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बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें नहीं हो रही कम, अब बारिश से फजीहत
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सोंहाव ब्लाक के समीपवर्ती बाढ़ ग्रसीत गांवों का भ्रमण करते राज्य सभा सांसद नीरज शेखर व अन्य
- फोटो : BALLIA
बलिया। जिला प्रशासन भले ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचवाने का दावा कर रहा हो लेकिन हकीकत यह है कि बाढ़ प्रभावित कई क्षेत्रों के बारे में प्रशासन को जानकारी तक नहीं है। सदर तहसील क्षेत्र के बघौना, टुटुवारी, मेड़वरा, दुलारपुर, नसीरपुर, विशेश्वरपुर आदि गांव भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं जहां अबतक राहत की कोई व्यवस्था नहीं की। गुरुवार को जब राज्य सभा सांसद नीरज शेखर ने गड़हांचल के गांवों का दौरा किया तो पीड़ितों ने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया। इसके बाद उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें मोबाइल से खींच कर एसडीएम सदर को भेजा और राहत सामग्री पहुंचाने की बात कही।
बाढ़ से घिरे सदर तहसील के कई ऐसे गांव हैं, जहां जिला प्रशासन की निगाह नहीं गई है। इसको लेकर इन गांवों के लोगों में नाराजगी है। गड़हांचल के गांवों का गुरुवार को राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने दौरा किया। बाढ़ के हालात देख उनका माथा ठनका और उन्होंने एसडएम सदर को आईना दिखा दिया। गंगा में उफान आने के बाद सबसे पहले बैरिया तहसील के दर्जनों गांव जलमग्न हुए। इन गांवों में जिला प्रशासन राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है। इस बीच बाढ़ ने सदर तहसील के सोहांव ब्लाक के गांवों में भी पांव पसार दिया। धीरे-धीरे दर्जनों गांव जलमग्न हो गए। सदर तहसील के एनएच 31 से लगे गांवों पर तो जिला प्रशासन की नजर पड़ गई। मगर बघौना, टुटुवारी, मेड़वरा, दुलारपुर, नसीरपुर, विशेश्वरपुर आदि गांवों में बाढ़ के कहर का अंदाजा प्रशासन को नहीं हुआ। इन गांवों में अभी तक राहत की कोई सामग्री नहीं पहुंची है। लोगों का आरोप है कि सैकड़ों एकड़ में खड़ी धान की फसल बर्बाद हो चुकी है। इस पर भी प्रशासन का ध्यान नहीं है। इसकी जानकारी होने पर राज्यसभा सांसद नीरज शेखर गुरुवार को बघौना में पहुंचे थे। इसके बाद वे अन्य गांवों में भी गए। बारिश के बीच उनके गांव में पहुंचते ही लोगों ने प्रशासन पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। इतना सुनते ही सांसद शेखर ने एसडीएम सदर अश्विनी श्रीवास्तव को फोन कर बताया कि इधर भी बाढ़ आई है और यह आपको पता है ?। इसके बाद उन्होंने खुद ही बाढ़ के दृश्य अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया और एसडीएम को तस्वीरों को भेजा। साथ ही बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री देने की बात कही। इस दौरान बृजेन्द्र राय, संजय सिंह, डॉ, अनिल राय, गुड्डू राय, कृष्णानंद राय, रियाजुद्दीन राजू आदि रहे।
