13 पर केस तो दर्ज हो गया लेकिन कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि जांच टीम ने कार्यालय के कर्मचारियों को भी दोषी मानते हुए सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति की थी।
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सदर तहसील के रजिस्ट्री कार्यालय में दस्तावेजों में कूट रचना कर बैनामा और नामांतरण का मामला सामने आने के बाद डीएम ने तीन सदस्यीय टीम से जांच कराई। टीम ने वर्ष 1981 के सात मामलों में दस्तावेजों में फेरबदल पाते हुए रजिस्ट्री कार्यालय सदर के अधिकारी व सभी कर्मचारियों को जिम्मेदार माना और इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की। जांच टीम की संस्तुति पर डीएम के आदेश से 39 वर्षों के दौरान तैनात रहे तीन प्रभारी उपनिबंधक व 10 उपनिबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। मुकदमे में रजिस्ट्री कार्यालय के किसी भी कर्मचारी का नाम नहीं है। नियमानुसार किसी भी विभाग के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग के अधिकारी की होती है। यही कारण है कि डीएम के निर्देश पर उपनिबंधक ने कोतवाली को तहरीर दी लेकिन इसमें काफी चालाकी कर दी गई। अधिकारी के अलावा कार्यालय के किसी कर्मचारी का नाम का उल्लेख नहीं किया गया है। जबकि इसी तरह के एक अन्य मामले में बलिया कोतवाली में ही प्रभारी उपनिबंधक लक्ष्मण चौबे समेत सात लोगों पर धोखाधड़ी आदि धाराओं में 29 अगस्त को मुकदमा दर्ज है। इस मुकदमे में कार्यालय के सब रजिस्ट्रार सहायक दीप नारायण पांडेय व मेराज खान का भी नाम है। 39 सालों में तैनात रहे प्रभारी उपनिबंधक व उपनिबंधक के अलावा इस दौरान तैनात रहे कर्मियों पर मुकदमा दर्ज क्यों नहीं कराया गया? कहीं फर्जी व कूट रचित बैनामा तैयार करने वाले मास्टर माइंड को बचाने का खेल तो नहीं किया गया?
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जिले में भू-माफिया का आतंक : बलिया। सरकार लाख दावा करे लेकिन भूमाफिया व दबंगों का आतंक जिले भर में है। भूमाफिया का एक बहुत बड़ा रैकेट है जिसे हर सरकारों में कहीं न कहीं से सत्ता का संरक्षण प्राप्त होता है या फिर किसी नेता का संरक्षण होता है। शहर में ही देखें तो कई विवादित मकानों व प्रतिष्ठानों पर दबंगों व भूमाफिया का कब्जा है। शहर में तो 20 से अधिक कीमती मकानों पर दबंगों का ताला बंद है जिसे जानते हुए भी प्रशासन हाथ डालने से कतराता है।
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