बाढ़ पीड़ितों पर मुसीबतों की बारिश : रामगढ़। क्षेत्र में करीब 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश के चलते दुबे छपरा से लेकर पांडेयपुर तक एनएच 31 पर बसे कटान पीड़ितों की हालत गुरुवार को और बदतर हो हो गई। बारिश का पानी घुसने से उनके डेरों में चूल्हे ठंडे पड़ गए। उधर, गंगा का जलस्तर स्थित है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर गुरुवार की शाम चार बजे 59.36 मी. पर स्थिर बना रहा। बाढ़ के बाद एक तो चारों तरफ पानी ही पानी है और लोग तिरपाल के सहारे दुबे छपरा से पांडेयपुर तक बसे बाढ़ पीड़ित मासूमों संग रात जाग कर गुजार रहे हैं। पीड़ितों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर ऐसे घड़ी में करें तो क्या करें आखिर जाएं भी तो कहा जाएं। एक सप्ताह पहले दुबे छपरा रिंग बंधा टूटने के बाद दुबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा के करीब 25000 की आबादी चंद मिनटों में दुबे छपरा एनएच 31 पर आ गई। जैसे जैसे पानी फैलता गया बाढ़ पीड़ित सड़क की पटरियों पर आते गए। दुबे छपरा से लेकर पांडेपुर तक बाढ़ पीड़ितों की संख्या बढ़ती गई। गांव में पानी फैलने के कारण प्रशासन से मिले तिरपाल के सहारे हजारों की संख्या में कटान पीड़ित किसी तरह अपना जीवन गुजर बसर करने को बाध्य हो गए। इसीबीच बुधवार की शाम से ही लगातार हो रही बारिश के चलते बाढ़ व कटान पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ गईं। अधिकांश परिवारों के चूल्हे ठंडे पड़ गए। पीड़ितों का कहना है कि एक तो गंगा की कहर से उनकी दैनिक मजदूरी ठप हो गई है तो दूसरी ओर बारिश से जीना दुश्वार हो गया है।
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बैरिया: बारिश ने बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश के पानी से भींग कर समय गुजारना बंधे पर तिरपाल में शरण लेने वाले पीड़ितों मजबूरी हो गई है। चौबेछपरा, सुघर छपरा, केहरपुर, दुबेछपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा समेत एक दर्जन से अधिक गांवों के पीड़ित एनएच 31 व बीएसटी बंधा के पटरियों पर शरण लिए हुए हैं। बुधवार की शाम से हो रही बरसात के कारण बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ गई है। पक्का पकाया भोजन व राहत सामग्री लेकर पहुंचने वाले स्वयंसेवकों का रास्ता भी बारिश ने रोक दिया है। एकमात्र सहारा विधायक सुरेंद्र सिंह का लंगर है।
30 हजार आबादी की बढ़ी मुश्किलें : लालगंज। क्षेत्र के बहुआरा, हृदयपुर, मुरारपट्टी, शिवपुर कपूर दियर, दलकी नंबर एक के तीस हजार आबादी बाढ़ के पानी से घिरी थी। यह लोग छतों पर प्लास्टिक टांग या दूसरे जगह किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे थे। बाढ़ की पानी तो कम हो गया लेकिन बुधवार की रात से हो रही बारिश ने इनकी परेशानियां बढ़ा दी है। जो बाढ़ पीडित अपने मवेशियों के साथ बीएसटी बंधे पर शरण लिए थे वह काफी परेशान हैं। उधर, बाढ़ राहत केंद्र इंटर कॉलेज मुरारपट्टी से बुधवार की रात में बाढ़ राहत पैकेट चोरी करने का प्रयास किया गया। चोरों ने बाढ़ राहत पैकेट रखे कमरे के पीछे से खिड़की तोड़ दी। सुबह ग्रामीणों ने देखा तो स्कूल के चपरासी को बताया और मौके पर पहुंचे चपरासी ने पुलिस को दी। लेखपाल ने उस कमरे में रखा राहत पैकेट गिनवाया और बताया कि मेरा एक भी राहत का पैकेट चोरी नहीं गया है।
तीन साल बाद नाविकों का भुगतान नहीं : बैरिया। वर्ष 2016 की बाढ़ में प्रशासन के निर्देश पर लगभग एक पखवारे तक बाढ़ पीड़ितों के राहत कार्य में सेवा में लिए गए कई नाविकों का तीन वर्ष बाद भी न तो मजदूरी का भुगतान हुआ, न ही उन्हें नाव का किराया मिला। इसके चलते इस बाढ़ में नाविकों ने काम करने से मना कर दिया था। वे 2016 के बकाये का भुगतान की मांग कर रहे थे। उदई छपरा निवासी नाविक ओमप्रकाश मल्लाह का कहना है कि 2016 की बाढ़ में हम लोगों ने 20 दिनों तक लगातार दिनरात बाढ़ पीड़ितों के बीच अपने नौकाओं के साथ राहत व बचाव कार्य किया तब हाकिमों ने वादा किया था कि बाढ़ बीतते ही भुगतान करा दिया जाएगा लेकिन तीन वर्षों से हमलोग दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं और कोई सुनने को तैयार नहीं है। इसी गांव के नाविक जयप्रकाश, जितेंद्र व देवनाथ ने बताया कि जब बाढ़ आती है तब अधिकारी आश्वासन देकर हम लोगों की सेवाएं ले लेते हैं और बाढ़ बीतते ही हम लोगों को भुला देते हैं। बताया कि 2013 का भुगतान 2016 में हुआ था।
भोजन नहीं देने पर भुगतान रोकने की सिफारिश : बैरिया। बाढ़ पीड़ितों को सरकारी भोजन का पैकेट उपलब्ध कराने वाली एजेंसी का तीन दिनों का भुगतान न करने की सिफारिश विधायक सुरेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत से की है। साथ ही इस संदर्भ में इसकी सूचना राहत व बचाव आयुक्त उत्तर प्रदेश व प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को लिखित रूप से दिया है। विधायक ने बताया कि रविवार, सोमवार व मंगलवार को पांडेयपुर, चिंतामणि राय के टोला, गुदरी सिंह के टोला, मिश्र गिरि के मठिया, मिश्र के हाता सहति गई गांवों के बाढ़ पीड़ितों को सरकारी भोजन का पैकेट उपलब्ध नहीं कराया गया। इस बाबत अधिकारियों ने बताया कि उनके बकाया भुगतान को लेकर गतिरोध था, जो समाप्त हो गया किंतु विधायक ने जोर देकर कहा कि जितने दिन भोजन के पैकेट नहीं वितरित हुए हैं, उतने दिन का भुगतान हर हाल में रोका जाए।
बाढ़ पीड़ितों के लिए बारिश बना सबब : दयाछपरा। एनएच और छतों पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों के लिए बारिश परेशानी का सबब बन चुका है। एनएच 31 के किनारे मवेशियों समेत बच्चों के साथ शरण लिए बाढ़ पीड़ित बारिश के चलते मवेशियों को खिलाने के लिए कुछ भी जुटा नहीं पाए और प्रशासन की ओर से भी भूसा उपलब्ध नहीं कराया गया। बाढ़ पीड़ित गोरख साह, तुमड़ी पासवान का कहना है कि भूसा के अभाव में बंधा के उत्तर दिशा के खेतों से घास काट कर खिलाते थे लेकिन लगातार बारिश के कारण घास मिल नही पाया।
बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंचा तिरपाल : जयप्रकाश नगर। क्षेत्र में गंगा और घाघरा नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि के कारण बीते एक सप्ताह से तीन पंचायतों के बाढ़ बीएसटी बांध, एनएच 31 व पुरानी रेलवे लाइन पर शरण लिए हुए हैं। इन्हें अब तक तिरपाल तक मुहैया नहीं कराया गया है। उधर, लगातार हो रही रिमझिम बारिश ने इनकी मुश्किलें बढ़ा दी है। बाढ़ पीड़ित रामनरेश चौधरी, अरुण सिंह, केशव सिंह, पुरेंद्र पांडेय, मोहन पाण्डेय, हरेन्द्र यादव आदि ने बताया कि नदियां तो हमलोगों को परेशान की ही थी अब इन्द्रदेव ने भी हमलोगों को सकते में डाल दिया है।
सपा नेता ने बाढ़ पीड़ितों को बांटी सामग्री : बलिया। समाजवादी पार्टी के नेता और प्रभारी नगर विधानसभा लक्ष्मण गुप्ता ने बाढ़ पीड़ितों की मदद करने के उद्देश्य से समर्थकों के साथ बजरहा, नेम छपरा, राजपुर, बबुरानी आदि गांव का भ्रमण किया। यहां के बाढ़ पीड़ितों का हालचाल जाना व भोजन, दवा, मोमबत्ती, माचिस आदि के पैकेट का वितरण किया। इसी क्रम में शिवपुर दीयर, परानपुर, जवही आदि क्षेत्रों में भी भोजन दवा के साथ पैकेट वितरण किया। श्री गुप्ता ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के अनुसार प्रशासन की तरफ से कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। इस मौके पर मुन्नी लाल यादव, अक्षयवर यादव, सत्यनारायण, कमलेश यादव, रविंद्र यादव, मंटू दुबे, परमेश्वर वर्मा, परवेज रोशन, अमित राय, सुरेंद्र यादव, श्रीभगवान दुबे, दूधनाथ यादव, मनोज ठाकुर आदि रहे।
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बाढ़ से घिरे सदर तहसील के कई ऐसे गांव हैं, जहां जिला प्रशासन की निगाह नहीं गई है। इसको लेकर इन गांवों के लोगों में नाराजगी है। गड़हांचल के गांवों का गुरुवार को राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने दौरा किया। बाढ़ के हालात देख उनका माथा ठनका और उन्होंने एसडएम सदर को आईना दिखा दिया। गंगा में उफान आने के बाद सबसे पहले बैरिया तहसील के दर्जनों गांव जलमग्न हुए। इन गांवों में जिला प्रशासन राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है। इस बीच बाढ़ ने सदर तहसील के सोहांव ब्लाक के गांवों में भी पांव पसार दिया। धीरे-धीरे दर्जनों गांव जलमग्न हो गए। सदर तहसील के एनएच 31 से लगे गांवों पर तो जिला प्रशासन की नजर पड़ गई। मगर बघौना, टुटुवारी, मेड़वरा, दुलारपुर, नसीरपुर, विशेश्वरपुर आदि गांवों में बाढ़ के कहर का अंदाजा प्रशासन को नहीं हुआ। इन गांवों में अभी तक राहत की कोई सामग्री नहीं पहुंची है। लोगों का आरोप है कि सैकड़ों एकड़ में खड़ी धान की फसल बर्बाद हो चुकी है। इस पर भी प्रशासन का ध्यान नहीं है। इसकी जानकारी होने पर राज्यसभा सांसद नीरज शेखर गुरुवार को बघौना में पहुंचे थे। इसके बाद वे अन्य गांवों में भी गए। बारिश के बीच उनके गांव में पहुंचते ही लोगों ने प्रशासन पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। इतना सुनते ही सांसद शेखर ने एसडीएम सदर अश्विनी श्रीवास्तव को फोन कर बताया कि इधर भी बाढ़ आई है और यह आपको पता है ?। इसके बाद उन्होंने खुद ही बाढ़ के दृश्य अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया और एसडीएम को तस्वीरों को भेजा। साथ ही बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री देने की बात कही। इस दौरान बृजेन्द्र राय, संजय सिंह, डॉ, अनिल राय, गुड्डू राय, कृष्णानंद राय, रियाजुद्दीन राजू आदि रहे।
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बाढ़ पीड़ितों पर मुसीबतों की बारिश : रामगढ़। क्षेत्र में करीब 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश के चलते दुबे छपरा से लेकर पांडेयपुर तक एनएच 31 पर बसे कटान पीड़ितों की हालत गुरुवार को और बदतर हो हो गई। बारिश का पानी घुसने से उनके डेरों में चूल्हे ठंडे पड़ गए। उधर, गंगा का जलस्तर स्थित है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर गुरुवार की शाम चार बजे 59.36 मी. पर स्थिर बना रहा। बाढ़ के बाद एक तो चारों तरफ पानी ही पानी है और लोग तिरपाल के सहारे दुबे छपरा से पांडेयपुर तक बसे बाढ़ पीड़ित मासूमों संग रात जाग कर गुजार रहे हैं। पीड़ितों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर ऐसे घड़ी में करें तो क्या करें आखिर जाएं भी तो कहा जाएं। एक सप्ताह पहले दुबे छपरा रिंग बंधा टूटने के बाद दुबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा के करीब 25000 की आबादी चंद मिनटों में दुबे छपरा एनएच 31 पर आ गई। जैसे जैसे पानी फैलता गया बाढ़ पीड़ित सड़क की पटरियों पर आते गए। दुबे छपरा से लेकर पांडेपुर तक बाढ़ पीड़ितों की संख्या बढ़ती गई। गांव में पानी फैलने के कारण प्रशासन से मिले तिरपाल के सहारे हजारों की संख्या में कटान पीड़ित किसी तरह अपना जीवन गुजर बसर करने को बाध्य हो गए। इसीबीच बुधवार की शाम से ही लगातार हो रही बारिश के चलते बाढ़ व कटान पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ गईं। अधिकांश परिवारों के चूल्हे ठंडे पड़ गए। पीड़ितों का कहना है कि एक तो गंगा की कहर से उनकी दैनिक मजदूरी ठप हो गई है तो दूसरी ओर बारिश से जीना दुश्वार हो गया है।
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बैरिया: बारिश ने बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश के पानी से भींग कर समय गुजारना बंधे पर तिरपाल में शरण लेने वाले पीड़ितों मजबूरी हो गई है। चौबेछपरा, सुघर छपरा, केहरपुर, दुबेछपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा समेत एक दर्जन से अधिक गांवों के पीड़ित एनएच 31 व बीएसटी बंधा के पटरियों पर शरण लिए हुए हैं। बुधवार की शाम से हो रही बरसात के कारण बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ गई है। पक्का पकाया भोजन व राहत सामग्री लेकर पहुंचने वाले स्वयंसेवकों का रास्ता भी बारिश ने रोक दिया है। एकमात्र सहारा विधायक सुरेंद्र सिंह का लंगर है।
30 हजार आबादी की बढ़ी मुश्किलें : लालगंज। क्षेत्र के बहुआरा, हृदयपुर, मुरारपट्टी, शिवपुर कपूर दियर, दलकी नंबर एक के तीस हजार आबादी बाढ़ के पानी से घिरी थी। यह लोग छतों पर प्लास्टिक टांग या दूसरे जगह किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे थे। बाढ़ की पानी तो कम हो गया लेकिन बुधवार की रात से हो रही बारिश ने इनकी परेशानियां बढ़ा दी है। जो बाढ़ पीडित अपने मवेशियों के साथ बीएसटी बंधे पर शरण लिए थे वह काफी परेशान हैं। उधर, बाढ़ राहत केंद्र इंटर कॉलेज मुरारपट्टी से बुधवार की रात में बाढ़ राहत पैकेट चोरी करने का प्रयास किया गया। चोरों ने बाढ़ राहत पैकेट रखे कमरे के पीछे से खिड़की तोड़ दी। सुबह ग्रामीणों ने देखा तो स्कूल के चपरासी को बताया और मौके पर पहुंचे चपरासी ने पुलिस को दी। लेखपाल ने उस कमरे में रखा राहत पैकेट गिनवाया और बताया कि मेरा एक भी राहत का पैकेट चोरी नहीं गया है।
तीन साल बाद नाविकों का भुगतान नहीं : बैरिया। वर्ष 2016 की बाढ़ में प्रशासन के निर्देश पर लगभग एक पखवारे तक बाढ़ पीड़ितों के राहत कार्य में सेवा में लिए गए कई नाविकों का तीन वर्ष बाद भी न तो मजदूरी का भुगतान हुआ, न ही उन्हें नाव का किराया मिला। इसके चलते इस बाढ़ में नाविकों ने काम करने से मना कर दिया था। वे 2016 के बकाये का भुगतान की मांग कर रहे थे। उदई छपरा निवासी नाविक ओमप्रकाश मल्लाह का कहना है कि 2016 की बाढ़ में हम लोगों ने 20 दिनों तक लगातार दिनरात बाढ़ पीड़ितों के बीच अपने नौकाओं के साथ राहत व बचाव कार्य किया तब हाकिमों ने वादा किया था कि बाढ़ बीतते ही भुगतान करा दिया जाएगा लेकिन तीन वर्षों से हमलोग दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं और कोई सुनने को तैयार नहीं है। इसी गांव के नाविक जयप्रकाश, जितेंद्र व देवनाथ ने बताया कि जब बाढ़ आती है तब अधिकारी आश्वासन देकर हम लोगों की सेवाएं ले लेते हैं और बाढ़ बीतते ही हम लोगों को भुला देते हैं। बताया कि 2013 का भुगतान 2016 में हुआ था।
भोजन नहीं देने पर भुगतान रोकने की सिफारिश : बैरिया। बाढ़ पीड़ितों को सरकारी भोजन का पैकेट उपलब्ध कराने वाली एजेंसी का तीन दिनों का भुगतान न करने की सिफारिश विधायक सुरेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत से की है। साथ ही इस संदर्भ में इसकी सूचना राहत व बचाव आयुक्त उत्तर प्रदेश व प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को लिखित रूप से दिया है। विधायक ने बताया कि रविवार, सोमवार व मंगलवार को पांडेयपुर, चिंतामणि राय के टोला, गुदरी सिंह के टोला, मिश्र गिरि के मठिया, मिश्र के हाता सहति गई गांवों के बाढ़ पीड़ितों को सरकारी भोजन का पैकेट उपलब्ध नहीं कराया गया। इस बाबत अधिकारियों ने बताया कि उनके बकाया भुगतान को लेकर गतिरोध था, जो समाप्त हो गया किंतु विधायक ने जोर देकर कहा कि जितने दिन भोजन के पैकेट नहीं वितरित हुए हैं, उतने दिन का भुगतान हर हाल में रोका जाए।
बाढ़ पीड़ितों के लिए बारिश बना सबब : दयाछपरा। एनएच और छतों पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों के लिए बारिश परेशानी का सबब बन चुका है। एनएच 31 के किनारे मवेशियों समेत बच्चों के साथ शरण लिए बाढ़ पीड़ित बारिश के चलते मवेशियों को खिलाने के लिए कुछ भी जुटा नहीं पाए और प्रशासन की ओर से भी भूसा उपलब्ध नहीं कराया गया। बाढ़ पीड़ित गोरख साह, तुमड़ी पासवान का कहना है कि भूसा के अभाव में बंधा के उत्तर दिशा के खेतों से घास काट कर खिलाते थे लेकिन लगातार बारिश के कारण घास मिल नही पाया।
बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंचा तिरपाल : जयप्रकाश नगर। क्षेत्र में गंगा और घाघरा नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि के कारण बीते एक सप्ताह से तीन पंचायतों के बाढ़ बीएसटी बांध, एनएच 31 व पुरानी रेलवे लाइन पर शरण लिए हुए हैं। इन्हें अब तक तिरपाल तक मुहैया नहीं कराया गया है। उधर, लगातार हो रही रिमझिम बारिश ने इनकी मुश्किलें बढ़ा दी है। बाढ़ पीड़ित रामनरेश चौधरी, अरुण सिंह, केशव सिंह, पुरेंद्र पांडेय, मोहन पाण्डेय, हरेन्द्र यादव आदि ने बताया कि नदियां तो हमलोगों को परेशान की ही थी अब इन्द्रदेव ने भी हमलोगों को सकते में डाल दिया है।
सपा नेता ने बाढ़ पीड़ितों को बांटी सामग्री : बलिया। समाजवादी पार्टी के नेता और प्रभारी नगर विधानसभा लक्ष्मण गुप्ता ने बाढ़ पीड़ितों की मदद करने के उद्देश्य से समर्थकों के साथ बजरहा, नेम छपरा, राजपुर, बबुरानी आदि गांव का भ्रमण किया। यहां के बाढ़ पीड़ितों का हालचाल जाना व भोजन, दवा, मोमबत्ती, माचिस आदि के पैकेट का वितरण किया। इसी क्रम में शिवपुर दीयर, परानपुर, जवही आदि क्षेत्रों में भी भोजन दवा के साथ पैकेट वितरण किया। श्री गुप्ता ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के अनुसार प्रशासन की तरफ से कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। इस मौके पर मुन्नी लाल यादव, अक्षयवर यादव, सत्यनारायण, कमलेश यादव, रविंद्र यादव, मंटू दुबे, परमेश्वर वर्मा, परवेज रोशन, अमित राय, सुरेंद्र यादव, श्रीभगवान दुबे, दूधनाथ यादव, मनोज ठाकुर आदि रहे।